-कैबिनेट में तीन नए केंद्रीय विद्यालय, एम्स पटना विस्तार, आरआरटीएस और कृषि योजनाओं समेत कई बड़े फैसले पटना, 08 जुलाई (हि.स.)। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार शाम आयोजित बिहार मंत्रिमंडल की बैठक में कुल 22 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी। बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, कृषि, मत्स्य पालन, ऊर्जा, डेयरी, शहरी विकास, सिंचाई और युवाओं के कल्याण से जुड़े कई अहम निर्णय लिए गए। सरकार का दावा है कि इन फैसलों से राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी, निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा आम लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए मधुबनी, मुंगेर और मुजफ्फरपुर में केंद्रीय विद्यालय स्थापित करने का रास्ता साफ कर दिया। इसके लिए प्रत्येक जिले में पांच-पांच एकड़ भूमि केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) को एक रुपये के टोकन लीज मूल्य पर 30 वर्षों के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। लीज के नवीनीकरण का प्रावधान भी रहेगा। सरकार का मानना है कि इससे इन जिलों में गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा का विस्तार होगा। स्वास्थ्य क्षेत्र में एम्स पटना के विस्तार को मंजूरी दी गई। इसके लिए दानापुर के मौजा-भूसौला में 26.76 एकड़ भूमि के अधिग्रहण की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। करीब 348.90 करोड़ रुपये की इस परियोजना के पूरा होने पर सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सेवाओं का विस्तार होगा और मरीजों को एक ही परिसर में आधुनिक एवं उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी। मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत ‘बिहार एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड’ के गठन को मंजूरी दी गई। यह निगम मत्स्य अवसंरचना के विकास, संचालन और प्रभावी प्रबंधन का कार्य करेगा, जिससे उत्पादन और रोजगार दोनों में वृद्धि होने की उम्मीद है। भारत ने किया पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का फ्लाइट टेस्ट, 60 किमी. पर था लक्ष्य राज्य में आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। पटना से मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, आरा और गयाजी तक रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) विकसित करने के लिए अल्टरनेटिव एनालिसिस रिपोर्ट (एएआर) और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार कराया जाएगा। इसके लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) को नामित किया गया है। सरकार के अनुसार इस परियोजना से क्षेत्रीय संपर्क मजबूत होगा और आर्थिक एवं शहरी विकास को नई गति मिलेगी। हरियाली अभियान के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक राज्य सरकार एवं उसके अधीन भवनों पर कुल 500 मेगावाट क्षमता के ग्रिड-कनेक्टेड रूफटॉप सोलर पावर प्लांट स्थापित करने की मंजूरी दी गई। इससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और सरकारी संस्थानों की बिजली लागत में कमी आएगी। कृषि क्षेत्र के लिए भी कई महत्वपूर्ण योजनाओं को स्वीकृति दी गई। ‘दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन’ के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में खरीफ, रबी एवं गरमा मौसम की दलहनी फसलों को बढ़ावा देने के लिए लगभग 79.84 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के अंतर्गत एग्री-स्टैक परियोजना के तहत फार्मर रजिस्ट्री एवं डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए 154 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। वहीं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (कृषोन्नति योजना) के तहत खाद्यान्न एवं वाणिज्यिक फसलों को बढ़ावा देने के लिए 44.63 करोड़ रुपये की योजना को भी स्वीकृति मिली। मंत्रिमंडल ने महात्मा गांधी नरेगा के तहत गठित सामाजिक अंकेक्षण सोसाइटी को विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 के अंतर्गत अंगीकृत करते हुए विकसित भारत-जी राम जी योजना, बिहार-2026 का निष्पक्ष एवं पारदर्शी सामाजिक अंकेक्षण कराने के लिए अधिकृत किया है। RSA का 17वाँ स्थापना दिवस समारोह संपन्न, नई कार्यकारिणी की घोषणा इसके अलावा बंद मोतीपुर (मुजफ्फरपुर) चीनी मिल की 266 एकड़ भूमि इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) से वापस लेने की प्रक्रिया के तहत न्यायालय के आदेश के अनुरूप कंपनी को 63.39 करोड़ रुपये के भुगतान की स्वीकृति भी प्रदान की गई। डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए सात निश्चय-2 के अंतर्गत नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट के तहत कॉम्फेड में बल्क मिल्क कूलर, डाटा प्रोसेसर आधारित दुग्ध संग्रहण इकाइयों तथा दूध मिलावट जांच मशीनों की स्थापना को मंजूरी दी गई। 56.88 करोड़ रुपये की इस परियोजना में राज्य सरकार 28.44 करोड़ रुपये का अंशदान देगी। शहरी विकास के क्षेत्र में राज्य सरकार ने ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके लिए सीईपीटी सलाहकार फाउंडेशन, सीईपीटी विश्वविद्यालय, अहमदाबाद को तकनीकी सहायता इकाई के रूप में चयनित किया गया है। साथ ही पटना, सोनपुर, गयाजी और मुजफ्फरपुर में प्रस्तावित टाउनशिप के विकास के लिए आवश्यकता अनुसार भूमि क्रय एवं भूमि अधिग्रहण को भी मंजूरी दी गई। भागलपुर जिले में गंगा नदी पर स्थित विक्रमशिला सेतु की मरम्मत, बेली ब्रिज निर्माण तथा नए सस्पेंडेड स्लैब निर्माण के लिए 126.25 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इससे सेतु की संरचनात्मक मजबूती बढ़ेगी और यातायात व्यवस्था अधिक सुरक्षित होगी। बदरीनाथ मंदिर की भेंट गणना में कथित अनियमितता, कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज युवाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने वाली मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक अगले पांच वर्षों के लिए विस्तारित करने का निर्णय लिया गया। योजना के संचालन के लिए वर्ष 2026-27 में 300 करोड़ रुपये के व्यय की प्रशासनिक स्वीकृति भी दी गई। बैठक में मुंगेर जिले की सिंघवारणी जलाशय योजना के लिए क्षतिपूरक वनीकरण के उद्देश्य से 39 एकड़ 58 डिसमिल भूमि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को निःशुल्क अंतरविभागीय स्थायी हस्तांतरण की मंजूरी भी दी गई। सरकार का कहना है कि इससे जलाशय परियोजना के कार्यों को गति मिलेगी और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा। मंत्रिमंडल के इन निर्णयों को राज्य में आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा, परिवहन और रोजगार के क्षेत्र में दीर्घकालिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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-कैबिनेट में तीन नए केंद्रीय विद्यालय, एम्स पटना विस्तार, आरआरटीएस और कृषि योजनाओं समेत कई बड़े फैसले
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पटना, 08 जुलाई (हि.स.)। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार शाम आयोजित बिहार मंत्रिमंडल की बैठक में कुल 22 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी। बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, कृषि, मत्स्य पालन, ऊर्जा, डेयरी, शहरी विकास, सिंचाई और युवाओं के कल्याण से जुड़े कई अहम निर्णय लिए गए। सरकार का दावा है कि इन फैसलों से राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी, निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा आम लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
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शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए मधुबनी, मुंगेर और मुजफ्फरपुर में केंद्रीय विद्यालय स्थापित करने का रास्ता साफ कर दिया। इसके लिए प्रत्येक जिले में पांच-पांच एकड़ भूमि केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) को एक रुपये के टोकन लीज मूल्य पर 30 वर्षों के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। लीज के नवीनीकरण का प्रावधान भी रहेगा। सरकार का मानना है कि इससे इन जिलों में गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा का विस्तार होगा।
स्वास्थ्य क्षेत्र में एम्स पटना के विस्तार को मंजूरी दी गई। इसके लिए दानापुर के मौजा-भूसौला में 26.76 एकड़ भूमि के अधिग्रहण की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। करीब 348.90 करोड़ रुपये की इस परियोजना के पूरा होने पर सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सेवाओं का विस्तार होगा और मरीजों को एक ही परिसर में आधुनिक एवं उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।
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मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत ‘बिहार एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड’ के गठन को मंजूरी दी गई। यह निगम मत्स्य अवसंरचना के विकास, संचालन और प्रभावी प्रबंधन का कार्य करेगा, जिससे उत्पादन और रोजगार दोनों में वृद्धि होने की उम्मीद है।
राज्य में आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। पटना से मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, आरा और गयाजी तक रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) विकसित करने के लिए अल्टरनेटिव एनालिसिस रिपोर्ट (एएआर) और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार कराया जाएगा। इसके लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) को नामित किया गया है। सरकार के अनुसार इस परियोजना से क्षेत्रीय संपर्क मजबूत होगा और आर्थिक एवं शहरी विकास को नई गति मिलेगी।
हरियाली अभियान के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक राज्य सरकार एवं उसके अधीन भवनों पर कुल 500 मेगावाट क्षमता के ग्रिड-कनेक्टेड रूफटॉप सोलर पावर प्लांट स्थापित करने की मंजूरी दी गई। इससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और सरकारी संस्थानों की बिजली लागत में कमी आएगी।
कृषि क्षेत्र के लिए भी कई महत्वपूर्ण योजनाओं को स्वीकृति दी गई। ‘दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन’ के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में खरीफ, रबी एवं गरमा मौसम की दलहनी फसलों को बढ़ावा देने के लिए लगभग 79.84 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के अंतर्गत एग्री-स्टैक परियोजना के तहत फार्मर रजिस्ट्री एवं डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए 154 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। वहीं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (कृषोन्नति योजना) के तहत खाद्यान्न एवं वाणिज्यिक फसलों को बढ़ावा देने के लिए 44.63 करोड़ रुपये की योजना को भी स्वीकृति मिली।
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मंत्रिमंडल ने महात्मा गांधी नरेगा के तहत गठित सामाजिक अंकेक्षण सोसाइटी को विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 के अंतर्गत अंगीकृत करते हुए विकसित भारत-जी राम जी योजना, बिहार-2026 का निष्पक्ष एवं पारदर्शी सामाजिक अंकेक्षण कराने के लिए अधिकृत किया है।
इसके अलावा बंद मोतीपुर (मुजफ्फरपुर) चीनी मिल की 266 एकड़ भूमि इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) से वापस लेने की प्रक्रिया के तहत न्यायालय के आदेश के अनुरूप कंपनी को 63.39 करोड़ रुपये के भुगतान की स्वीकृति भी प्रदान की गई।
डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए सात निश्चय-2 के अंतर्गत नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट के तहत कॉम्फेड में बल्क मिल्क कूलर, डाटा प्रोसेसर आधारित दुग्ध संग्रहण इकाइयों तथा दूध मिलावट जांच मशीनों की स्थापना को मंजूरी दी गई। 56.88 करोड़ रुपये की इस परियोजना में राज्य सरकार 28.44 करोड़ रुपये का अंशदान देगी।
शहरी विकास के क्षेत्र में राज्य सरकार ने ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके लिए सीईपीटी सलाहकार फाउंडेशन, सीईपीटी विश्वविद्यालय, अहमदाबाद को तकनीकी सहायता इकाई के रूप में चयनित किया गया है। साथ ही पटना, सोनपुर, गयाजी और मुजफ्फरपुर में प्रस्तावित टाउनशिप के विकास के लिए आवश्यकता अनुसार भूमि क्रय एवं भूमि अधिग्रहण को भी मंजूरी दी गई।
भागलपुर जिले में गंगा नदी पर स्थित विक्रमशिला सेतु की मरम्मत, बेली ब्रिज निर्माण तथा नए सस्पेंडेड स्लैब निर्माण के लिए 126.25 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इससे सेतु की संरचनात्मक मजबूती बढ़ेगी और यातायात व्यवस्था अधिक सुरक्षित होगी।
युवाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने वाली मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक अगले पांच वर्षों के लिए विस्तारित करने का निर्णय लिया गया। योजना के संचालन के लिए वर्ष 2026-27 में 300 करोड़ रुपये के व्यय की प्रशासनिक स्वीकृति भी दी गई।
बैठक में मुंगेर जिले की सिंघवारणी जलाशय योजना के लिए क्षतिपूरक वनीकरण के उद्देश्य से 39 एकड़ 58 डिसमिल भूमि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को निःशुल्क अंतरविभागीय स्थायी हस्तांतरण की मंजूरी भी दी गई। सरकार का कहना है कि इससे जलाशय परियोजना के कार्यों को गति मिलेगी और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा।
मंत्रिमंडल के इन निर्णयों को राज्य में आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा, परिवहन और रोजगार के क्षेत्र में दीर्घकालिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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