kolkata: कोलकाता की सड़कों पर चल रहे 15 साल पुराने व्यावसायिक वाहन फिलहाल नहीं हटाए जाएंगे। कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस संबंध में राज्य सरकार की उस नीति को मंजूरी दे दी है जिसमें पुराने वाहनों को कुछ शर्तों के साथ चलने की अनुमति दी गई थी। परीक्षण सफलतापूर्वक पास करने पर ही वाहन को चलने की अनुमति दी जाएगी। आज का पंचांग | आषाढ़ कृष्णपक्ष तृतीया सरकार ने पहले ही बस मालिक संगठनों की मांग को ध्यान में रखते हुए नीति स्तर पर फैसला लिया था कि अगर पुरानी बसें सड़क योग्य साबित होती हैं, तो उन्हें चलने की इजाजत दी जा सकती है। अब हाई कोर्ट ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है, लेकिन कुछ सख्त शर्तों के साथ। नये नियमों के अनुसार, 15 साल से पुराने किसी भी व्यावसायिक वाहन को सड़क पर चलाने के लिए साल में दो बार फिटनेस सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा। यह फिटनेस परीक्षण सफलतापूर्वक पास करने पर ही वाहन को चलने की अनुमति दी जाएगी। राज्य सरकार इस विषय में 17 जून को अदालत में नयी गाइडलाइन का मसौदा पेश करेगी स्वास्थ्य संस्थान में अनावश्यक रेफरल पर रोक लगायें : मुख्यमंत्री इसके साथ ही, प्रदूषण जांच के लिए वाहन मालिकों को अतिरिक्त ₹100 जमा करने होंगे और प्रत्येक फिटनेस सर्टिफिकेट की वैधता छह महीने तक होगी। राज्य सरकार इस विषय में 17 जून को अदालत में नयी गाइडलाइन का मसौदा पेश करेगी। अदालत के सुझावों के आधार पर इसे अंतिम रूप दिया जाएगा और फिर सार्वजनिक अधिसूचना के रूप में लागू किया जाएगा। इस विषय पर सोमवार को ही परिवहन विभाग और विभिन्न बस संगठनों के बीच बैठक हुई। इसमें तय हुआ कि एकसाथ सभी पुराने बसों को हटाना व्यवहारिक नहीं होगा, क्योंकि इससे शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा सकती है। राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पर्यावरण की चिंता को नज़रअंदाज़ किए बिना, फिटनेस के आधार पर ऐसे वाहनों को सीमित रूप से चलने की अनुमति देना एक संतुलित उपाय होगा। जनगणना: जितना अच्छा प्रशिक्षण होगा कार्य में उतनी ही सुविधा होगी
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kolkata: कोलकाता की सड़कों पर चल रहे 15 साल पुराने व्यावसायिक वाहन फिलहाल नहीं हटाए जाएंगे। कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस संबंध में राज्य सरकार की उस नीति को मंजूरी दे दी है जिसमें पुराने वाहनों को कुछ शर्तों के साथ चलने की अनुमति दी गई थी।
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परीक्षण सफलतापूर्वक पास करने पर ही वाहन को चलने की अनुमति दी जाएगी।
सरकार ने पहले ही बस मालिक संगठनों की मांग को ध्यान में रखते हुए नीति स्तर पर फैसला लिया था कि अगर पुरानी बसें सड़क योग्य साबित होती हैं, तो उन्हें चलने की इजाजत दी जा सकती है। अब हाई कोर्ट ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है, लेकिन कुछ सख्त शर्तों के साथ। नये नियमों के अनुसार, 15 साल से पुराने किसी भी व्यावसायिक वाहन को सड़क पर चलाने के लिए साल में दो बार फिटनेस सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा। यह फिटनेस परीक्षण सफलतापूर्वक पास करने पर ही वाहन को चलने की अनुमति दी जाएगी।
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राज्य सरकार इस विषय में 17 जून को अदालत में नयी गाइडलाइन का मसौदा पेश करेगी
इसके साथ ही, प्रदूषण जांच के लिए वाहन मालिकों को अतिरिक्त ₹100 जमा करने होंगे और प्रत्येक फिटनेस सर्टिफिकेट की वैधता छह महीने तक होगी। राज्य सरकार इस विषय में 17 जून को अदालत में नयी गाइडलाइन का मसौदा पेश करेगी। अदालत के सुझावों के आधार पर इसे अंतिम रूप दिया जाएगा और फिर सार्वजनिक अधिसूचना के रूप में लागू किया जाएगा।
इस विषय पर सोमवार को ही परिवहन विभाग और विभिन्न बस संगठनों के बीच बैठक हुई। इसमें तय हुआ कि एकसाथ सभी पुराने बसों को हटाना व्यवहारिक नहीं होगा, क्योंकि इससे शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा सकती है। राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पर्यावरण की चिंता को नज़रअंदाज़ किए बिना, फिटनेस के आधार पर ऐसे वाहनों को सीमित रूप से चलने की अनुमति देना एक संतुलित उपाय होगा।
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