चैत्र नवरात्रि: अमृत सिद्ध योग, जाने क्या है कलश स्थापन का शुभ मुहुर्त

बसंत नवरात्रि चैत्र माह के शुक्लपक्ष के प्रतिपदा तिथि से लगातार 9 दिनों तक चलने वाला त्योहार है. ऐसे तो साल में चार नवरात्रि होता है लेकिन दो नवरात्रि को विशेष रुप से मनाया जाता है. लेकिन उसमें बसंत नवरात्रि का महत्वपूर्ण ज्यादा रहता है.

नवरात्रि में माँ के नव रूपों का पूजन होता है।  इस वर्ष वसंत नवरात्री पर विशेष योग भी बन रहा है।  सर्वार्थ सिद्ध योग तथा अमृत सिद्धि योग इस विशेष योग में माता के नौ रूपों का पूजन करने से आपके उपर पारिवारिक कष्ट बना हुआ है वह दूर होगा। जिन लोगों को चंद्रमा का दोष बना हुआ है बसंत नवरात्रि में माँ भगवती का पूजन शक्ति प्रदान करने वाली होती है। विधि विधान से इसका पूजन करने से आपके ऊपर कई गुना आशीर्वाद बढ़ जाता है। बसंत नवरात्रि के दिन से नया संवत्सर का आरम्भ होता है।  इस साल नवरात्रि 09 अप्रैल से आरम्भ होगा और 17 अप्रैल तक चलेगा।

कलश स्थापना कौन से मुहुर्त में नहीं करे

कलश स्थापना करने से देवी शक्ति का एक विशेष पूजन है।  इसका पूजन करने से हमें शक्ति प्रदान होता है। लेकिन कलश स्थापना अगर शुभ मुहूर्त में नहीं हो देवी पूजन का लाभ नही
मिलता है। इस वर्ष कलश स्थापना करने के लिए विशेष मुहुर्त है।  कलश स्थापना अनुचित समय पर करने से देवी शक्ति का प्रकोप होता है।  अमावस्या तथा वैधृत योग एवं चित्रा नक्षत्र में कलश की स्थापना नहीं करे इससे परेशानी बढ़ जाती है।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

09 अप्रैल 2024 दिन मंगलवार समय सुबह 11:15 से 12:24 दोपहर तक.

प्रतिपदा तिथि का आरम्भ 08 अप्रैल 2024 रात्रि 11:55 से
प्रतिपदा तिथि का समाप्त 09 अप्रैल 2024 रात्रि 09:43 तक.

अभिजित मुहूर्त 09 अप्रैल 2024 दिन मंगलवार समय सुबह 11:15 से 12:24 दोपहर तक.

वैधृत योग का आरंभ 08 अप्रैल 2024 संध्या 06:16 से

वैधृत योग का समाप्त 09 अप्रैल 2024 संध्या 03:18 तक

सर्वार्थ सिद्ध योग का आरम्भ 09 अप्रैल 2024 सुबह 07:32 से
सर्वार्थ सिद्ध योग का समाप्त 10 अप्रैल 2024 सुबह 05:06 तक

अमृत सिद्ध योग का आरम्भ 09 अप्रैल 2024 सुबह 07:32 से
अमृत सिद्ध योग का समाप्त 10 अप्रैल 2024 सुबह 05:06 तक

कलश स्थापना कैसे करे .
मिट्टी के चौड़े मुंह का वर्तन रखे उसके निचे सप्तधान्य रखे यानि सप्तधान्य के ऊपर मिट्टी से बना कलश रखे कलश में जल भरे ,कलश को लाल कपड़ा से लपेटे कलश के गर्दन में
कलावा बांधे कलश में आम का पल्लव को कलश के ऊपर रखे उसके बाद लाल कपड़ा में नारियल को लपेटकर कलश के ऊपर रखे ,कलश में सुपारी,एक पैसा डाले ,दूर्वा ,रोली,
सिंदूर, पान के पता ,कलश पर चढ़ाए कलश स्थापना होने के बाद माँ भगवती का पूजन करे.

वसंत नवरात्रि में माता का घोड़े पर सवार होकर आयेगी.

इस वर्ष नवरात्रि का आरम्भ मंगलवार के दिन से आरम्भ होगा मंगलवार के दिन नवरात्रि आरंभ होने से माता घोड़े पर सवार होकर आएगी भगवती को घोड़ा पर आना ठीक नहीं होता है
घोड़ा का सवारी करते हुए आती है देश में प्राकृतिक आपदा , महामारी ,सीमावर्ती क्षेत्र में तनाव बनेगा .

ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा
ज्योतिष वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ
8080426594/9545290847

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