Chhapra: जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव की अध्यक्षता में ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत पांडुलिपियों के संरक्षण और उनके डिजिटलीकरण (Digitization) को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न धार्मिक संगठनों, सामाजिक व सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों, जयप्रकाश विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने हिस्सा लिया।
मुख्य बिंदु: संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस मिशन का मुख्य उद्देश्य हमारी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित करना है।
स्वामित्व सुरक्षित: जिलाधिकारी ने आश्वस्त किया कि पांडुलिपियों का स्वामित्व (Ownership) मूल धारकों के पास ही रहेगा। प्रशासन केवल उन्हें डिजिटल रूप में सहेजने का कार्य कर रहा है ताकि समय के साथ ये नष्ट न हों।
अब तक की प्रगति: मिशन की सफलता का प्रमाण है कि सारण जिला से अब तक लगभग 3400 पांडुलिपियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जा चुका है।
योगदानकर्ताओं का सम्मान और फीडबैक
आज की बैठक में उन नागरिकों की सराहना की गई जिन्होंने इस मिशन में अपनी अमूल्य पांडुलिपियों को साझा किया है। इस पुनीत कार्य में योगदान देने वाले 08 व्यक्तियों को जिलाधिकारी द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
बैठक में उपस्थित शोधार्थियों और धार्मिक संगठनों के सदस्यों ने मिशन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण फीडबैक और सुझाव दिए, जिन्हें प्रशासन ने गंभीरता से नोट किया है।
जिलाधिकारी की अपील:
”पांडुलिपियाँ हमारा गौरवशाली इतिहास हैं। नमी, दीमक और वक्त की मार से इन्हें बचाने का एकमात्र तरीका इनका डिजिटलीकरण है। मैं सारण के सभी नागरिकों और संस्थाओं से अपील करता हूँ कि वे आगे आएं और इस ‘ज्ञान भारतम्’ मिशन का हिस्सा बनें ताकि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए इस ज्ञान के भंडार को सुरक्षित रख सकें।” आम जनमानस से अनुरोध किया है कि यदि उनके पास कोई भी प्राचीन पांडुलिपि, ग्रंथ या ऐतिहासिक दस्तावेज हो, तो वे जिला प्रशासन से संपर्क कर उसे डिजिटल रूप में संरक्षित करवाने में सहयोग करें।

















