Patna: बिहार की लोक संस्कृति और लोकगीतों को नई पहचान देने वाली सुप्रसिद्ध लोकगायिका मनीषा श्रीवास्तव को संगीत नाटक अकादमी द्वारा वर्ष 2025 का प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। इस उपलब्धि को बिहार के सांस्कृतिक जगत के लिए गौरवपूर्ण क्षण माना जा रहा है। सम्मान की घोषणा के बाद छपरा टुडे डॉट कॉम (chhapratoday.com) से बातचीत में मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी नहीं, बल्कि उन सभी लोक कलाकारों की है जो बिहार की परंपराओं, लोकगीतों और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। रिविलगंज: चोरी की बाइक, अवैध हथियार व कारतूस बरामद, दो गिरफ्तार उन्होंने कहा कि इस सम्मान को अपने बड़े बुजुर्गों, गुरुजनों, साथियों को समर्पित करती हूँ। जिन्होंने मुझे हर समय प्रोत्साहन भरे शब्दों से सराहा तथा निरंतर बेहतरीन कार्य करते रहने की प्रेरणा दी। राजेन्द्र कॉलेज एलुमनाई एसोसिएशन की पहल: 1976 बैच के पूर्व छात्रों ने ताज़ा कीं सुनहरी यादें लोक संगीत को समर्पित जीवन मनीषा श्रीवास्तव ने वबटाया कि उनका जीवन लोक संगीत को समर्पित है। उन्होंने अबतक भोजपुरी के अलावे मैथिली, अवधी, हिंदी एवं संस्कृत भाषाओं में गीत गाए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी तैयारी बिहार की बाकि भाषाओं मसलन अंगिका, बज्जिका एवं मगही की लोकगीतों को भी गाने की चल रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया की सभी भाषाएँ मां समान हैं और उन सभी भाषाओं में अगर अच्छे लोकगीत हैं, लोक संगीत है तो उसे उसका सम्मान मिलना चाहिए। रोटरी क्लब छपरा की साप्ताहिक बैठक एवं शिष्टाचार मुलाकात संपन्न, नए सत्र की कार्ययोजना पर हुई चर्चा लोकगीतों के साथ साथ बिहार के सांस्कृतिक विरासत समेत धरहोरों पर कार्य उन्होंने बताया कि लोकगीतों के साथ साथ बिहार के सांस्कृतिक विरासत समेत धरहोरों के ऊपर काम कर रही हैं। बाबू वीर कुँवर सिंह की जीवनी गीत, डॉ० राजेन्द्र प्रसाद की जीवनी गीत, प्रधानमंत्री के मोटे अनाज को प्रोत्साहन देने के आह्वान को प्रेरित करता मिलेट्स गीत तथा बेटी बाचाओ एवं बेटी पढ़ाओ अभियान को सार्थक बनाने हेतु बेटियों के ऊपर अलग-अलग विषय को लेकर गीत गा चुकी हैं। आने वाले वर्षों में बिहार के अन्य धरोहरों पर आपको गीत सुनने को मिलेंगे। बाजार में बजने वाले गीतों के समकक्ष श्लील गीतों का एक समानांतर लकीर खड़ा किया मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि शुरु से अपना अलग राह बनाकर चलती रही हूँ। मैंने बाजार के अधीन खुद को नहीं किया, बल्कि बाजार में बजने वाले गीतों के समकक्ष श्लील गीतों का एक समानांतर लकीर खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि संगीत नाटक अकादमी से मिला सम्मान उन्हें नई ऊर्जा देगा।
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Patna: बिहार की लोक संस्कृति और लोकगीतों को नई पहचान देने वाली सुप्रसिद्ध लोकगायिका मनीषा श्रीवास्तव को संगीत नाटक अकादमी द्वारा वर्ष 2025 का प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। इस उपलब्धि को बिहार के सांस्कृतिक जगत के लिए गौरवपूर्ण क्षण माना जा रहा है।
सम्मान की घोषणा के बाद छपरा टुडे डॉट कॉम (chhapratoday.com) से बातचीत में मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी नहीं, बल्कि उन सभी लोक कलाकारों की है जो बिहार की परंपराओं, लोकगीतों और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस सम्मान को अपने बड़े बुजुर्गों, गुरुजनों, साथियों को समर्पित करती हूँ। जिन्होंने मुझे हर समय प्रोत्साहन भरे शब्दों से सराहा तथा निरंतर बेहतरीन कार्य करते रहने की प्रेरणा दी।
मनीषा श्रीवास्तव ने वबटाया कि उनका जीवन लोक संगीत को समर्पित है। उन्होंने अबतक भोजपुरी के अलावे मैथिली, अवधी, हिंदी एवं संस्कृत भाषाओं में गीत गाए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी तैयारी बिहार की बाकि भाषाओं मसलन अंगिका, बज्जिका एवं मगही की लोकगीतों को भी गाने की चल रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया की सभी भाषाएँ मां समान हैं और उन सभी भाषाओं में अगर अच्छे लोकगीत हैं, लोक संगीत है तो उसे उसका सम्मान मिलना चाहिए।
लोकगीतों के साथ साथ बिहार के सांस्कृतिक विरासत समेत धरहोरों पर कार्य
उन्होंने बताया कि लोकगीतों के साथ साथ बिहार के सांस्कृतिक विरासत समेत धरहोरों के ऊपर काम कर रही हैं। बाबू वीर कुँवर सिंह की जीवनी गीत, डॉ० राजेन्द्र प्रसाद की जीवनी गीत, प्रधानमंत्री के मोटे अनाज को प्रोत्साहन देने के आह्वान को प्रेरित करता मिलेट्स गीत तथा बेटी बाचाओ एवं बेटी पढ़ाओ अभियान को सार्थक बनाने हेतु बेटियों के ऊपर अलग-अलग विषय को लेकर गीत गा चुकी हैं। आने वाले वर्षों में बिहार के अन्य धरोहरों पर आपको गीत सुनने को मिलेंगे।
बाजार में बजने वाले गीतों के समकक्ष श्लील गीतों का एक समानांतर लकीर खड़ा किया
मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि शुरु से अपना अलग राह बनाकर चलती रही हूँ। मैंने बाजार के अधीन खुद को नहीं किया, बल्कि बाजार में बजने वाले गीतों के समकक्ष श्लील गीतों का एक समानांतर लकीर खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि संगीत नाटक अकादमी से मिला सम्मान उन्हें नई ऊर्जा देगा।
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