छपरा की सड़कों पर चले तो पास में पानी का बोतल जरूर रखें, क्योकि यहाँ पानी के लिए नही है चापाकल

छपरा की सड़कों पर चले तो पास में पानी का बोतल जरूर रखें, क्योकि यहाँ पानी के लिए नही है चापाकल

Chhapra: अगर आप छपरा शहर की सड़कों पर चल रहे हैं तो आप अपने साथ पानी का बोतल जरूर रखें, जिससे कि प्यास लगने के दौरान आपकी प्यास बुझ सकें. खासकर यह जिम्मेवारी तब और बढ़ जाती है जब आपके साथ कोई छोटा बच्चा या फिर बुजुर्ग साथ मे हो. क्योकि छपरा शहर के किसी भी सड़क और आपको पानी के लिए चापाकल नही मिलेगा. अगर आपको कही चापाकल दिख भी गया तो उसमें से पानी नही निकलता है. हालांकि यह बात सिर्फ गर्मी के दिनों की नही है जाड़े और बरसात के दिनों में भी यह समस्या बनी होती है. लेकिन इस गंभीर समस्या पर ना तो नगर निगम और ना ही जिला प्रशासन कुछ कर रहा है. बीते दिनों नगर निगम द्वारा गर्मी के कारण पेयजल की आवश्यकता को देखते हुए शहर के चिन्हित 2 से 4 स्थानों पर मटका रखकर लोगो को पानी पिलाया जा रहा था, लेकिन यह हिंदी के उस कहावत के अनुसार थी कि ‘ऊँट के मुँह में जीरा के फोरन’ अब यह मटका पेयजल स्टॉल भी दिखाई नही दे रहा है. जनता प्यास और गर्मी से त्रस्त है और पदाधिकारी तथा नेता एसी और आरओ का पानी पीने में मस्त है.

भिखारी चौक…

छपरा शहर के मुख्य मार्ग के किनारों और चौक चौराहों पर पेयजल की समस्या आम बात है. शहर के पूर्वी छोड़ भिखारी ठाकुर चौक से शहर की शुरुआत होती है. शहर और ग्रामीण क्षेत्र का मिलाजुला परिवेश होने के कारण सड़क के किनारे और घर तथा दुकानों के सामने चापाकल मिल जाएगा जहाँ से आपकी प्यास बुझ जाएगी. लेकिन यह समस्या गांधी चौक से शुरू होती है.

गांधी चौक…एक

गांधी चौक पर सरकारी चापाकल देखने को तो मिलेगा लेकिन पानी शायद ही मिल जाये. इस चौराहें पर दिघवारा, डोरीगंज, भेल्दी, मकेर और गरखा जाने के लिए वाहन स्टैंड है जो अवैध है. लोगों की भीड़ और स्टैंड होने के कारण खाने पीने की दुकानों की संख्या ज्यादा है और सभी जगह दुकानों में चापाकल है जो आनेजाने वाले लोगो की प्यास बुझाते है. शाम होते ही दुकाने बंद और साथ साथ मिलने वाले पानी की व्यवस्था भी बंद. लेकिन सरकारी स्तर पर यहाँ ऐसा कुछ नही है जिससे कि इस रास्ते से होकर गुजरने वाले को चापाकल दिखे और वह अपनी प्यास बुझा ले.

मेवा लाल चौक…शून्य

यहाँ से यातायात व्यस्था के लिए एकल मार्ग शुरू होता है. मुमकिन है कि लोग भी अपनी सुविधा के लिए गाड़ी छोड़ पैदल यात्रा शुरू करते है. चौक संकीर्ण है बावजूद इसके यहाँ तीनों दिशाओं में कही भी एक चापाकल नही है. जिससे कोई पानी की जरूरत की पूरा करे. यहाँ तक कि इस चौक पर ड्यूटी करने वाले पुलिस कर्मियों को भी इस गर्मी में किसी दुकान से ही पानी मिलने की उम्मीद बनी रहती है. अगर दुकाने बंद रही तो किसी ना किसी घर से ही पानी को मांगकर अपनी प्यास बुझानी पड़ेगी.

मौना चौक…एक

मौना चौक शहर का व्यवसायिक केंद्र जहाँ पूरे दिन करोड़ो का कारोबार होता है. फल, सब्जी, मसाला और न जाने कितनी ऐसी चीजें जो यहाँ खरीदी और बेची जाती है. पूरे जिले से लोग खुदरा और थोक खरीददारी के लिये यहाँ पहुंचते है. लेकिन पानी का जरूरत सिर्फ एक चापाकल से पूरी होती है. चापाकल सरकारी जरूर है लेकिन इसकी देखभाल स्थानीय लोग अपने पैसे के सहयोग से करते है. यही कारण है कि इस पूरे बाजार में जहाँ सुबह 5 बजे से लेकर रात के बारह बजे तक लोग आते जाते है यह एक अकेला चापाकल लोगो की प्यास बुझाता है.

सलेमपुर चौक…एक

सलेमपुर चौक को मुख्य रूप से लोग कोर्ट कचहरी जाने के लिए प्रयोग करते है. भीड़ भी ज्यादा है. एक सरकारी चापाकल है जिससे कभी पानी निकलता है तो कभी नही.

नगरपालिका चौक…एक चापाकल

नगरपालिका चौक शासन प्रशासन का केंद्र स्थल यानी कि पूरा प्रशासनिक महकमा ही इस चौक के इर्द गिर्द दिखता है. नगर निगम कार्यालय भी इसी चौक पर है. प्रतिदिन इस चौक से होकर हजारों लोग आनाजाना करते है.धरना प्रदर्शन और राजनीतिक चर्चा भी इसी चौराहे पर होती है लेकिन सबो के बीच एक चापाकल ही लोगों की प्यास बुझाता है.

थाना चौक…शून्य

शहर का केंद्र बिंदु, नगर थाना, महिला थाना, कंट्रोल रूम, आयुक्त कार्यालय, पुलिस उपमहानिरीक्षक कार्यालय सब इसी चौक पर है. शहर का मुख्य मार्केट हथुआ मार्केट भी यही है लेकिन चापाकल की संख्या यहाँ एक भी नही है. चारों दिशाओं में किसी भी सड़क पर कई मीटर दूर तक यहाँ एक चापाकल नही है जिससे लोग अपनी प्यास बुझा सकें.

साहेबगंज चौक…शून्य

शहर का व्यवसायिक हब साहेबगंज चौक जो कपड़ो के मार्केट के रूप में जाना जाता है.थोड़ी दूर पर सोनारपट्टी भी है जिसके कारण यह खास केंद्र है.सरकारी स्तर पर यहाँ एक भी चापाकल नही है. यहाँ के मंदिर के बगल में एक चापाकल सरकारी है भी तो वह खराब अवस्था मे होने के कारण लोगो ने वहाँ अपनी दुकानें लगा दी.

साढा ढाला चौक… शून्य

ग्रामीण क्षेत्रों से आनेजाने की लिए एक मात्र चौक लेकिन सरकारी चापाकल की संख्या शून्य. यहाँ आने वाले लोगों की प्यास मिठाई दुकान के आगे लगे चापाकल से बुझती है.

योगिनियां कोठी चौक… शून्य

रेल ओवर ब्रिज बनने के बाद यह चौक शहर के लिए एक लाइफ लाइन की तरह काम करता है. ग्रामीण क्षेत्रों और बायपास सड़क से शहर में आने के लिए इसी चौक से गुजरना होता है. चौक पर मंदिर और मंदिर के बगल में एक चापाकल यही एक चापाकल लोगो की उम्मीद है जिससे उनकी प्यास बुझती है.

अस्पताल चौक और दारोगा राय चौक… शून्य

अस्पताल चौक पर भी सरकारी चापाकल की संख्या शून्य है. यहाँ से गुजरने वाले लोग या तो अस्पताल में लगे एक चापाकल या फिर पीर बाबा के मजार से ही पीने का पानी ले सकते है. दरोगा राय चौक की भी स्थिति यही है यहाँ भी सरकारी चापाकल नही है. इस चौक से पुराने पोस्टमार्टम घर जाने वाली सड़क में एक चापाकल है जो इस चौक पर बने नर्सिंग होम में ईलाज कराने आने वाले लोगो की प्यास बुझाता है.

प्रतिवर्ष लाखों खर्च के बाद भी नही हुई मुक्कमल व्यवस्था

शहर में पेयजल आपूर्ति के नाम पर प्रतिवर्ष नगर निगम द्वारा लाखों रुपये का खर्च किया जाता है. भीषण गर्मी को देखते हुए हाल ही में जिलाधिकारी ने सभी सरकारी चापाकल की मरम्मती और प्रत्येक वार्ड में चापाकल लगाने का निर्देश दिया था लेकिन यह निर्देश शायद फ़ाइल तक ही सीमित रह गया. शहर के मुख्य सड़क से गुजरने वाले लोग पेयजल समस्या से जूझ रहे है. अंदर मुहल्लों की हालत तो और खराब है. किसी तरह लोग पानी की खरीददारी कर अपना जीवन व्यतीत कर रहे है. सरकार और प्रशासनिक तंत्र जमीनी हक़ीक़त को जानने का प्रयास नही कर रही है और ना ही अपने दिए आदेशों पर हुई करवाई की जांच कर रही है.

बहरहाल जनता को ही अपने हक के लिये सरकार और महकमें को जगाना होगा, उन्हें जमीनी हकीकतों से रूबरू कराना होगा, तभी जाकर चौक चौराहों और गलियों में पीने का पानी सरकारी चापाकलों से मिल सकता है.

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