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बिहार की राजनीति में 20 साल से अधिक लंबे ‘नीतीश युग’ का अंत

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पटना, 14 अप्रैल (हि.स.)। बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही लगभग 20 वर्ष 5 माह लंबे ‘नीतीश युग’ का अंत हो गया है।

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‘सुशासन बाबू’ के नाम से पहचान बनाने वाले नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को पटना के बख्तियारपुर में हुआ था। नीतीश कुमार के पिता स्वर्गीय राम-लखन सिंह स्वतंत्रता सेनानी और प्रसिद्ध गांधीवादी नेता थे। उन्होंने बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (वर्तमान एनआईटी पटना) से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। उनकी राजनीतिक सोच पर समाजवादी विचारधारा का गहरा प्रभाव रहा, जो उन्हें महान नेताओं राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण और विश्वनाथ प्रताप सिंह के सान्निध्य से मिला।

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उन्होंने 1974 से 1977 तक चले जेपी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। इसी आंदोलन ने उनके भीतर समाजवाद की मजबूत नींव रखी और उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन के लिए इसी राह को चुना।

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नीतीश कुमार ने वर्ष 1985 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में बिहार विधानसभा में प्रवेश किया। उनकी राजनीतिक प्रतिभा के चलते 1987 में उन्हें युवा लोक दल का अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद 1989 में वे जनता दल के महासचिव और नौवीं लोकसभा के सदस्य बने। उन्होंने 1989 से 2004 तक लगातार बाढ़ लोकसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की।

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केंद्र सरकार में भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। अपने पहले कार्यकाल में वे केंद्रीय राज्य मंत्री बने और बाद में 2001 से 2004 के बीच रेल मंत्री के रूप में भी कार्य किया।

बिहार की जनता ने उन्हें अब तक सात बार मुख्यमंत्री बनाया। उन्होंने पहली बार मार्च 2000 में मुख्यमंत्री पद संभाला। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने प्रशासन, सड़क, शिक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे कई क्षेत्रों में सुधार किए, जिसके चलते उन्हें ‘सुशासन बाबू’ की उपाधि मिली।

देश के वरिष्ठ व कुशल नेताओं की सूची में नीतीश का नाम प्रमुखता से दर्ज है। नीतीश कुमार को राजनीतिक शुचिता, सार्वजनिक सक्रियता व कुशल प्रशासक के लिए कई पुरुस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। जिनमें फ़ोर्ब्स “इंडियन पर्सन ऑफ दि इयर” अवॉर्ड, जेपी स्मारक पुरस्कार, इकोनॉमिक टाइम्स “बिजनेस रिफार्मर ऑफ दि इयर, पोलियो उन्मूलन चैम्पियनशिप अवार्ड, सफल शराबबंदी के लिए अणुव्रत सम्मान, एनडीटीवी इंडियन ऑफ दि इयर अवॉर्ड आदि हैं।

बिहार की राजनीति में अपनी अलग पहचान स्थापित करने वाले नीतीश कुमार अब अपने राजनीतिक जीवन के अगले चरण में उच्च सदन राज्यसभा के माध्यम से नई भूमिका निभा सकते हैं। उनका इस्तीफा राज्य की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत माना जा रहा है।

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