सतुआ खाकर जीवन गुजारने को विवश हुए हड़ताली शिक्षक

सतुआ खाकर जीवन गुजारने को विवश हुए हड़ताली शिक्षक

नगरा: नियोजित शिक्षकों की हड़ताल 34वे दिन भी जारी है. शिक्षकों की जारी इस हड़ताल और सरकार की शिक्षकों के प्रति बेरूखी से दिन प्रतिदिन शिक्षकों की स्थिति दयनीय हो रही है. इसके बावजूद भी शिक्षक अपनी मांगों को लेकर कायम है. शिक्षक सरकार के साथ इस आपदा की घड़ी में कदम से कदम मिलाकर काम कर रहे है. कोरोना वायरस के प्रति लोगो को जागरूक कर रहे है. साथ ही साथ अपनी मांगों के खिलाफ आवाज को भी बुलंद कर शिक्षकों के प्रति सरकारी नीति का विरोध प्रदर्शन भी कर रहे है. हड़ताल के कारण शिक्षकों का वेतन स्थगित है जिसके कारण इनके समक्ष अब भुखमरी की स्थिति पैदा हो रही है.जिसके कारण शिक्षक अब सतुआ खाने को विवश है. हड़ताली शिक्षकों का कहना है कि बिहार सरकार नियोजित शिक्षकों को समान कार्य समान वेतन पे वार्ता नहीं कर रही है. वही नियोजित शिक्षकों को 3 माह से वेतन भी नसीब नहीं है. शिक्षकों ने भारत के प्रधानमंत्री की बातों का हवाला देते हुए कहा कि पीएम ने अपने संबोधन में किसी भी कर्मचारी का वेतन नहीं काटने की बात कही है, वही राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शिक्षकों को वेतन विहीन रख रहे है. वेतन नही मिलने से नगरा के शिक्षक भूखमरी के कागार पर पहुंच चुके है. शिक्षकों ने सतुआ खाकर अपना विरोध प्रदर्शन किया. साथ ही शिक्षकों ने कोरोना वायरस से बचने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया. इस मौके पर विजयेंद्र कुमार विजय, सुनील कुमार सिंह, अम्बिका राय, विनायक कुमार यादव, राजेश कुमार सिंह, सिराजुद्दीन अंसारी, सैयद अली, एकबालू रहमान, प्रमोद कुमार सिंह, विमलेश कुमार सिंह, मनोज कुमार, जयप्रकाश, ऋषिकेश के साथ सैकडों शिक्षक मौजूद थे.

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