Chhapra: संभावित बाढ़ एवं सुखाड़ की स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन द्वारा की गई पूर्व तैयारियों एवं कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा हेतु समाहरणालय सभाकक्ष में प्रभारी सचिव सह प्रधान सचिव ग्रामीण विकास विभाग की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया।
जिलाधिकारी ने पावर पॉइंट के माध्यम से तैयारियों के संबंध में एक एक कर जानकारी दी। विगत 5 वर्षों के वर्षापात के आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए आपदा प्रबंधन की व्यापक योजना तैयार की गई है। मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार बाढ़ आपदा मानव संसाधन एवं क्रियान्वयन के तहत सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जिला स्तर पर सभी आवश्यक संसाधनों की विस्तृत मैपिंग की गई। जिला में 31,881 पॉलिथीन शीट्स उपलब्ध है तथा प्रमंडल का नोडल जिला होने के नाते आवश्यकतानुसार अन्य जिलों को पॉलिथीन शीट की आपूर्ति करने के लिए निविदा के माध्यम से दर एवं अपूर्त्तिकर्त्ता का निर्धारण किया गया है। इसके साथ ही लाइफ जैकेट्स तथा महाजाल की आपूर्ति हेतु भी निविदा के माध्यम से प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इन सामग्रियों की ससमय आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु निविदा के माध्यम से आदेश निर्गत किये गये हैं।
नावों का परिचालन: बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित आवागमन एवं बचाव कार्यों के लिए 203 निजी नाव मालिकों के साथ एकरारनामा कर तैयार स्थिति में रखा गया है।
खाद्यान्न एवं ड्राई राशन पैकेट: आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित परिवारों के लिए ड्राई राशन पैकेट तथा फूड पैकेट्स तैयार करने हेतु पैकेटिंग के लिए स्थल चिन्हित कर लिए गए हैं।
राहत शिविर एवं सामुदायिक रसोई: बाढ़ पीड़ितों के आश्रय हेतु कुल 199 बाढ़ राहत शिविर स्थल चिन्हित किए गए हैं। इसके साथ ही, शुद्ध व गर्म भोजन की व्यवस्था के लिए 178 सामुदायिक रसोई स्थल भी चिन्हित किये गये हैं।
अनुग्रहिक अनुदान (GR): बाढ़ प्रभावित पात्र परिवारों को आपदा संपूर्ति पोर्टल के माध्यम से सीधे बैंक खाते में 7000 रुपये प्रति परिवार की दर से अनुग्रहिक अनुदान राशि अंतरित करने हेतु परिवारों के सत्यापन की प्रक्रिया को अग्रिम रूप से अद्यतन किया जा रहा है।
तटबंधों की सुरक्षा
तटबंधों की स्थिति : बाढ़ सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील स्थलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। कुल चिन्हित मुख्य स्थलों में से 10 में से 5 स्थलों पर कार्य पूर्ण कर लिया गया है, तथा शेष 5 स्थलों पर कार्य प्रगति पर है, जिसे 15 जून तक पूरा करने का निर्देश दिया गया। मकेर के हैज़लपुर (गंडक नदी) में तथा सोनपुर के सबलपुर पश्चिमी (गंगा नदी) में जारी बाढ़ सुरक्षा कार्यों में अतिरिक्त संसाधन लगाकर काम को तेजी से पूरा करने का निदेश दिया गया।
नल-जल एवं पेयजल आपूर्ति: जिले की कुल 4,298 नल-जल योजनाओं में से लगभग 500 योजनाओं में कुछ दिक्कत की जानकारी दी गई थी जिन्हें आवश्यक मरम्मती के उपरांत क्रियाशील किया गया है।
पेयजल हेल्पलाइन: पेयजल से संबंधित नल जल या चापाकलों की त्वरित मरम्मत हेतु विशेष हेल्पलाइन नंबर 06152-244791 जारी किया गया है, जो सुबह 7:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक क्रियाशील रहकर शिकायतों का निवारण कर रहा है।
चिकित्सा एवं पशु स्वास्थ्य प्रबंधन:
●स्वास्थ्य विभाग द्वारा कुल 162 स्टेटिक मेडिकल टीमें (Static Teams) तथा 52 मोबाइल मेडिकल टीमें (Mobile Teams) गठित की गई हैं, जो आवश्यक दवाइयों के पर्याप्त स्टॉक के साथ मुस्तैद रहेंगी।
पशु राहत शिविर: बाढ़ के दौरान मवेशियों के चारे और चिकित्सा के लिए जिले में कुल 32 पशु राहत शिविर स्थल चिन्हित किए गए हैं।
जिला आपातकालीन संचालन केंद्र (नियंत्रण कक्ष): किसी भी आपातकालीन सूचना अथवा सहायता के लिए जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष स्थापित है, जिसका दूरभाष संख्या 06152-245023 है। यह नियंत्रण कक्ष 24X7 (चौबीसों घंटे) कार्यरत है।
कृषि एवं सुखाड़ की तैयारी: सुखाड़ की संभावना को देखते हुए किसानों की सहायता के लिए डीजल अनुदान (Diesel Subsidy) तथा आकस्मिक फसल योजना के तहत वैकल्पिक व्यवस्थाओं की तैयारी मुकम्मल कर ली गई है। राजकीय नलकूपों के संदर्भ में बताया गया कि जिला में 159 नलकूप चालू अवस्था में हैं तथा 171 नलकूप विभिन्न कारणों से बंद हैं। सभी बंद नलकूपों की प्राथमिकता से मरम्मती कराकर क्रियाशील करने का निदेश दिया गया।
बैठक में जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव, वरीय पुलिस अधीक्षक, उप विकास आयुक्त लक्ष्मण तिवारी, अपर समाहर्ता विधि व्यवस्था प्रमोद कुमार पांडे, विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारी, सभी अनुमंडल पदाधिकारी तथा भूमि सुधार उपसमाहर्ता उपस्थित थे।




















