नई दिल्ली, 20 दिसंबर (हि.स.)। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शनिवार को मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को कमजोर करके गरीब किसानों और मजदूरों के हितों पर हमला किया है। सोनिया गांधी ने एक्स पर लिखा कि कांग्रेस गरीबों के हक के लिए सड़क से संसद तक लड़ाई लड़ेगी। उन्होंने कहा कि पिछले 11 साल में मोदी सरकार ने मनरेगा को जानबूझकर कमजोर करने की कोशिश की है जबकि कोविड के समय इसी योजना ने गरीबों की जान बचाई थी। उन्होंने अफसोस जताया कि सरकार ने विपक्ष से पूछे बिना इसका नाम बदल दिया है। अब दिल्ली में बैठे लोग तय करेंगे कि किसे काम मिलेगा, जबकि पहले यह जमीनी स्तर पर तय होता था। जनगणना प्री टेस्ट: डीसीओ ट्रेनर्स ने क्षेत्र में कराया स्व-गणना, छ्ह जुलाई से प्रगणक व पर्यवेक्षक करेंगे पूर्व परिक्षण सोनिया ने कहा, “मोदी सरकार के इस हमले का मुकाबला करने के लिए हम सब तैयार हैं। बीस साल पहले अपने गरीब भाई-बहनों को रोजगार का अधिकार दिलवाने के लिए मैं भी लड़ी थी, आज भी इस काले कानून के खिलाफ लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हूं। मेरे जैसे कांग्रेस के सभी नेता और लाखों कार्यकर्ता आपके साथ खड़े हैं।” एनर्जी ड्रिंक’ के दावों पर एफएसएसएआई सख्त, कई बेवरेज ब्रांड्स को नोटिस उन्होंने कहा कि यह योजना डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में गरीबों के लिए एक सुरक्षा कवच के रूप में शुरू की गई थी। इससे ग्राम पंचायतों को मजबूत मिली। यह महात्मा गांधी के ‘ग्राम स्वराज’ के सपने को पूरा करने जैसा था। अब वर्तमान सरकार इस कानून को कमजोर कर रही है, जिससे ग्रामीण भारत के करोड़ों मजदूरों और किसानों के हितों को नुकसान पहुंच रहा है। अमरनाथ यात्रियों का पहला जत्था रवाना, स्टेशन पर लगा विशाल भंडारा
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नई दिल्ली, 20 दिसंबर (हि.स.)। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शनिवार को मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को कमजोर करके गरीब किसानों और मजदूरों के हितों पर हमला किया है।
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सोनिया गांधी ने एक्स पर लिखा कि कांग्रेस गरीबों के हक के लिए सड़क से संसद तक लड़ाई लड़ेगी। उन्होंने कहा कि पिछले 11 साल में मोदी सरकार ने मनरेगा को जानबूझकर कमजोर करने की कोशिश की है जबकि कोविड के समय इसी योजना ने गरीबों की जान बचाई थी। उन्होंने अफसोस जताया कि सरकार ने विपक्ष से पूछे बिना इसका नाम बदल दिया है। अब दिल्ली में बैठे लोग तय करेंगे कि किसे काम मिलेगा, जबकि पहले यह जमीनी स्तर पर तय होता था।
सोनिया ने कहा, “मोदी सरकार के इस हमले का मुकाबला करने के लिए हम सब तैयार हैं। बीस साल पहले अपने गरीब भाई-बहनों को रोजगार का अधिकार दिलवाने के लिए मैं भी लड़ी थी, आज भी इस काले कानून के खिलाफ लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हूं। मेरे जैसे कांग्रेस के सभी नेता और लाखों कार्यकर्ता आपके साथ खड़े हैं।”
उन्होंने कहा कि यह योजना डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में गरीबों के लिए एक सुरक्षा कवच के रूप में शुरू की गई थी। इससे ग्राम पंचायतों को मजबूत मिली। यह महात्मा गांधी के ‘ग्राम स्वराज’ के सपने को पूरा करने जैसा था। अब वर्तमान सरकार इस कानून को कमजोर कर रही है, जिससे ग्रामीण भारत के करोड़ों मजदूरों और किसानों के हितों को नुकसान पहुंच रहा है।
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