मदरसा शिक्षकों की तरह नियोजित शिक्षकों को भी वेतनमान दे सरकार: प्रो० रणजीत कुमार

मदरसा शिक्षकों की तरह नियोजित शिक्षकों को भी वेतनमान दे सरकार: प्रो० रणजीत कुमार

Chhapra: जयप्रकाश विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर शिक्षक संघ के सचिव एवं बिहार शिक्षा मंच के संयोजक प्रो० रणजीत कुमार ने मुख्यमंत्री एवं शिक्षामंत्री को खुला पत्र लिखकर मांग किया है कि बिहार के मदरसा शिक्षकों की तरह नियोजित शिक्षकों को भी सरकार वेतनमान, पेंशन आदि देने की अविलंब घोषणा करें.

प्रो०कुमार ने कहा है कि समान काम समान वेतन के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के अनपेक्षित न्याय-निर्णय तथा राज्य सरकार के शिक्षा एवं शिक्षक विरोधी रवैये से बिहार के चार लाख नियोजित शिक्षक व्यथित, आक्रोशित एवं आंदोलित है. 18 जुलाई को बिहार विधान मण्डल के समक्ष अपनी वाजिब माँगो के समर्थन में शांति पूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे निहत्थे शिक्षकों पर जिस तरह से बल प्रयोग किया गया वह सभ्य समाज के लिये कलंक है.

बिहार में 2006 से शिक्षकों की बहाली नियोजन के आधार पर हो रही है. लेकिन नियोजन नियमावली पूरी तरह से एकपक्षीय, अपमानजनक एवं शिक्षक विरोधी है. एक ही विद्यालय में कार्यरत नियोजित शिक्षकों एवं वेतनमान वाले शिक्षकों के वेतन एवं सेवा शर्तो में जमीन आसमान का फ़र्क है. बिहार में विद्यालयी शिक्षा पूरी तरह से नियोजित शिक्षकों के भरोसे है. परीक्षाफल बेहतर होने पर सरकार छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलने की बात प्रचारित कर अपना पीठ थपथपाती है. लेकिन नियोजित शिक्षकों के दु:ख दर्द एवं दुर्दशा से पूरी तरह अवगत होने के बावजूद उनकी समस्याओं के निदान के प्रति उदासीन एवं संवेदनहीन बनी हुई है.

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उन्होंने लिखा है कि निजी कंपनी एवं संस्थानों में काम करने वाले कार्मिकों के वेतन से भी भविष्य निधि कटौती होती है, लेकिन नियोजित शिक्षकों को इस मामूली सुविधा से भी वंचित रखा गया. नियोजित शिक्षकों को वेतनमान, पेंशन, सेवांत-लाभ, उपार्जित अवकाश, प्रोन्नति, अंतरजिला स्थानांतरण जैसे अपरिहार्य बुनियादी सुविधाओं एवं अधिकारों से आज तक महरूम रखा गया है.

प्रो०कुमार ने आगे कहा कि विडंबना तो यह है कि प्रशिक्षित शिक्षकों को भी दो साल तक अप्रशिक्षित शिक्षक का वेतन दिया गया है और उसके बाद वेतन में ग्रेड पे जोड़ा गया है. अप्रशिक्षित नियुक्त शिक्षकों को तो और भी नुकसान उठाना पड़ रहा है. उनकी वरीयता योगदान की तिथि से निर्धारित न कर प्रशिक्षण प्राप्त करने के तिथि से निर्धारित की जा रही है जो पूर्णतः अनुचित है. विदित हो कि अप्रशिक्षित नियुक्त सभी शिक्षक अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अत्यंत पिछड़ी जाति से संबंधित है. अतः सरकार का यह निर्णय सामाजिक न्याय की अवधारणा के भी विरुद्ध है.

बिहार सरकार ने हाल में ही बिहार मदरसा बोर्ड के सौ साल पूरे होने के उपलक्ष्य में मदरसा शिक्षकों को वेतनमान एवं पेंशन देने की घोषणा की है. बिहार सरकार के इस नेक कदम का दिल से स्वागत है, लेकिन तमाम योग्यता एवं क्षमता धारित करने वाले नियोजित शिक्षकों को वेतनमान-पेंशन आदि के दायरे से बाहर रखना समझ से परे है.

प्रो०कुमार ने कहा कि नियोजित शिक्षक सरकार के दुश्मन नहीं हैं और फिर इनका गुनाह क्या है? न्याय के साथ विकास की यात्रा में इनकी भी भागीदारी होनी चाहिए न कि हकमारी क्यों कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था के ये रीढ़ हैं. शिक्षा एवं शिक्षकों को खण्डों में बाँट कर वोट बैंक के नजरिए से देखना कतई उचित नहीं है.

उन्होंने सरकार से पुरजोर मांग किया है कि
1. मदरसा शिक्षकों की तरह नियोजित शिक्षकों को भी वेतनमान, पेंशन आदि देने का निर्णय अविलंब लिया जाए.
2. पुराने शिक्षकों को मिल रही तमाम सुविधाएं एवं अधिकार नियोजित शिक्षकों को भी मिले. 3. वरीयता का निर्धारण प्रशिक्षण प्राप्ति के तिथि से न कर नियुक्ति की तिथि से किया जाए ताकि अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अत्यन्त पिछड़ी जातियों के शिक्षकों को नुकसान न उठाना पड़े.
4. नियोजित शिक्षकों को अविलंब सहायक शिक्षक का दर्जा देकर राज्यकर्मी घोषित किया जाए. नियोजित शब्द अपमानजनक है तथा इससे शिक्षकों की सामाजिक प्रतिष्ठा भी धूमिल हो रही है.
5.प्रशिक्षित शिक्षकों को भी दो साल बाद ग्रेड पे दिया गया है जो एक प्रकार का आर्थिक शोषण ही है. सरकार सभी नियोजित शिक्षकों को ऐरियर के रूप में दो साल के बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित करें.
6. वर्तमान समय मे नियोजित शिक्षकों को उनके वेतन खाता वाले बैंक भी कर्ज़ देने से इनकार कर रहे है. सरकार तुरंत बिहार के सभी बैंकों को निर्देशित करे ताकि बैंक से इन शिक्षकों को जरूरत के समय होम-लोन, एडुकेशन लोन, ब्यक्तिगत कर्ज़ असानी से मिल सके.
7. अतिथि शिक्षकों की सेवा दिल्ली सरकार के तर्ज पर सामंजित कर उन्हें भी स्थायी किया जाए ताकि उनका भी मान सम्मान एवं वजूद कायम रहे. उन्होंने बिहार में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं शिक्षक हित में ऊपर इंगित
बिंदुओ पर सरकार द्वारा तत्काल ठोस निर्णय लेने की जरूरत पर बल दिया ताकि ज्ञान बाँटने वाले के घर मे छाया अंधेरा दूर हो सके.

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