छपरा 2016: कैसा गुजरा साल, एक नज़र

छपरा 2016: कैसा गुजरा साल, एक नज़र

{अमन कुमार}
नमस्कार, साल 2016 के बीतने में अब कुछ घंटे बचे है. लोग आने वाले नए वर्ष की तैयारी में भी जुट गए हैं. इससे पहले की आप नए वर्ष के जश्न में डूब जाएँ. हम आपको लिए चलते हैं एक बार फिर वर्ष 2016 के उस सफर में जो कई मायनो में आपके और आपके शहर छपरा के लिए बेहद खास रहा है.

वर्ष 2016 जिसने आपके शहर और ज़िले कुछ मीठी, कुछ कड़वी यादें तो कुछ उपलब्धियां भी ज़रूर दीं हैं. इस सफर में हम सारणवासियों को ऐसी ख़बरों से रूबरू कराएँगे जो कई दिनों तक उनके बीच चर्चा का विषय बनी रही थीं. 

तो आइए हम इस सफ़र की शुरुआत करते हैं आपके छपरा में हुई साल की पहली सबसे बड़ी घटना से..

कोर्ट परिसर में धमाका

हम बात कर रहे हैं छपरा व्यवहार न्यायलय परिसर में हुए उस बम धमाके की. जिसने न्यायपालिका की सुरक्षा पर कई सवाल खड़े कर दिए. घटना 18 अप्रैल 2016 की है. समय सुबह के लगभग साढ़े आठ बज रहे थे.

घटना स्थल पर पहुंचे एसपी
घटनास्थल पर पहुंचे एसपी

 कोर्ट परिसर में हर दिन की तरह सब कुछ सामान्य चल रहा था. जब धमाका करने के इरादे से बुरके में एक महिला पहुंचती है और कुछ ही देर बाद अचानक से जोर का धमाका होता है. इस धमाके में एक बच्चे समेत तीन लोग भी घायल हो जाते हैं. छपरा कोर्ट की सुरक्षा में हुई इस बड़ी चुक के बाद एक एसआई समेत 7 पुलिसकर्मियों को निलंबन का सामना भी करना पड़ा. इस धमाके के बाद कोर्ट की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई.

पूर्ण शराबबंदी

इस सफ़र में आगे बढ़ते हैं और बात करते हैं नीतीश कुमार के उस ऐतिहासिक फैसले की जिसे विधानसभा चुनाव से पहले जनता से बिहार में पूर्ण शराबबंदी करने का वादा किया था और सरकार बनाने के कुछ की महीनो बाद सूबे के मुख्यमंत्री ने पहले देसी दारु पर रोक लगाईं और फिर इसके कुछ ही दिनों बाद विदेशी शराब पर भी शराबंदी कानून लाकर पूर्ण तरीके से रोक लगा दी. li

 इस कानून के पारित होने के बाद अब बिहार में किसी तरह का शराब बेचना, पीना और घर में शराब रखने वालों पर कानूनी करवाई का निर्देश दिया गया. शराब बंदी के बाद सूबे में इसका व्यापक असर दिख रहा था और फलस्वरूप अपराधिक घटनाओं में भी कमी आने लगी. शराबबंदी की खबर सुनते ही सूबे के महिलाएं सबसे ज्यादा खुश दिखीं. उन्होंने इस फैसले के लिए नीतीश कुमार को धन्यवाद भी दिया.

बाढ़ की त्रासदी

सारण जिले में अगस्त महीने में आई बाढ़ की त्रासदी को कौन भूल सकता है. जिसने कई सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया. ऐसा कहा जाना लगा कि जिले में 1971 के बाद पहली बार ऐसी बाढ़ आई थी. सरयू नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि होने से नदी का पानी गाँव में घुस गया. छपरा शहर भी इससे कहाँ अछुता था. रातों-रात शहर के किनारे बसे बस्तियों में सरयू नदी का पानी घुस गया. फिर क्या था धीरे-धीरे शहर के बाज़ारों में भी पानी घुसने लगा. सोनारपट्टी, कटहरीबाग़ जैसे रिहाईसही इलाके भी जलमग्न हो गये. flood लोगों का घरों में पानी घुसने लगा और उनका घरों से निकलना भी मुश्किल हो गया. पानी लगे होने के कारण मजबूरन दूकाने बंद करनी पड़ी. सड़के नदियाँ बन गयी. बाढ़ ने शहर के जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया. शहर के ब्रहमपुर में बाढ़ की चपेट में आकर एक मकान धराशायी भी हो गया. गावों में भी कुछ ऐसा ही हाल था. किसी का घर बह गया तो किसी के खेत. बाढ़ से लोग बुरी तरह से बेहाल थे. इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और बाढ़ पीड़ितों को राहत के सामान बांटे गया. NDRF की टीमें भी बुलाई गई.

ओवरब्रिज

छपरावासियों को काफी लम्बे इंतज़ार के बाद 2016 में एक ओवरब्रिज का सौगात मिला. शहर के सांढा ढाला रेलवे क्रासिंग के ऊपर बने इस पुल का काम जून में पूरा कर लिया गया. अब इसपर छोटी-बड़ी गाड़ियाँ भी सरपट दौड़ने लगी हैं. OVER BRIDGE ओवरब्रिज के बन जाने से अब लोगो को समय की बचत भी हो रही है. शहर को उत्तरी छोर से जोड़ने वाले इस पुल से आने जाने लोगो को बहुत सहूलियत भी मिलती है. एक तरफ यह कुछ युवाओं के सेल्फी का अड्डा बना भी हुआ है. लेकिन यह भी गौर करने वाली बात है की अभी तक इस ओवरब्रिज का आधिकारिक उद्घाटन नही हुआ है. जो की महज एक औपचारिकता मात्र ही है.

तनाव

अगस्त महीने में सोशल मीडिया पर देवताओं की आपत्तिजनक तस्वीरें वायरल होने के बाद पुरे जिले में तनाव की स्थिति पैदा हो गयी. सारण जिला जो हमेशा से अपनी धार्मिक सद्भावना के लिए जाना जाता है तनाव से ग्रस्त हो गया.  असामाजिक तत्त्वों की इस गन्दी हरकतों के कारण जिले का माहौल ही बिगड़ गया. तनाव की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने पूरे जिले में धारा 144 लगा दी. कुछ गिरफ्तारियां भी हुईं. जिलाधिकारी के आदेश पर कई दिनों तक जिले में इन्टरनेट सेवाओं पर भी रोक लगा दी गयी. आरोपी ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया तब जाकर मामला शांत हुआ.

नोटबंदी

साल की सबसे बड़ी और पुरे देश को चौकाने वाली खबर 8 नवम्बर 2016 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सम्बोधन के दौरान आई. नोटबंदी के इस ऐतिहासिक फैसले का आम जनता ने बखूबी स्वागत किया. छपरा में भी लोग लाइन में लगे दिखे. सालों से बढ़ते काले धन और इसके कुबेरों पर यह अब तक का सबसे बड़ा हमला था. सरकार ने बस एक ही झटके में 500 और हज़ार के नोटों को लीगल टेन्डर से हटा दिया. इसके बदले सरकार 500 और 2000 के नए नोट लेकर आई.  हालांकि लोगो की सुविधाओं का ख्याल रखते हुए कई सरकारी जगहों पर एक निश्चित समय सीमा तक 500 और हज़ार के नोट चलाने की छूट भी दी गई. पूरा देश कैश के लिए दिन-दिन भर बैंक की लाइनों लगा रहा. फैसला जो इतना साहसिक और देश की अर्थव्यस्था को बदलने वाला था. कैश की किल्लत से आम नागरिकों को बहुत परेशानी भी झेलनी पड़ी. एक तरफ जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नोटबंदी के फैसले को लेकर प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ़ की तो सालों से रिश्तों पर जमी बर्फ भी पिघलने लगी.

तो ये थी इस साल की कुछ खास ख़बरें, आशा करते हैं आने वाला नया साल नई उमंग और खुशियाँ लेकर आए.

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