शिमला, 30 जून (हि.स.)। राजधानी शिमला के बहुचर्चित मनीषा मित्तल हत्याकांड में पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए मृतका के भाई हिमांक मित्तल को ही हत्या का मास्टरमाइंड बताया है। पुलिस के अनुसार हिमांक मित्तल ने अपने कारोबारी साझेदार गोविंद के साथ मिलकर दो शूटरों को सुपारी देकर स्कूल संचालिका मनीषा मित्तल की हत्या करवाई। जांच में सामने आया है कि मनीषा मित्तल का अपने भाई हिमांक और उसके पार्टनर गोविंद के साथ संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। इसी विवाद को हत्या की मुख्य वजह माना जा रहा है। पुलिस ने अब तक इस मामले में चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। चिकित्सक के घर चोरी, विरोध करने पर पुत्र को जख्मी कर हथियार छोड़ हुआ फरार स्कूल का सीसीटीवी ही बन गया मनीषा के लिए जानलेवा जांच में सामने आए तथ्यों ने इस मामले को और भी चौंकाने वाला बना दिया है। पुलिस के अनुसार हिमांक मित्तल के पास सरस्वती पैराडाइज स्कूल के सीसीटीवी कैमरों का पूरा एक्सेस था। वह कैमरों के जरिए अपनी बहन मनीषा मित्तल की गतिविधियों और उनके आने-जाने के समय पर लगातार नजर रख रहा था। पुलिस का कहना है कि इसी निगरानी के आधार पर हत्या की पूरी योजना बनाई गई। जिस सुरक्षा व्यवस्था के लिए स्कूल में कैमरे लगाए गए थे, वही कैमरे मनीषा मित्तल की गतिविधियों की जानकारी जुटाने का माध्यम बन गए। पुलिस जांच में यह पहलू हत्या की साजिश का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। पैसों का लेन-देन और किराये की कार से जुड़ी कड़ियां एएसपी शिमला मेहर पंवार ने मंगलवार को बताया कि तकनीकी जांच और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल में कई अहम तथ्य सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार घटना से कुछ दिन पहले हिमांक मित्तल ने गोविंद के खाते में 8 लाख 30 हजार रुपये ट्रांसफर किए थे। जांच में यह भी सामने आया कि गोविंद ने वारदात में इस्तेमाल की गई स्विफ्ट कार किराये पर ली और उसे शूटरों को उपलब्ध करवाया। पुलिस के मुताबिक गोविंद ने ही आरोपी शूटर दीपक को पैसे भी ट्रांसफर किए थे। इन साक्ष्यों ने हत्या की साजिश और आरोपियों के बीच संबंधों को मजबूत आधार प्रदान किया। बिहार एसटीएफ की टीम ने कुख्यात पांडव गिरोह के सरगना संजय सिंह को किया गिरफ्तार विदेश भागा आरोपी, फिर रोहतक से हुई गिरफ्तारी पुलिस के अनुसार वारदात के बाद गोविंद गिरफ्तारी से बचने के लिए विदेश चला गया था। विदेश से लौटने के बाद भी उसने अपना मोबाइल फोन बंद रखा और लगातार छिपने की कोशिश करता रहा। पुलिस की तकनीकी निगरानी और लगातार दबिश के बाद 28 जून को उसे हरियाणा के रोहतक से गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ के दौरान मिले सुरागों के आधार पर पुलिस ने 29 जून को मुख्य आरोपी हिमांक मित्तल को भी रोहतक से गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड हासिल किया गया है और उनसे आगे की पूछताछ जारी है। पुलिस बोली- सभी आरोपी गिरफ्तार, जांच अभी जारी मंगलवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में एएसपी शिमला मेहर पंवार ने कहा कि तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी विश्लेषण, मोबाइल डेटा, वित्तीय लेन-देन और अन्य जांच के आधार पर मामले का सफल खुलासा किया गया है। उन्होंने बताया कि इस हत्याकांड में शामिल सभी चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि साजिश की तैयारी कब से चल रही थी और इसमें अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका तो नहीं रही। पुलिस का कहना है कि मामले के हर पहलू की गहनता से जांच की जा रही है। चिरांद चेतना महोत्सव में गूंजा संस्कृति और गंगा संरक्षण का संदेश 13 जून से 30 जून तक ऐसे खुली पूरे हत्याकांड की परत-दर-परत कहानी 13 जून की शाम भट्टाकुफर स्थित सरस्वती पैराडाइज स्कूल के बाहर दो नकाबपोश हमलावरों ने स्कूल संचालिका मनीषा मित्तल पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। इससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद शिमला पुलिस ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई। 15 जून को यानी करीब 40 घंटे के भीतर पुलिस ने हरियाणा के रोहतक से दोनों शूटरों आशीष और दीपक को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से दो पिस्टल भी बरामद की गईं। इसके बाद दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया और पहले सात दिन का पुलिस रिमांड मिला। आगे की पूछताछ के लिए उन्हें चार दिन का अतिरिक्त रिमांड भी दिया गया। पूछताछ, बैंक खातों की जांच और तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण के दौरान पुलिस को हिमांक मित्तल और गोविंद की भूमिका के संकेत मिले। 28 जून को गोविंद को रोहतक से गिरफ्तार किया गया, जबकि 29 जून को हिमांक मित्तल भी पुलिस के हत्थे चढ़ गया। 30 जून को शिमला पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि मनीषा मित्तल की हत्या एक सुनियोजित सुपारी किलिंग थी, जिसके पीछे उनका अपना भाई और उसका कारोबारी साझेदार थे।
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शिमला, 30 जून (हि.स.)। राजधानी शिमला के बहुचर्चित मनीषा मित्तल हत्याकांड में पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए मृतका के भाई हिमांक मित्तल को ही हत्या का मास्टरमाइंड बताया है। पुलिस के अनुसार हिमांक मित्तल ने अपने कारोबारी साझेदार गोविंद के साथ मिलकर दो शूटरों को सुपारी देकर स्कूल संचालिका मनीषा मित्तल की हत्या करवाई। जांच में सामने आया है कि मनीषा मित्तल का अपने भाई हिमांक और उसके पार्टनर गोविंद के साथ संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। इसी विवाद को हत्या की मुख्य वजह माना जा रहा है। पुलिस ने अब तक इस मामले में चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
जांच में सामने आए तथ्यों ने इस मामले को और भी चौंकाने वाला बना दिया है। पुलिस के अनुसार हिमांक मित्तल के पास सरस्वती पैराडाइज स्कूल के सीसीटीवी कैमरों का पूरा एक्सेस था। वह कैमरों के जरिए अपनी बहन मनीषा मित्तल की गतिविधियों और उनके आने-जाने के समय पर लगातार नजर रख रहा था। पुलिस का कहना है कि इसी निगरानी के आधार पर हत्या की पूरी योजना बनाई गई। जिस सुरक्षा व्यवस्था के लिए स्कूल में कैमरे लगाए गए थे, वही कैमरे मनीषा मित्तल की गतिविधियों की जानकारी जुटाने का माध्यम बन गए। पुलिस जांच में यह पहलू हत्या की साजिश का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
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पैसों का लेन-देन और किराये की कार से जुड़ी कड़ियां
एएसपी शिमला मेहर पंवार ने मंगलवार को बताया कि तकनीकी जांच और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल में कई अहम तथ्य सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार घटना से कुछ दिन पहले हिमांक मित्तल ने गोविंद के खाते में 8 लाख 30 हजार रुपये ट्रांसफर किए थे। जांच में यह भी सामने आया कि गोविंद ने वारदात में इस्तेमाल की गई स्विफ्ट कार किराये पर ली और उसे शूटरों को उपलब्ध करवाया। पुलिस के मुताबिक गोविंद ने ही आरोपी शूटर दीपक को पैसे भी ट्रांसफर किए थे। इन साक्ष्यों ने हत्या की साजिश और आरोपियों के बीच संबंधों को मजबूत आधार प्रदान किया।
पुलिस के अनुसार वारदात के बाद गोविंद गिरफ्तारी से बचने के लिए विदेश चला गया था। विदेश से लौटने के बाद भी उसने अपना मोबाइल फोन बंद रखा और लगातार छिपने की कोशिश करता रहा। पुलिस की तकनीकी निगरानी और लगातार दबिश के बाद 28 जून को उसे हरियाणा के रोहतक से गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ के दौरान मिले सुरागों के आधार पर पुलिस ने 29 जून को मुख्य आरोपी हिमांक मित्तल को भी रोहतक से गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड हासिल किया गया है और उनसे आगे की पूछताछ जारी है।
पुलिस बोली- सभी आरोपी गिरफ्तार, जांच अभी जारी
मंगलवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में एएसपी शिमला मेहर पंवार ने कहा कि तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी विश्लेषण, मोबाइल डेटा, वित्तीय लेन-देन और अन्य जांच के आधार पर मामले का सफल खुलासा किया गया है। उन्होंने बताया कि इस हत्याकांड में शामिल सभी चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि साजिश की तैयारी कब से चल रही थी और इसमें अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका तो नहीं रही। पुलिस का कहना है कि मामले के हर पहलू की गहनता से जांच की जा रही है।
13 जून से 30 जून तक ऐसे खुली पूरे हत्याकांड की परत-दर-परत कहानी
13 जून की शाम भट्टाकुफर स्थित सरस्वती पैराडाइज स्कूल के बाहर दो नकाबपोश हमलावरों ने स्कूल संचालिका मनीषा मित्तल पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। इससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद शिमला पुलिस ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई। 15 जून को यानी करीब 40 घंटे के भीतर पुलिस ने हरियाणा के रोहतक से दोनों शूटरों आशीष और दीपक को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से दो पिस्टल भी बरामद की गईं। इसके बाद दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया और पहले सात दिन का पुलिस रिमांड मिला। आगे की पूछताछ के लिए उन्हें चार दिन का अतिरिक्त रिमांड भी दिया गया। पूछताछ, बैंक खातों की जांच और तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण के दौरान पुलिस को हिमांक मित्तल और गोविंद की भूमिका के संकेत मिले। 28 जून को गोविंद को रोहतक से गिरफ्तार किया गया, जबकि 29 जून को हिमांक मित्तल भी पुलिस के हत्थे चढ़ गया। 30 जून को शिमला पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि मनीषा मित्तल की हत्या एक सुनियोजित सुपारी किलिंग थी, जिसके पीछे उनका अपना भाई और उसका कारोबारी साझेदार थे।
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