Chhapra: धार्मिक नगरी चिरान्द में मंगलवार को श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। गंगा, सरयू एवं सोन नदी के संगम तट सहित बंगाली बाबा घाट, जहाज घाट, मेला घाट, डोरीगंज घाट के अलावे विभिन्न घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
भक्तों ने पवित्र स्नान कर पूजा-अर्चना की तथा परिवार की सुख-समृद्धि और मोक्ष की कामना की। घाटों पर “हर-हर गंगे” और “बोल बम” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
इस अवसर पर प्रवचन करते हुए कंश दियर शिव मंदिर के महंथ व चिरान्द विकास परिषद के संरक्षक श्री श्री 1008कृष्ण गिरी उपाख्य नागा बाबा ने कहा कि पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उद्धार के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर माँ गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुईं।
उन्होंने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और जीवन की प्रतीक हैं। गंगा स्नान से मनुष्य के पापों का नाश होता है और आत्मिक शांति प्राप्त होती है।
श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद दान-पुण्य भी किया। घाटों पर सुरक्षा एवं व्यवस्था को लेकर स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवक भी सक्रिय दिखाई दिए।




















