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अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश, यूपी-बिहार से 4 आरोपित गिरफ्तार, विदेशी नेटवर्क से जुड़े तार

CT Bihar Desk
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मुजफ्फरपुर, 22 अप्रैल (हि.स.)। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो आम भारतीय नागरिकों की अत्यंत संवेदनशील और व्यक्तिगत जानकारी विदेशी अपराधियों को बेच रहा था।

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इस अभियान में पुलिस ने उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न जिलों से कुल चार मुख्य साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह अत्याधुनिक तकनीकी उपकरणों, फर्जी एपीआई और टेलीग्राम बॉट्स का सहारा लेकर देश की सुरक्षा और नागरिकों की गोपनीयता के साथ खिलवाड़ कर रहा था।

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एक गुप्त सूचना पर कार्रवाई करते हुए, बिहार स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और पुलिस ने इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह पूरा ऑपरेशन 21 अप्रैल, 2026 को एक केंद्रीय जांच एजेंसी से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर शुरू किया गया था। वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कांतेश कुमार मिश्रा को सूचना मिली थी कि अहियापुर थाना क्षेत्र का रहने वाला रिषभ कुमार अपने घर से ही एक अवैध डेटा एक्सचेंज चला रहा है।

मामले की गंभीरता और अंतरराष्ट्रीय संलिप्तता को देखते हुए तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया गया। इस टीम में साइबर थाना, जिला आसूचना इकाई और बिहार एसटीएफ के तेजतर्रार अधिकारियों को शामिल किया गया। सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी के नेतृत्व और साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार की अगुवाई में टीम ने रिषभ कुमार के ठिकाने पर छापेमारी कर उसे धर दबोचा। रिषभ की निशानदेही पर पुलिस ने उसके तीन अन्य सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया, जो इस नेटवर्क की अलग-अलग कड़ियों को संभाल रहे थे।

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गिरफ्तार आरोपितों की पहचान

1.रिषभ कुमार (मुख्य आरोपित) अहियापुर , मुजफ्फरपुर,बिहार2. दीपक चौधरी उर्फ आशु कुमार- गाजीपुर, उत्तर प्रदेश।3. सुधांशु कुमार- जाले – दरभंगा, बिहार4. साहिल कुमार – हथौड़ी ,मुजफ्फरपुर, बिहार

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विदेशी नेटवर्क और बांग्लादेशी कनेक्शन

मुजफ्फरपुर के एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने इस बाबत बुधवार को बताया कि केंद्रीय एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। आरोपितों के फोन में विदेशी साइबर गिरोहों के साथ की गई चैटिंग के पुख्ता सबूत मिले हैं। शुरुआती जांच में विशेष रूप से बांग्लादेश के साइबर अपराधियों के साथ सक्रिय जुड़ाव के साक्ष्य मिले हैं। सुरक्षा एजेंसियों की नज़र से बचने के लिए यह गिरोह पूरी तरह से एन्क्रिप्टेड टेलीग्राम चैनलों के माध्यम से काम करता था। इस बड़ी सफलता के बाद मुजफ्फरपुर के पुलिस कप्तान ने जनता से सतर्क रहने की अपील की है।

उन्होंने कहा कि “साइबर अपराध को रोकने के लिए सबसे पहली सीढ़ी जागरूकता है। नागरिक अपना मोबाइल फोन या निजी दस्तावेज (जैसे आधार कार्ड, ओटीपी या बैंक विवरण) किसी अनजान व्यक्ति को न दें और न ही उसका उपयोग करने दें। आपकी एक छोटी सी लापरवाही अंतरराष्ट्रीय गिरोहों को आपके खिलाफ हथियार दे सकती है।

एसएसपी कांतेस कुमार मिश्रा ने कहा है कि सभी चारों क्रिमिनल के पास से बरामद की गई सभी मोबाइल फोन और आईपैड डिजिटल फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है ताकि तकनीकी साक्ष्य संकलन बढ़िया से हो और पूरा डिटेल खंगाला जाएगा ।

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