नई दिल्ली, 10 मार्च (हि.स.)। लोकसभा में मंगलवार को अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने को लेकर प्रस्ताव पर चर्चा शुरु हुई। प्रस्ताव कांग्रेस नेता मोहम्मद जावेद ने प्रस्तुत किया। इस दौरान अध्यक्षीय आसन पर पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल मौजूद थे। प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। आज का पंचांग | अधिक ज्येष्ठ कृष्णपक्ष त्रयोदशी चर्चा की शुरुआत में ही कुछ सदस्यों ने अध्यक्षीय आसन पर पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल के होने पर आपत्ती जताई। नियमों का हवाला देते हुए इन विपक्षी सदस्यों ने मांग की कि प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कौन अध्यक्षीय आसन पर होगा यह सदन निर्धारित करेगा। ‘धमाल 4’ का ट्रेलर रिलीज, फिर कॉमेडी का धमाल मचाएगी अजय देवगन की पलटन एआईएमआईएम सदस्य असद्दुदीन औवेसी ने कहा कि सदन की नियमों के अनुसार अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की अनुपस्थिति में सदन की अनुमति के बिना अध्यक्षीय आसन पर पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति गलत है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल और तृणमूल नेता सौगत राय ने इसी को दोहराया। Facebook और Instagram हुआ डाउन, परेशान रहे यूजर्स दूसरी ओर सत्ता पक्ष से निशिकांत दुबे और रविशंकर प्रसाद ने इसका विरोध किया। दोनों ने कहा कि संविधान कहता है कि अध्यक्ष को हटाने के लिए अध्यक्षीय आसन पर कौन होगा यह सदन की नियमावली तय करेगी। नियमावली कहती है कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के न होने पर पीठासीन अधिकारी सदन संचालित करेंगे। इसके बाद चर्चा प्रारंभ हुई और इसकी अनुमति प्रदान करने के लिए 50 से अधिक विपक्षी सदस्य अपने स्थान पर खड़े हो गए।
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नई दिल्ली, 10 मार्च (हि.स.)। लोकसभा में मंगलवार को अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने को लेकर प्रस्ताव पर चर्चा शुरु हुई। प्रस्ताव कांग्रेस नेता मोहम्मद जावेद ने प्रस्तुत किया। इस दौरान अध्यक्षीय आसन पर पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल मौजूद थे। प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है।
चर्चा की शुरुआत में ही कुछ सदस्यों ने अध्यक्षीय आसन पर पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल के होने पर आपत्ती जताई। नियमों का हवाला देते हुए इन विपक्षी सदस्यों ने मांग की कि प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कौन अध्यक्षीय आसन पर होगा यह सदन निर्धारित करेगा।
एआईएमआईएम सदस्य असद्दुदीन औवेसी ने कहा कि सदन की नियमों के अनुसार अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की अनुपस्थिति में सदन की अनुमति के बिना अध्यक्षीय आसन पर पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति गलत है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल और तृणमूल नेता सौगत राय ने इसी को दोहराया।
दूसरी ओर सत्ता पक्ष से निशिकांत दुबे और रविशंकर प्रसाद ने इसका विरोध किया। दोनों ने कहा कि संविधान कहता है कि अध्यक्ष को हटाने के लिए अध्यक्षीय आसन पर कौन होगा यह सदन की नियमावली तय करेगी। नियमावली कहती है कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के न होने पर पीठासीन अधिकारी सदन संचालित करेंगे।
इसके बाद चर्चा प्रारंभ हुई और इसकी अनुमति प्रदान करने के लिए 50 से अधिक विपक्षी सदस्य अपने स्थान पर खड़े हो गए।
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