Bholaa Film Review: Ravi Basrur का Background Score और Deepak Dobriyal की Acting है फ़िल्म की जान

Bholaa Film Review: Ravi Basrur का Background Score और Deepak Dobriyal की Acting है फ़िल्म की जान

‘Bholaa’ One Word Review : Fantastic

फ़िल्म समाप्त होती है To be Continued… के साथ और पर्दे पर ‘अभिषेक बच्चन’ की आवाज़ में एक Dialogue “मौत का चेहरा बदला है किरदार नहीं…” Bholaa Part 2 के लिए उत्सुकता पैदा करता है। “अस्वाथामा पागल हो चुका है…”, “गीता पढ़ कर जा रहे हो बाहर जा कर महाभारत शुरू मत कर देना…”, “शेरों के संविधान में समझौता नहीं होता…”, “बंदूक की नौकरी चुनी है गोली तो खानी पड़ेगी…”, “लड़ाई हौसलों से जीती जाती है संख्या बल से नहीं…” ऐसे ही कुछ और भौकाल मचाने वाले Dialogue फ़िल्म में मसाला बनाये रखते हैं। फ़िल्म की जान है ‘रवि बसरूर’ का दिया Background Score, जो दर्शकों के अंदर खलबली पैदा करता है। ‘अंकुश सिंह’ का लिखा Screenplay कई जगह कमजोर लगता है। ‘दीपक डोबरियाल’ की एक्टिंग को 10 में 10 अंक मिलते हैं। ‘तब्बू’ की सुंदरता उनके एक्टिंग पर हावी है। अब ‘तब्बू’ की खूबसूरती देखें या उनकी एक्टिंग ? ये सवाल अमर है। ‘संजय मिश्रा’ का छोटा किरदार, विनीत कुमार का खतरनाक अभिनय, जोरदार एक्शन के साथ Emotional Touch, जबरदस्त किरदार, कमजोर Cinematography, ठीक – ठाक वाला VFX, बनारस के घाट और अजय देवगन की खूबसूरत निर्देशन से सजी है फ़िल्म।

Story

फ़िल्म की कहानी शुरू होती है माफ़िया और पुलिस की रेस के साथ। माफ़िया गिरोह के ड्रग तस्करी का माल एसपी ‘डायना’ (तब्बू) जब्त कर लेती है, जिसे वो खुफिया जगह पर छिपा देती है। दूसरी तरफ 10 साल बाद जेल से निकलने के बाद ‘भोला’ (अजय देवगन) को यह पता चलता है कि उसकी बेटी लखनऊ के किसी अनाथालय में है। कहानी आगे बढ़ती है और अपने माल को पुलिस से वापस लाने और एसपी ‘डायना’ को जान से मारने के लिए ‘अस्वाथामा’ (दीपक डोबरियाल) तैयारी में लग जाता है। एक अनजान कॉल से ‘अस्वाथामा’ (दीपक डोबरियाल) को ये पता लगता है कि उनकी गैंग का कोई व्यक्ति पुलिस से मिला हुआ है और साथ ही उसे एक टिप मिलती है कि कैसे वो पुलिस से अपना माल वापस के कर एसपी ‘डायना’ को मार सकता है। एक छोटी सी पार्टी में जहाँ सभी पुलिस ऑफिसर शराब के साथ मगन रहते हैं वही माफिया गैंग से मिला हुआ ऑफिसर शराब में नशीले पदार्थों मिला देता है। जिसके बाद सभी बेहोश हो जाते हैं। दूसरी तरफ ‘अस्वाथामा’ (दीपक डोबरियाल) अपने गैंग के साथ एसपी ‘डायना’ को मारने और अपने माल को वापस लेने के लिए निकल पड़ता है। वही एसपी ‘डायना’ सभी बेहोश हुए ऑफिसर को हॉस्पिटल ले जाने के लिए किसी ट्रक ड्राइवर को खोजते हुए ‘भोला’ (अजय देवगन) से टकरा जाती है। जिसके बाद भोला सभी पुलिस ऑफिसर को हॉस्पिटल ले कर रवाना होता है। इन सब के बीच कहानी के बीच ‘भोला’ (अजय देवगन) की बेटी का जिक्र और अनाथालय से आये एक फ़ोन पर एक बाप का भाउक हो जाना, एक्शन सीन के बीच दर्शकों को पूरे तरीके से भावविभोर कर देता है। क्या भोला हॉस्पिटल पहुँच पाता है ? भोला 10 साल तक जेल में क्यों था ? क्या भोला अपनी बेटी से मिल पाता है ? क्या तब्बू सभी पुलिस ऑफिसर को बचा पाती है या खुद की जान चली जाती है ? क्या ‘अस्वाथामा’ (दीपक डोबरियाल) एसपी ‘डायना’ को मार कर अपना माल वापस ले पाता है ? ये सब आपको फ़िल्म खत्म होते पता चलता है। इसके साथ ही ‘अभिषेक बच्चन’ का इस फ़िल्म से क्या संबंध है। ये जानने के लिए आपको सिनेमा हॉल के दरवाजे पर दस्तक देना पड़ेगा।

Actor Performance

अस्वाथामा के किरदार में (दीपक डोबरियाल) सबसे ज्यादा प्रभावित लगते हैं। अगर ये कहें कि ‘दीपक डोबरियाल’ का अभिनय ‘अजय देवगन’ के अभिनय पर भारी पड़ता है, तो ये गलत नही होगा। ‘दीपक डोबरियाल’ का किरदार दर्शकों को फ़िल्म से बांधे रखता है। एसपी ‘डायना’ के किरदार में ‘तब्बू’ खूबसूरत दिखने के साथ – साथ पुलिस के किरदार को बेहतर चरितार्थ कर पाती हैं। ‘विनीत कुमार’ का किरदार बड़ा जरूर लेकिन स्क्रीन स्पेस कम दिया गया है। कम समय में ‘विनत कुमार’ अपने किरदार को दर्शकों के बीच जीवंत करने में बखूबी कामयाब दिखते हैं। एक पुलिस कांस्टेबल के किरदार में ‘संजय मिश्रा’ का काम अच्छा है। ‘संजय मिश्रा’ के पास इस फ़िल्म में करने के लिए ज्यादा कुछ था भी नहीं। ‘गजराज राव’, ‘किरण कुमार’, ‘मकरंद देशपांडे’ जैसे बहुतेरे कलाकार हैं जिनका किरदार कम समय का है और उन्होंने अपने किरदार के मुताबिक बढ़िया काम किया है।

Direction & Technical Aspects

इस फ़िल्म का निर्देशन किया है अजय देवगन ने जो कि खुद टाइटल किरदार ‘भोला’ की भूमिका में भी हैं। अभिनय और निर्देशक दोनो किरदार को निभाना आसान काम होता नहीं, लेकिन ‘अजय देवगन’ ने दोनों को बहुत ही खूबसूरत तरीके से संतुलित किया है। इन सब के बीच ‘भोला’ के किरदार में वो भले की जोरदार तरीके से एक्शन करते नज़र आरहे हैं लेकिन कुछ एक जगह निर्देशक की भूमिका में कमजोर दिखाई पड़े हैं। कुछ सिन बहुत ही बनावटी लगा है। वजाए की फ़िल्म की कॉस्टिंग बहुत अच्छी हुए है जिस वजह से कलाकारों ने अपनी किरदार को शानदार तरीके से निभाया है। यही कारण है कि निर्देशक का काम आसान रहा और छोटी गलतियों को नजरअंदाज किया जा सकता है।

‘रवि बसरूर’ का Background Score फ़िल्म की जान है। एक एक्शन से भरपूर फ़िल्म में जिस स्तर का Background Score होना चाहिए वो इस फ़िल्म में आपको मिलेगा। रवि बसरूर का Background Score इस फ़िल्म के लिए Masterpiece है। इस काम के लिए रवि बसरूर को Salute करना बनता है।

क्यों देखें ये फ़िल्म ?

अगर आप ‘दीपक डोबरियाल’ की एक्टिंग के फैन हैं, एक्शन फिल्म देखने का शौक़ है, ‘विनीत कुमार’ की दहशत पैदा करनी वाली एक्टिंग, और सबसे ज्यादा प्रभावित करती ‘रवि बसरूर’ के Background Score को करीब से जीना चाहते हैं तो ये फ़िल्म आपके लिए है।

 

Review by : Abhinandan Kumar Dwivedi 

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