नए साल पर देश के लिए लें संकल्प

नए साल पर देश के लिए लें संकल्प

(प्रशांत सिन्हा)
नए वर्ष में नव प्रभात का नव सत्कार करें. पूरे संसार में नए साल के आगमन का उत्सव पूरे उल्लास उमंग से मनाया जाता है. नए साल के आगमन पर एक सुदृढ परंपरा है कि लोग अपने अंदर सुधार लाने या अपनी बेहतरी के लिए नए संकल्प लेते हैं.

एक जनवरी को हम उत्सव मनाते हैं वह कुछ नहीं अपितु वही जॉर्जियाई कैलेंडर है जिसे पुरे संसार में प्रमुखता से स्वीकार किया जाता है. हालांकि भारत सहित अनेक देशों में नए साल मनाने के लिए उनकी अपनी परंपराएं, तिथियां और रीतियां हैं जैसे भारत में विभिन्न राज्य फसलों की कटाई के समय गुड़ी पाडवा, वैसाखी आदि के रूप में नए साल का उत्सव मनाते हैं. जापानी लोग नए साल के अवसर पर पिछले साल के समस्याओं एवं चिंताओं को विदा करने और एक बेहतर साल की तैयारी करने के लिये “बोनेकई ” अर्थात ‘ पुराने साल को भूल जाओ, दावत का आयोजन करते हैं. बदलता समय नएपन का एहसास कराता है. नया साल भी अपने आगमन के साथ हमें नएपन की ओर आगे बढ़ाता है.

हम सभी तमाम उम्र नए नए संकल्प लेते रहते हैं. उदाहरणार्थ नए साल में खूब पढ़ाई करेंगे, सेहत बनाएंगे, धूम्रपान नहीं करेंगे इत्यादि. लेकिन क्या हमने देश के लिए कुछ अच्छा करने का कभी संकल्प लिया है? आइए नव वर्ष के अवसर पर नया संकल्प लेकर देश के सच्चे नागरिक होने का फ़र्ज़ अदा करें.

देश हमें देता है सब कुछ, हम भी कुछ देना सीखें. देश से अपने लिए सारे अधिकार, सारी सुविधाएं और सारे संसाधनों को पूरा किया जाने का हक तो जताते है लेकिन बदले में उसके लिए हम क्या करते हैं ? हम केवल करदाता होने का दंभ भरते हैं. क्या लोकतन्त्र एकतरफा कायम होता है ? राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए हमें धन या समय नहीं खर्च करना होता. केवल अपनी आदतें सुधारने होंगे. पर्यावरण के प्रति जागरुकता लाना होगा. लोगों का कूड़ा इधर उधर नहीं फेंकना चाहिए. प्राकृतिक संसाधनों को उचित हिसाब से इस्तेमाल करना चहिए. इसी तरह तमाम ऐसे छोटे छोटे सहज कदम हैं जिन्हें कोई भी उठाकर देश के प्रति अपनी कृतज्ञता जता सकता है. राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान कर सकता है.

प्रकृति प्रेमी बनें: ग्लोबल वार्मिंग समस्या से सभी वाकिफ हैं। शहर के प्रदूषण, प्राकृतिक आपदाओं, ऋतु चक्र में बदलाव से हम वाकिफ हैं. सब प्रकृति के तिरस्कार का परिणाम है. याद करें पिछली बार पौधा कब रोपा था ? हमें चिंता करना होगा. चिंता से ज्यादा कर्म करें. प्रकृति प्रेमी बनें. पौधारोपण करें. जल संरक्षण करें. जैव विविधता को बचाएं. प्रकृति से तादम्या स्थापित करने करने वाली चीज़ों की ही इस्तेमाल करें. अगर ऐसा करते हैं तो यह देश के प्रति योगदान है.

रक्त दान करें: जैसे बुद्धि होती है कि उसे किसी को कितना भी दे दो कम नहीं होती बल्कि उसमे इज़ाफ़ा होता है. उसी प्रकार शरीर का रक्त होता है. किसी जरूरतमंद का जीवन संवार सकता है. शरीर अपनी जरुरत के मुताबिक रक्त का पुनर्निर्माण कर लेता है.

भ्रष्टाचार का हिस्सा न बनें: सुविधाभोगी बनते हुए किसी काम के लिए पैसे न दें और न किसी काम के लिए घूस लें. यह दलील सही हो सकती है कि बिना भ्रष्टाचार के दलदल में कुदे काम करना या कराना नामुमकिन है. लेकिन बदलाव के लिए शुरुआत तो कोई न कोई करता है.

शिक्षा का अलख जलाएं: आरामदायक वित्तीय स्थिति में हैं तो अपनी आय में एक हिस्सा गरीब, अनाथ बच्चों की शिक्षा के मद में तय कर सकते हैं. देश का भाग्य बदलने में आपका यह योगदान महत्वपूर्ण हो सकता है. यदि सही तरीके से कमाई कर रहे सभी लोग एक बच्चे को पढ़ाएंगे तो देश से निरक्षरता के दूर होने में देर नहीं लगेगी.

ऐसे नए संकल्प, नए विचारों के साथ नव वर्ष की शुरुआत करें जिससे परिवार, समाज और देश सभी का भला होगा.

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