गोपालगंज, 27 फ़रवरी (हि.स.)।प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में रिश्वत मांगने के आरोप में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्राम पंचायत करसघाट के ग्रामीण आवास सहायक को तत्काल प्रभाव से सेवा से मुक्त कर दिया है। साथ ही मामले में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उप विकास आयुक्त गौरव कुमार के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई। वैभव सूर्यवंशी बने भारतीय टीम के लिए चुने जाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी जानकारी के अनुसार, सिधवलिया प्रखंड के ग्राम पंचायत राज–करसघाट निवासी लाभुक पप्पू कुमार मांझी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें आवास योजना के तहत भुगतान कराने के एवज में 30,000 रूपए की रिश्वत मांगी जा रही है। शिकायत के समर्थन में उन्होंने ऑडियो रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध कराई। इस मामले को लेकर भाजपा विधायक मिथलेश तिवारी ने विधानसभा में मामला को उठाया। रिश्वत मांगने का ऑडियो विधानसभा अध्यक्ष को दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए 25 फरवरी को एक संयुक्त जांच दल का गठन किया गया। जांच टीम में डीआरडीए के निदेशक राकेश कुमार चौबे, लेखा प्रशासन एवं स्वनियोजन तथा प्रभारी एमआईएस पदाधिकारी शामिल थे। टीम को 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था। आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 शृंखला के लिए भारतीय टीम घोषित, श्रेयस अय्यर बने कप्तान जांच में पुष्टि हुई कि लाभुक को वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत लाभ स्वीकृत किया गया था। 30 जनवरी को आवास की स्वीकृति दी गई और 14 फरवरी को प्रथम किस्त के रूप में 40,000 रूपए की राशि उनके खाते में हस्तांतरित की गई। इसके बावजूद दूसरी किस्त जारी कराने के नाम पर लाभुक और उनके परिजनों पर दबाव बनाया जा रहा था। लाभुक के पिता ने भी बयान दिया कि पहले 30,000 रूपए और बाद में 25,000 रूपए की मांग की गई। स्थलीय निरीक्षण के दौरान एक अन्य परिवार ने भी इसी प्रकार की शिकायत दर्ज कराई और ऑडियो साक्ष्य प्रस्तुत किया। अंडर-18 एशिया कप : जापान को 4-1 से हराकर भारतीय पुरुष हॉकी टीम बनी चैंपियन जांच दल ने कहा कि निर्माण प्रगति के बिना दूसरी किस्त की मांग व्यवहारिक और नियमानुकूल नहीं है। ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह प्रमाणित हुआ कि ग्राम पंचायत करसघाट के पीएम आवास सहायक उमेश कुमार द्वारा प्रथम किस्त जारी कराने के एवज में 25,000 से 30,000 रूपए तक की अवैध मांग की गई थी। मामले की पुष्टि के बाद बिहार ग्रामीण विकास विभाग, पटना के निर्देश के आलोक में संबंधित सहायक को तत्काल प्रभाव से पद से मुक्त कर दिया गया। साथ ही सिधवलिया के प्रखंड विकास पदाधिकारी से अलग से स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
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गोपालगंज, 27 फ़रवरी (हि.स.)।प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में रिश्वत मांगने के आरोप में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्राम पंचायत करसघाट के ग्रामीण आवास सहायक को तत्काल प्रभाव से सेवा से मुक्त कर दिया है। साथ ही मामले में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उप विकास आयुक्त गौरव कुमार के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई।
जानकारी के अनुसार, सिधवलिया प्रखंड के ग्राम पंचायत राज–करसघाट निवासी लाभुक पप्पू कुमार मांझी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें आवास योजना के तहत भुगतान कराने के एवज में 30,000 रूपए की रिश्वत मांगी जा रही है। शिकायत के समर्थन में उन्होंने ऑडियो रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध कराई। इस मामले को लेकर भाजपा विधायक मिथलेश तिवारी ने विधानसभा में मामला को उठाया। रिश्वत मांगने का ऑडियो विधानसभा अध्यक्ष को दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए 25 फरवरी को एक संयुक्त जांच दल का गठन किया गया। जांच टीम में डीआरडीए के निदेशक राकेश कुमार चौबे, लेखा प्रशासन एवं स्वनियोजन तथा प्रभारी एमआईएस पदाधिकारी शामिल थे। टीम को 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था।
जांच में पुष्टि हुई कि लाभुक को वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत लाभ स्वीकृत किया गया था। 30 जनवरी को आवास की स्वीकृति दी गई और 14 फरवरी को प्रथम किस्त के रूप में 40,000 रूपए की राशि उनके खाते में हस्तांतरित की गई। इसके बावजूद दूसरी किस्त जारी कराने के नाम पर लाभुक और उनके परिजनों पर दबाव बनाया जा रहा था। लाभुक के पिता ने भी बयान दिया कि पहले 30,000 रूपए और बाद में 25,000 रूपए की मांग की गई। स्थलीय निरीक्षण के दौरान एक अन्य परिवार ने भी इसी प्रकार की शिकायत दर्ज कराई और ऑडियो साक्ष्य प्रस्तुत किया।
जांच दल ने कहा कि निर्माण प्रगति के बिना दूसरी किस्त की मांग व्यवहारिक और नियमानुकूल नहीं है। ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह प्रमाणित हुआ कि ग्राम पंचायत करसघाट के पीएम आवास सहायक उमेश कुमार द्वारा प्रथम किस्त जारी कराने के एवज में 25,000 से 30,000 रूपए तक की अवैध मांग की गई थी। मामले की पुष्टि के बाद बिहार ग्रामीण विकास विभाग, पटना के निर्देश के आलोक में संबंधित सहायक को तत्काल प्रभाव से पद से मुक्त कर दिया गया। साथ ही सिधवलिया के प्रखंड विकास पदाधिकारी से अलग से स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
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