देहरादून: उत्तराखंड में भी भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया शुरू करने करने का निर्णय लिया है। निर्वाचन आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से बूथ प्रबंधन पर कार्य करने की अपेक्षा की है। वर्ष 2026 फरवरी माह से राज्य में एसआईआर कार्य शुरू होना है और इसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ बीवी पुरुषोत्तम ने सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि वे मतदाता पुनर्निरीक्षण को गंभीरता से ले और सभी 11733 पोलिंग बूथों पर एक एक प्रतिनिधि (बीएलओ) नियुक्ति करें। उन्होंने बताया कि राज्य की 70 विधानसभाओं में मतदाताओं को अब अपने नाम स्वयं मतदाता सूची में तलाशने होंगे और यदि उनका नाम दर्ज नहीं है तो वे अपना नाम मतदाता सूची में अवश्य दर्ज करवाए और यदि उनका नाम देश में कहीं और दर्ज हैं तो वे अपना नाम हटा दें। उत्तराखंड में 2003 की मतदाता सूची के आधार पर एसआईआर लागू किया जा रहा है। जनगणना प्री टेस्ट: डीसीओ ट्रेनर्स ने क्षेत्र में कराया स्व-गणना, छ्ह जुलाई से प्रगणक व पर्यवेक्षक करेंगे पूर्व परिक्षण उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में बहुत से मतदाता ऐसे हैं, जिनके दो या उससे भी ज्यादा स्थानों पर मतदाता सूची में नाम दर्ज हैं। कोटद्वार विधानसभा क्षेत्र में ऐसे कई नाम पकड़ में आए हैं। उत्तराखंड में उत्तर प्रदेश की सीमाओं से लगे शहर व कस्बों में दो जगह नाम पाए गए हैं। एसआईआर से दो जगह नाम होने पर हटाए दिए जाएंगे। उत्तराखंड में एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण’ प्रक्रिया फरवरी माह से शुरू होने की उम्मीद है। इसके तहत सभी मतदाताओं को परिगणना फॉर्म भरकर बीएलओ के पास जमा करना होगा। फॉर्म जमा न करने पर मतदाता सूची से नाम हट जाएगा। एनर्जी ड्रिंक’ के दावों पर एफएसएसएआई सख्त, कई बेवरेज ब्रांड्स को नोटिस सूत्रों की मानें तो एसआईआर की सबसे ज्यादा उत्तराखंड के मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में है। ऐसा अंदेशा कईं सालों से जताया जाता रहा है कि उत्तराखंड की वोटर लिस्ट में हजारों की संख्या में ऐसे वोटर हैं जिनके नाम यूपी बिहार बंगाल झारखंड आदि राज्यों की मतदाता सूची में भी शामिल हैं। यूपी बिहार और अन्य राज्यों से आए लोग सरकारी भूमि पर अवैध रूप से कब्जे कर अनधिकृत रूप से बसे हुए है। इन लोगों में एसआईआर को लेकर सबसे ज्यादा दहशत है। अमरनाथ यात्रियों का पहला जत्था रवाना, स्टेशन पर लगा विशाल भंडारा
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देहरादून: उत्तराखंड में भी भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया शुरू करने करने का निर्णय लिया है। निर्वाचन आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से बूथ प्रबंधन पर कार्य करने की अपेक्षा की है। वर्ष 2026 फरवरी माह से राज्य में एसआईआर कार्य शुरू होना है और इसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
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उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ बीवी पुरुषोत्तम ने सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि वे मतदाता पुनर्निरीक्षण को गंभीरता से ले और सभी 11733 पोलिंग बूथों पर एक एक प्रतिनिधि (बीएलओ) नियुक्ति करें। उन्होंने बताया कि राज्य की 70 विधानसभाओं में मतदाताओं को अब अपने नाम स्वयं मतदाता सूची में तलाशने होंगे और यदि उनका नाम दर्ज नहीं है तो वे अपना नाम मतदाता सूची में अवश्य दर्ज करवाए और यदि उनका नाम देश में कहीं और दर्ज हैं तो वे अपना नाम हटा दें। उत्तराखंड में 2003 की मतदाता सूची के आधार पर एसआईआर लागू किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में बहुत से मतदाता ऐसे हैं, जिनके दो या उससे भी ज्यादा स्थानों पर मतदाता सूची में नाम दर्ज हैं। कोटद्वार विधानसभा क्षेत्र में ऐसे कई नाम पकड़ में आए हैं। उत्तराखंड में उत्तर प्रदेश की सीमाओं से लगे शहर व कस्बों में दो जगह नाम पाए गए हैं। एसआईआर से दो जगह नाम होने पर हटाए दिए जाएंगे। उत्तराखंड में एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण’ प्रक्रिया फरवरी माह से शुरू होने की उम्मीद है। इसके तहत सभी मतदाताओं को परिगणना फॉर्म भरकर बीएलओ के पास जमा करना होगा। फॉर्म जमा न करने पर मतदाता सूची से नाम हट जाएगा।
सूत्रों की मानें तो एसआईआर की सबसे ज्यादा उत्तराखंड के मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में है। ऐसा अंदेशा कईं सालों से जताया जाता रहा है कि उत्तराखंड की वोटर लिस्ट में हजारों की संख्या में ऐसे वोटर हैं जिनके नाम यूपी बिहार बंगाल झारखंड आदि राज्यों की मतदाता सूची में भी शामिल हैं। यूपी बिहार और अन्य राज्यों से आए लोग सरकारी भूमि पर अवैध रूप से कब्जे कर अनधिकृत रूप से बसे हुए है। इन लोगों में एसआईआर को लेकर सबसे ज्यादा दहशत है।
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