किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज के उत्पादन और आपूर्ति के लिए सतत प्रयास कर रहा कृषि विवि सबौर

किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज के उत्पादन और आपूर्ति के लिए सतत प्रयास कर रहा कृषि विवि सबौर

भागलपुर: कोविड-19 महामारी की वर्तमान स्थिति में भी बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज के उत्पादन और आपूर्ति के लिए सतत प्रयास कर रहा है।गत वर्ष में उपलब्ध कराये गये बीजों की प्रजातियों के साथ-साथ धान की दो नई संसूचित किस्मों – सबौर संपन्न और सबौर हर्शित का बीज भी किसानों का अगामी खरीफ सीजन में उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
कुलपति डॉ आर के सोहाने ने बताया कि भारत सरकार और बिहार सरकार से विश्वविद्यालय द्वारा विकसित एवं भारत सरकार द्वारा अधिसूचित धान के 6 नई किस्मों के प्रजनक बीज उत्पादन के लिए मांगपत्र प्राप्त हुआ है। खरीफ 2021 में कुल 110 क्विंटल प्रजनक बीज कृषि विभाग, बिहार सरकार को बीज गुणन हेतु आपूर्ति की जा रही है, ताकि कृषि विभाग के माध्यम से राज्य के किसानों को समुचित मात्रा में आने वाले समय में बीज उपलब्ध हो सके।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के अधीन संचालित विभिन्न केन्द्रों पर विगत खरीफ वर्ष 2020-21 में खरीफ के विभिन्न फसलों का लगभग 6874 क्विंटल प्रजनक, आधार, प्रमाणित और सत्यापित बीज का उत्पादन किया है। जिसका बीज प्रसंस्करण का कार्य अंतिम चरण में है। किसानों को 25 मई से विश्वविद्यालय के निदेशालय बीज एवं प्रक्षेत्र, सबौर और इसके केन्द्रों में बीज बिक्री आरंभ कर दी जायेगी। इस वर्ष (खरीफ 2021) विश्वविद्यालय ने धान, उड़द, अरहर, मखाना और तिल का कुल 7668 प्रजनक आधार प्रमाणित और सत्यापित बीज का उत्पादन करने की योजना बनाई है, जो पिछले वर्ष के उत्पादन की तुलना में 11 प्रतिशत अधिक है। इस वर्ष विश्वविद्यालय धान की प्रमुख किस्मों जैसे सबौर श्री, सबौर संपन्न, सबौर दीप, सबौर अर्धजल, सबौर सुरभित, सबौर हर्षित, भागलपुर कतरनो, राजेंद्र महसूरी -1, राजेंद्र श्वेता, राजेंद्र कस्तूरी, राजेंद्र सुवासिनी, स्वर्ण सब -1 के साथ अरहर की आई. पी. ए. 203 प्रजाति एवं उड़द का आई. पी. यू. 2-43 तथा पी. यू. 35 के बीज किसानों का उपलब्ध कराने जा रही है। किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए, विभिन्न वर्ग के बीज मूल्य पिछले वर्ष के मूल्य के समान ही रखा गया है।
उपरोक्त किस्मों के बीज किसान अपना कर अपनी आमदनी के साथ-साथ राज्य एवं देश के खाद्यान्न के उत्पादन में वांछित निर्भरता प्रदान करने में अपनी सहभागिता सुनिश्चित कर सकते हैं।

 

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