राष्ट्रीय भोजपुरी सम्मेलन का हुआ आयोजन

राष्ट्रीय भोजपुरी सम्मेलन का हुआ आयोजन

नई दिल्ली: दिल्ली से प्रकाशित होने वाली भोजपुरी की राष्ट्रीय मासिक पत्रिका ‘हेलो भोजपुरी’ द्वारा मैथिलि-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली सरकार के सहयोग से गत 28 अगस्त को ‘राष्ट्रीय भोजपुरी सम्मेलन’ का सफल आयोजन किया गया.

भोजपुरी भाषा को अष्टम सूचि में शामिल करवाने के लिए संस्था इससे पहले भी बिहार के सारण जिले में कार्यक्रम करवा चुकी है. इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाचार चैनल ‘इंडिया न्यूज़’ के मैनेजिंग एडिटर राणा यशवंत थे.

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कार्यक्रम की शुरुआत भोजपुरी के प्रसिद्ध साहित्यकार बाबु रघुवीर नारायण जी द्वारा लिखे भोजपुरी के राष्ट्रीय गीत ‘बटोहिया’ से हुई. उसके बाद भोजपुरी के शेक्सपियर माने जाने वाले ‘भिखारी ठाकुर’ द्वारा लिखित परिचय गीत गाया गया, जिसको महुआ चैनल फेम गायिका रितुराज ने अपने मखमली आवाज़ में गाकर समां बांध दिया.

परिचर्चा सत्र में भोजपुरी समाज के अध्यक्ष अजित दुबे, भारत सरकार में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डॉ. रश्मि सिंह, भोजपुरी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. जौहर शफियाबादी ने अपने-अपने विचार रखे. इस सत्र की अध्यक्षता भोजपुरी के सुप्रसिद्ध नाटककार महेन्द्र प्रसाद सिंह ने किया. कार्यक्रम में सांस्कृतिक सत्र के दौरान लोकप्रिय गायक अजित आनंद, मोहन मितवा, राजकुमार रोमियो व रितुराज के गानों पर दर्शक झूम उठे.

कार्यक्रम में भोजपुरी कवि सम्मलेन का भी आयोजन किया गया जिसमे देश भर से आये कवियों ने अपनी-अपनी रचनाएं सुनाई. जिसमे डॉ. जौहर शफियाबदी, डॉ. सविता सौरव, लाल बिहारी लाल, डॉ. मंजरी पाण्डेय, राधा रानी, प्रो. रविकांत, सुजीत सौरभ, जलज मिश्र, सुजीत सिंह, जनकदेव जनक व अन्य कवियों ने भाग लिया. कवि सम्मेलन की अध्यक्षता देवरिया से आये वरिष्ठ कवि डॉ. जनार्दन सिंह ने किया. कार्यक्रम में भोजपुरी भाषा-साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में काम कर रहे लोगों को उनके योगदान हेतु विभिन्न लेखकों, कवियों, कलाकारों एवं समाजसेवियों को बाबू रघुवीर नरायण सम्मान, भिखारी ठाकुर सम्मान, राहुल सांकृत्यायन सम्मान एवं भोजपुरी गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया.

मंच संचालन पत्रिका के उपसंपादक लव कान्त सिंह, स्वागत भाषण संपादक राजकुमार अनुरागी व धन्यवाद भाषण प्रबंध संपादक रामबंधु तिवारी ने दिया. बताते चलें की भारत की दूसरी सबसे बड़ी भाषा ‘भोजपुरी’ को संविधान के अष्टम सूचि में शामिल करवाने के लिए पिछले कई दशकों से अलग-अलग संस्थओं द्वारा अभियान चलाया जा रहा है. जिसमे अनेक साहित्यकार, नेता और समाजसेवी भाग लेते रहे हैं. हेलो भोजपुरी द्वारा भी पिछले कई सालों से इसके पक्ष में अभियान चलाया जा रहा है. पत्रिका कई बार मुखर होकर सरकार से भोजपुरी के उचित सम्मान के लिए लेखों, व्यंगों और कवितों के माध्यम से आवाज उठाती रही है.

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