इप्टा ने किया ‘बिदेसिया’ का मंचन

इप्टा ने किया ‘बिदेसिया’ का मंचन

छपरा: भिखारी ठाकुर की कालजयी नाट्यकृति बिदेसिया के विरह, करूण और हास्य रस में बीती पूरी रात डुमरी अड्डा के ग्रामीण डुबकियाँ लगाते रहे. मौका था आदर्श कला निकेतन द्वारा लक्ष्मी पूजा पर आयोजित तीन दिवसीय कला उत्सव की पहली रात का जहाँ इप्टा, छपरा के कलाकारों ने बिदेसिया और पागलखाना नाटकों की जीवंत प्रस्तुति की तो वहीं शास्त्रीय गायन, सुगम और लोकगीतों तथा शास्त्रीय ओर लोकनृत्य से दर्शकों को पूरी रात आँखों में काटने को बाध्य कर दिया.

आदर्श कला निकेतन डुमरी अड्डा की स्थापना के पचास साल पूरे होने पर संस्था द्वारा कुछ यादगार करने को इप्टा की छपरा शाखा को बुलाया गया था जिस पर इप्टा ने अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप चार चाँद ज़ड़ दिए. रात के दस बजे स्थानीय मुखिया रिंकु कुमारी द्वारा कला उत्सव का विधिवत् उद्घाटन किया गया जिसके बाद इप्टा के कलाकार भोर के धुंधलके तक राग रागिनियों, तल ताल और अभिनय से शमां बांधते रहे, कार्यक्रम का आगाज़ प्रख्यात् गाय़क जवाहर राय ने सधे सुरों में निराला की वरदे वीणा वादिनी गा कर किया.

फिर अमित रंजन द्वारा लिखित निर्देशिंत पागलखाना का सशक्त मंचन किया गया जिसमे पागलपन के कारणों पर शोध करने पागलखाना पहुँचे एक पत्रकार के कुछ पागलों की जिन्दगी के दर्द जानते खुद पागल होकर पागलखाना का हिस्सा बन जाने की कथा कही गई. अभिनेताओं कौस्तुभ निहाल ने पत्रकार को जीवंत किया तो नन्हें कुमार ने पागलखाने के अधपगले चौकीदार, संभव संदर्भ ने नेता, अजीत कुमार ने बेरोजगार युवक, अतुल कुमार सिंह ने इंस्पेक्टर, आरती सहनी ने दंगा में मारे गए पति और दुधमुंहे बच्चे के दर्द को जीया तो वहीं कलाकार के रूप में अभिजीत कुमार सिंह और बूढ़े बाप के रूप में राजेन्द्र राय ने कलात्मक उत्कर्ष प्रदान किया.

कला उत्सव के पहले दिन की अंतिम प्रस्तुति भिखारी ठाकुर की कालजयी नाट्य रचना बिदेसिया ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया. निर्देशक अमित रंजन की उपलब्धि रही महज नौंवी कक्षा की छात्रा अदिति द्वारा अभिनीत प्यारी सुंदरी की भूमिका जिसका मासूम अभिनय, गायन और हल्का नृत्य दर्शकों के झुमाता रहा. बिदेसी की भूमिका में रंजीत गिरि, सलोनी की भूमिका में शिवांगी, बटोही के रूप में अभिजीत कुमार सिंह और जोकर के रूप में नन्हे कुमार ने अभिनय के नए प्रतिमान गढ़े. संभव संदर्भ, अर्चिता माधव, रोहित कुमार, आमीर, मनोरंजन कुमार, अमन कुमार, अलीना, अक्षरा, आतरी सहनी, शुभांगी ने प्रमुख पात्रों का भरपूर साथ निभाया. समाजी के रूप में जवाहर राय, कंचन बाला, जितेन्द्र कुमार, राजेन्द्र राय, श्याम सानू ने अपनी सधी गायिकी से तो विनय कुमार वीनू और सानू ने अपने वादन से नाटकीय कथ्य और उत्कर्ष को पूरी तरह पकड़े रखा. अर्चिता माधव का कत्थक और भावनृत्य, अदिति का ग़ज़ल और छठ गीत, जवाहर राय, रंजीत गिरि, जितेन्द्र कुमार, अतुल कुमार सिंह की गायिकी भी काफी सराही गई.

इस मौके पर इप्टा अध्यक्ष वीरेन्द्र नारायण यादव ने ग्रामीण रंगकर्म की अनिवार्यता पर बल दिया तो सचिव अमित रंजन ने डुमरी में ग्रामीण कलाकारों के साथ दस दिवसीय नाट्य कार्यशाला लगाने की घोषणा की ताकि इस सालाना उत्सव में आर्केष्ट्रा संस्कृति से आजाद हो कर युवा क्लब के पुराने दिनों को वापस ला सकें. जब इसके संस्थापक राधाकृष्ण तिवारी के निर्देशन में लगातार नाटकों के मंचन हुआ करते थे. कार्यक्रम में पैक्स अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह, पत्रकार श्रीराम तिवारी की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही तो संचालन सचिव अमित रंजन ने किया.

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