कोलकाता, 24 मई (हि.स.)। पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने राज्य के सभी जिलों में संदिग्ध अवैध बांग्लादेशियों और प्रत्यावर्तन की प्रतीक्षा कर रहे विदेशी कैदियों के लिए ‘होल्डिंग सेंटर’ स्थापित करने का निर्देश दिया है। राज्य गृह एवं पर्वतीय मामलों विभाग की विदेशी शाखा ने 23 मई को जारी आदेश में जिला प्रशासन से आवश्यक ढांचा तैयार करने को कहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन केंद्रों का उपयोग उन विदेशी नागरिकों को अस्थायी रूप से रखने के लिए किया जाएगा, जिन पर अवैध रूप से भारत में रहने का संदेह है या जिनकी निर्वासन प्रक्रिया जारी है। आदेश में कहा गया है कि यह कदम केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप उठाया जा रहा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हाल ही में राज्य में “डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट” नीति लागू करने की घोषणा की थी। इसके बाद इस प्रशासनिक आदेश को सरकार की सख्त घुसपैठ विरोधी नीति का हिस्सा माना जा रहा है। आज का पंचांग | शुद्ध ज्येष्ठ शुक्लपक्ष प्रतिपदा आदेश में पिछले वर्ष केंद्रीय गृह मंत्रालय की उस सलाह का उल्लेख किया गया है, जिसमें भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्याओं से निपटने की प्रक्रिया तय की गई थी। जिला मजिस्ट्रेटों से कहा गया है कि वे “पकड़े गए विदेशियों” और “रिहा किए गए विदेशी कैदियों” के लिए होल्डिंग सेंटर स्थापित करें, ताकि प्रत्यावर्तन पूरा होने तक उन्हें वहां रखा जा सके। सूत्रों के मुताबिक, संदिग्ध अवैध प्रवासियों को पहचान सत्यापन और दस्तावेजों की जांच के दौरान अधिकतम 30 दिनों तक ऐसे केंद्रों में रखा जा सकता है। नागरिकता निर्धारण का अंतिम फैसला जिला मजिस्ट्रेट या समकक्ष अधिकारी करेंगे। इस प्रक्रिया में बायोमेट्रिक डेटा संग्रह, केंद्रीय पोर्टल पर जानकारी अपलोड करना और बाद में सीमा सुरक्षा बल को सौंपना भी शामिल है। Bihar: सीवान में करंट की चपेट में आए लोग, कई झुलसे एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जिलों को पहले से तैयार और प्रक्रिया के अनुरूप रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस आयुक्तालयों, जिला पुलिस अधीक्षकों और कोलकाता स्थित विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय को भी आदेश की प्रतियां भेजी गई हैं। कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री ने सीमा सुरक्षा बल के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में कहा था कि राज्य पुलिस द्वारा पकड़े गए घुसपैठियों को अदालतों में लंबी प्रक्रिया के बजाय सीधे सीमा सुरक्षा बल को सौंपा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया था कि नागरिकता संशोधन अधिनियम के दायरे से बाहर आने वाले लोगों को अवैध घुसपैठिया माना जाएगा। ‘धमाल 4’ का पहला गाना ‘चटनी’ रिलीज, मस्ती भरे अंदाज में नजर आए सितारे सरकारी अधिकारियों का मानना है कि यह व्यवस्था संसद द्वारा पिछले वर्ष पारित आव्रजन एवं विदेशी अधिनियम 2025 से जुड़ी हो सकती है। इस कानून ने विदेशी नागरिकों, पंजीकरण और निर्वासन से जुड़े पुराने कानूनों की जगह ली है तथा पुलिस को अधिक अधिकार दिए हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने बाद में आदेश जारी कर अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए कुछ अल्पसंख्यक समुदायों को संरक्षण प्रदान किया था, यदि वे 31 दिसंबर 2024 से पहले भारत आए हों। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में घुसपैठ का मुद्दा लंबे समय से चुनावी राजनीति का अहम हिस्सा रहा है। अब यह मुद्दा केवल राजनीतिक भाषणों तक सीमित न रहकर प्रशासनिक स्तर पर भी लागू होता दिखाई दे रहा है।
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कोलकाता, 24 मई (हि.स.)। पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने राज्य के सभी जिलों में संदिग्ध अवैध बांग्लादेशियों और प्रत्यावर्तन की प्रतीक्षा कर रहे विदेशी कैदियों के लिए ‘होल्डिंग सेंटर’ स्थापित करने का निर्देश दिया है। राज्य गृह एवं पर्वतीय मामलों विभाग की विदेशी शाखा ने 23 मई को जारी आदेश में जिला प्रशासन से आवश्यक ढांचा तैयार करने को कहा है।
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सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन केंद्रों का उपयोग उन विदेशी नागरिकों को अस्थायी रूप से रखने के लिए किया जाएगा, जिन पर अवैध रूप से भारत में रहने का संदेह है या जिनकी निर्वासन प्रक्रिया जारी है। आदेश में कहा गया है कि यह कदम केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप उठाया जा रहा है।
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मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हाल ही में राज्य में “डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट” नीति लागू करने की घोषणा की थी। इसके बाद इस प्रशासनिक आदेश को सरकार की सख्त घुसपैठ विरोधी नीति का हिस्सा माना जा रहा है।
आदेश में पिछले वर्ष केंद्रीय गृह मंत्रालय की उस सलाह का उल्लेख किया गया है, जिसमें भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्याओं से निपटने की प्रक्रिया तय की गई थी। जिला मजिस्ट्रेटों से कहा गया है कि वे “पकड़े गए विदेशियों” और “रिहा किए गए विदेशी कैदियों” के लिए होल्डिंग सेंटर स्थापित करें, ताकि प्रत्यावर्तन पूरा होने तक उन्हें वहां रखा जा सके।
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सूत्रों के मुताबिक, संदिग्ध अवैध प्रवासियों को पहचान सत्यापन और दस्तावेजों की जांच के दौरान अधिकतम 30 दिनों तक ऐसे केंद्रों में रखा जा सकता है। नागरिकता निर्धारण का अंतिम फैसला जिला मजिस्ट्रेट या समकक्ष अधिकारी करेंगे। इस प्रक्रिया में बायोमेट्रिक डेटा संग्रह, केंद्रीय पोर्टल पर जानकारी अपलोड करना और बाद में सीमा सुरक्षा बल को सौंपना भी शामिल है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जिलों को पहले से तैयार और प्रक्रिया के अनुरूप रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस आयुक्तालयों, जिला पुलिस अधीक्षकों और कोलकाता स्थित विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय को भी आदेश की प्रतियां भेजी गई हैं।
कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री ने सीमा सुरक्षा बल के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में कहा था कि राज्य पुलिस द्वारा पकड़े गए घुसपैठियों को अदालतों में लंबी प्रक्रिया के बजाय सीधे सीमा सुरक्षा बल को सौंपा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया था कि नागरिकता संशोधन अधिनियम के दायरे से बाहर आने वाले लोगों को अवैध घुसपैठिया माना जाएगा।
सरकारी अधिकारियों का मानना है कि यह व्यवस्था संसद द्वारा पिछले वर्ष पारित आव्रजन एवं विदेशी अधिनियम 2025 से जुड़ी हो सकती है। इस कानून ने विदेशी नागरिकों, पंजीकरण और निर्वासन से जुड़े पुराने कानूनों की जगह ली है तथा पुलिस को अधिक अधिकार दिए हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने बाद में आदेश जारी कर अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए कुछ अल्पसंख्यक समुदायों को संरक्षण प्रदान किया था, यदि वे 31 दिसंबर 2024 से पहले भारत आए हों।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में घुसपैठ का मुद्दा लंबे समय से चुनावी राजनीति का अहम हिस्सा रहा है। अब यह मुद्दा केवल राजनीतिक भाषणों तक सीमित न रहकर प्रशासनिक स्तर पर भी लागू होता दिखाई दे रहा है।
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