स्वदेशी ‘विक्रांत’ का तीसरा समुद्री परीक्षण पूरा, इस साल नौसेना में होगा शामिल

स्वदेशी ‘विक्रांत’ का तीसरा समुद्री परीक्षण पूरा, इस साल नौसेना में होगा शामिल

– देश का पहला विमान वाहक पोत नौसेना को पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता प्रदान करेगा
– तीसरे परीक्षण में जहाज की विभिन्न परिस्थितियों में जटिल युद्धाभ्यास क्षमता देखी गई

नई दिल्ली: समुद्र में उतरने के एक हफ्ते बाद भारत का पहला स्वदेशी निर्मित विमान वाहक पोत आईएसी विक्रांत अपना तीसरा समुद्री परीक्षण पूरा करने के बाद वापस कोच्चि बंदरगाह पर आ गया है। इस दौरान ऑनबोर्ड पर लगे बड़ी संख्या में विभिन्न उपकरणों और प्रणालियों पर प्रशिक्षण के साथ-साथ उनके परीक्षण किए गए। कोचीन शिपयार्ड में निर्मित यह युद्धपोत सभी तरह के समुद्री परीक्षण पूरे होने के बाद आजादी की 75वीं वर्षगांठ के समय देश को समर्पित किया जायेगा। भारत में ही तैयार यह जहाज नौसेना को पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता प्रदान करेगा।

देश के पहले स्वदेशी विमान वाहक 40 टन वजनी आईएसी विक्रांत का पहला परीक्षण पिछले साल अगस्त में और दूसरा समुद्री परीक्षण अक्टूबर में किया जा चुका है। पहला समुद्री परीक्षण प्रणोदन, नौवहन सूट और बुनियादी संचालन स्थापित करने के लिए था। अक्टूबर-नवंबर में दूसरे समुद्री परीक्षण के दौरान विभिन्न मशीनरी परीक्षणों और उड़ान परीक्षणों के संदर्भ में जहाज को उसकी गति के माध्यम से देखा गया। भारत में बनने वाले सबसे बड़े और जटिल युद्धपोत के 09 जनवरी को शुरू हुए तीसरे समुद्री परीक्षण में विशाखापत्तनम स्थित डीआरडीओ प्रयोगशाला, नौसेना विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला के वैज्ञानिक भी शामिल हुए। सभी तरह के समुद्री परीक्षण पूरे होने के बाद इसे आजादी की 75वीं वर्षगांठ के समय ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के उपलक्ष्य में देश को समर्पित किया जाना है।

डिफेंस कोच्चि के प्रवक्ता ने बताया कि तीसरे परीक्षण के दौरान जहाज की विभिन्न परिस्थितियों में जटिल युद्धाभ्यास क्षमता देखी गई। इसके अलावा जहाज के विभिन्न सेंसर सूट का भी परीक्षण किया गया। तीसरे समुद्री परीक्षण में मिले नतीजों और संतुलन कार्य के साथ समुद्री परीक्षणों के आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने आईएसी विक्रांत को 23 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनाया है। आईएसी की डिलीवरी के साथ भारत इस विमान वाहक को स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्माण करने की क्षमता वाले राष्ट्रों के एक चुनिंदा समूह में शामिल हो जाएगा। इससे सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती मिलने के साथ ही हिन्द महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ेगी।

जहाज की क्षमता के बारे में कमांडर विवेक मधवाल ने कहा कि इस युद्धपोत में 2,300 से अधिक डिब्बे हैं, जिसमें लगभग 1,700 लोग सवार हो सकते हैं। इसमें महिलाओं के लिए विशेष केबिन भी बनाये गए हैं। यह स्वदेशी विमान वाहक मिग-29के लड़ाकू जेट, कामोव-31 हेलीकॉप्टर, एमएच-60आर बहु-भूमिका हेलीकॉप्टर भी संचालित करेगा। इस आधुनिक विमान वाहक पोत के निर्माण के दौरान डिजाइन बदलकर वजन 37 हजार 500 टन से बढ़ाकर 40 हजार टन से अधिक कर दिया गया। इसी तरह जहाज की लंबाई 252 मीटर (827 फीट) से बढ़कर 260 मीटर (850 फीट) हो गई। यह 60 मीटर (200 फीट) चौड़ा है। इस पर लगभग तीस विमान एक साथ ले जाए जा सकते हैं, जिसमें लगभग 25 ‘फिक्स्ड-विंग’ लड़ाकू विमान शामिल होंगे। इसमें लगा कामोव का-31 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग भूमिका को पूरा करेगा।

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