एनजीओ की सहायता से दो साल से लापता सयमुन निशा अपने परिवार से मिली

एनजीओ की सहायता से दो साल से लापता सयमुन निशा अपने परिवार से मिली

Chhapra: पिछले 2 वर्षों से अपने घर से बिछड़ी हुई सयमुन निशा को उनके परिवार से ‘एस्पाइरिंग लाइव्स’ एनजीओ, चेन्नई के द्वारा मिलाया गया. एस्पाइरिंग लाइव्स ने सयमुन निशा के परिवार का पता लगाकर उनको उनके परिवार से मिलाया है। सयमुन निशा का बेटा मोहम्मद आज़ाद और बड़ी बहन कमरुन निशा को चेन्नई से वापस लेकर गाँव पहुंचे. 

सयमुन निशा जो ‘मियां पट्टी गांव, मांझी प्रखंड, सारण जिला, बिहार’ की रहने वाली हैं, 2 वर्ष पूर्व (10 जनवरी, 2019) अपनी बड़ी बहन (कमरुन निशा) के घर (जलालपुर गांव, रिविलगंज प्रखंड, सारण जिला, बिहार) से लापता हो गई थीं. अपनी माँ के देहांत के बाद सयमुन निशा अपनी बड़ी बहन (कमरुन निशा) के घर रहने लगी थीं. सयमुन निशा 10 जनवरी, 2019 को अपनी बड़ी बहन (कमरुन निशा) के घर से अपने बेटे (मोहम्मद आज़ाद) को ढूंढ़ने की बात पड़ोसियों से बताकर कोलकाता गयी थीं. मानसिक रूप से अस्वस्थ होने की वजह से यह लापता हो गयी थीं. इनके लापता होने की वजह से इनके परिवार वालों का बुरा हाल था. परिवार ने सयमुन निशा को खोजने के लिए इश्तेहार (ईनाम की राशि के साथ) का भी सहारा लिया, लेकिन सयमुन निशा को नहीं खोजा जा सका क्योंकि इनकी मानसिक अस्वस्थता ने इन्हें घर से काफी दूर (तमिलनाडु) पहुँचा दिया था. इनको इनकी असहाय स्थिति में 5 सितम्बर, 2019 को जे12 कानथुर पुलिस स्टेशन, चेन्नई द्वारा लिट्ल हार्ट्स संस्था में भर्ती कराया गया ताकि इनका गुजर-बसर हो सके. इस संस्था ने एस्पाइरिंग लाइव्स एनजीओ जो मानसिक रूप से अस्वस्थ लापता लोगों को उनके परिवार से मिलाने का कार्य करता है, से संपर्क किया ताकि सयमुन निशा को उनके परिवार से मिलाया जा सके.

एस्पाइरिंग लाइव्स के मैनेजिंग ट्रस्टी मनीष कुमार सयमुन निशा से बात की ताकि इनके परिवार का पता लगाकर इनको इनके परिवार से मिलाया जा सके. सयमुन निशा अपनी मानसिक अस्वस्थता के कारण अपने परिवार के बारे में ठीक से नहीं बता पाईं. अपने घर का पता केवल मांझी बताया.

मनीष कुमार को स्थानीय पत्रकार मनोज कुमार सिंह का मोबाइल नंबर मिला. मनीष कुमार ने मनोज कुमार सिंह से बात कर उनको सयमुन निशा की फोटो और सम्बंधित विवरण दिया. मांझी में संचालित अनुभव जिंदगी का नामक सोशल ग्रुप के द्वारा सयमुन निशा के परिजनों को ढूंढ निकाला गया. जिसके बाद उनके घर वाले उन्हें मांझी वापस लेकर आये.

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