Chhapra: जिले में आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत नगरा प्रखंड में एक बड़ी कार्रवाई की गई है। नगरा थाना क्षेत्र स्थित महावीर इण्डेन ग्रामीण वितरक के प्रोपराइटर के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी, नगरा द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, कई उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि उनके नाम और पहचान पत्र का दुरुपयोग कर बिना जानकारी के ही गैस सिलेंडर बुक किए जा रहे थे। इतना ही नहीं, सिस्टम में इन सिलेंडरों की डिलीवरी भी दिखा दी जाती थी, जबकि उपभोक्ताओं को वास्तव में गैस प्राप्त नहीं हो रही थी। विभागीय जांच में इन आरोपों की पुष्टि हुई है। जांच में सामने आया कि एजेंसी द्वारा फर्जी बुकिंग कर अनुदानित घरेलू रसोई गैस की कालाबाजारी की जा रही थी। यह कार्यवाही एलपीजी आपूर्ति एवं वितरण नियंत्रण आदेश, 2000 के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। आज का पंचांग | अधिक ज्येष्ठ कृष्णपक्ष त्रयोदशी इस मामले में आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 7 के तहत केस दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने इस कार्रवाई को लेकर कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि जिले में किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या जमाखोरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के खिलाफ न केवल प्राथमिकी दर्ज होगी, बल्कि लाइसेंस रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई भी की जाएगी। ‘धमाल 4’ का ट्रेलर रिलीज, फिर कॉमेडी का धमाल मचाएगी अजय देवगन की पलटन प्रशासन ने आम उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपनी गैस बुकिंग और डिलीवरी की जानकारी पर नजर रखें और किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। Facebook और Instagram हुआ डाउन, परेशान रहे यूजर्स
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Chhapra: जिले में आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत नगरा प्रखंड में एक बड़ी कार्रवाई की गई है। नगरा थाना क्षेत्र स्थित महावीर इण्डेन ग्रामीण वितरक के प्रोपराइटर के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
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प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी, नगरा द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, कई उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि उनके नाम और पहचान पत्र का दुरुपयोग कर बिना जानकारी के ही गैस सिलेंडर बुक किए जा रहे थे। इतना ही नहीं, सिस्टम में इन सिलेंडरों की डिलीवरी भी दिखा दी जाती थी, जबकि उपभोक्ताओं को वास्तव में गैस प्राप्त नहीं हो रही थी।
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विभागीय जांच में इन आरोपों की पुष्टि हुई है। जांच में सामने आया कि एजेंसी द्वारा फर्जी बुकिंग कर अनुदानित घरेलू रसोई गैस की कालाबाजारी की जा रही थी। यह कार्यवाही एलपीजी आपूर्ति एवं वितरण नियंत्रण आदेश, 2000 के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
इस मामले में आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 7 के तहत केस दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने इस कार्रवाई को लेकर कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि जिले में किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या जमाखोरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के खिलाफ न केवल प्राथमिकी दर्ज होगी, बल्कि लाइसेंस रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।
प्रशासन ने आम उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपनी गैस बुकिंग और डिलीवरी की जानकारी पर नजर रखें और किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।
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