जरूरत एक ‘संकल्प’ की ताकि फिर न हो गंडामन हादसा

जरूरत एक ‘संकल्प’ की ताकि फिर न हो गंडामन हादसा

छपरा: किसी भी जिले के नाम राष्ट्रीय पटल पर सुर्ख़ियों में आना बड़ी बात होती है पर उसके कारण में दर्द और वेदना का मंजर छुपा हो तो वही सुर्खियां आंसुओं का सैलाब बन कर धरातल पर दिखने लगती हैं. चीख-चित्कार, करुणा, वेदना,कष्ट और पीड़ा जैसे शब्द उस दिन मामूली से दिखने लगे थे, जिस दिन सारण के इतिहास में ‘गंडामन’ हादसा हुआ था. 16 जुलाई 2013 का वो काला दिन कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है.

जहरीला मिड-डे-मिल खाने से प्राथमिक विद्यालय धर्मासती गंडामन, सारण के 23 बच्चे मौत के मुँह में समा गए थे. उस दिन धर्मासती गाँव के साथ-साथ सारण के हजारों घरों में चूल्हा नहीं जला था. कई दिनों तक सरकारी स्कूल के बच्चों ने स्कूल जाना ही छोड़ दिया. इस घटना ने देश की सबसे बड़ी योजना पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया था.fb

सरकारी तंत्र से लेकर सामजिक संस्थाओं ने मिलकर इस हृदयविदारक घटना से उबरने के लिए पीड़ित परिवार वालों को हर संभव मदद देने का प्रयास किया. हादसे से से सबक लेकर सरकार ने सरकारी विद्यालयों में चल रही मिड-डे-मिल योजना के साथ-साथ तमाम योजनाओं को सफलतपूर्वक संचालित करने के लिए कमर कस ली. समय के साथ-साथ गंडामन की भी की सूरत भी बदली. हादसे के शिकार बच्चों के स्मृति में समाधी स्थल बनाया गया. तमाम योजनाओं को अमली जामा पहनाने का काम शुरू हुआ. कुछ स्थिति जरूर सुधरी पर आज भी सरकारी स्कूल की स्थिति शिक्षा और एमडीएम के बीच में ही उलझ कर रह गई है.

आज हादसे के 3 साल पूरे होने पर उन बच्चों को हम अपनी श्रद्धांजलि तो जरूर देंगे पर उनके माँ-बाप के आँखों में सुख चुके आंसू आज भी हमें सोंचने पर मजबूर करते हैं. सबक के साथ आगे बढ़ रहे बिहार में क्या सरकारी योजनाएं सफलता पूर्वक संचालित हो रही है, क्या उन मासूमों के साथ अब तक न्याय हो पाया है, क्या चीख और चित्कार की आवाज और उसकी गूँज आज गंडामन से दूर जा चुकी है. इन सवालों का जवाब हमें ही ढूंढना होगा. व्यवस्थाओं को बदलने के लिए आज एक प्रयास की जरूरत है. अगर हम सब मिलकर संकल्प लें तो ‘गंडामन हादसा’ फिर नहीं दोहराया जा सकेगा.fb

‘सरकार और समाज दोनों के सार्थक प्रयास से ही व्यवस्था में परिवर्तन लाना संभव है’.हम संकल्प लें कि फिर कोई मासूम ऐसे हादसों का शिकार न हो. सारण जिला राष्ट्रीय पटल पर छा जाए पर उसके कारण में गंडामन जैसा हादसा न हो. छपरा टुडे गंडामन हादसे का शिकार हुए सभी बच्चों के प्रति अपनी सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करता है.

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