सावन महीने में भगवान महादेव को प्रसन्न करने के लिए शिव भक्त अपनी श्रद्धा और आस्था के अनुसार अलग-अलग विधियों से पूजा-अर्चना करते हैं। सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। पंचांग के अनुसार सावन वर्ष का पांचवां महीना होता है। इस महीने में भगवान शिव की आराधना, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व माना गया है।
सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त 2026 को पड़ रहा है। इस दिन पंचांग के अनुसार ग्रहों की स्थिति भी विशेष रहेगी। द्वादशी तिथि सुबह 5:55 बजे तक रहेगी, इसके बाद त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होगी। वहीं, आद्रा नक्षत्र सुबह 11:40 बजे तक रहेगा, इसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र का आरंभ होगा।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन सिद्धि योग भी रहेगा। सिद्धि योग में किए गए कार्यों में सफलता मिलने की मान्यता है। यह योग आध्यात्मिक साधना और धार्मिक कार्यों के लिए भी शुभ माना जाता है। इसके साथ ही आंतरिक ऊर्जा के संचार तथा मांगलिक कार्यों के निर्विघ्न संपन्न होने की मान्यता है।
हालांकि, जो श्रद्धालु सावन के दूसरे सोमवार को रुद्राभिषेक कराने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए शिववास का विचार भी महत्वपूर्ण माना गया है। पंचांग के अनुसार इस दिन शिववास भोजन में रहेगा, जिसे रुद्राभिषेक के लिए शुभ नहीं माना जाता। ऐसे में धार्मिक अनुष्ठान करने से पहले पंचांग और विद्वान आचार्य की सलाह लेना उचित माना जाता है।
सोमवार को ग्रहों की स्थिति
इस दिन सूर्य, बुध और गुरु कर्क राशि में स्थित रहेंगे। चंद्रमा भी कर्क राशि में रहेगा, जबकि मंगल मिथुन राशि में संचरण करेगा। शुक्र कन्या राशि, शनि कुंभ राशि में रहेगा। वहीं राहु कुंभ राशि और केतु सिंह राशि में स्थित रहेंगे।
सावन के दूसरे सोमवार पर भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र सहित शिव मंत्रों के जाप का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार भगवान भोलेनाथ का पूजन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करेंगे।
ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा
ज्योतिष वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ
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