नई दिल्ली, 13 मार्च (हि.स.)। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए तृणमूल कांग्रेस की अगुवाई में विपक्ष ने शुक्रवार को लोकसभा और राज्यसभा में प्रस्ताव दिया गया है। यह प्रस्ताव 10 पन्नों का है जिसमें 7 कारण गिनाए गए हैं, जिनके आधार पर ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव किया गया है। लोकसभा में दिए गए नोटिस में सदन के 130 सदस्यों और राज्यसभा में दिए गए नोटिस में 63 सदस्यों के हस्ताक्षर हैं। नियमों के कारण लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने शुक्रवार को मकर द्वार पर मीडिया से बातचीत में बताया कि उनकी पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए संसद में कानून के अनुसार नोटिस दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने मतदाता सूची से नाम हटाकर जनता को मताधिकार से वंचित किया है, जिसके लिए विपक्षी गठबंधन के साथ मिल कर यह कार्यवाही की जा रही है। आज का पंचांग | अधिक ज्येष्ठ कृष्णपक्ष त्रयोदशी संविधान के अनुच्छेद 324 (5) में मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने का प्रावधान किया गया है। इस अनुच्छेद के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए वैसी ही प्रक्रिया अपनाई जाएगी जो सुप्रीम कोर्ट के किसी जज को हटाने की होती है। ‘धमाल 4’ का ट्रेलर रिलीज, फिर कॉमेडी का धमाल मचाएगी अजय देवगन की पलटन मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) को हटाने के लिए लोकसभा के 100 सदस्यों या राज्यसभा के 50 सदस्यों को अध्यक्ष या चेयरमैन को नोटिस देना होता है। नोटिस स्वीकार होने पर इसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया जाता है। यदि समिति को आधार वैध लगते हैं तो प्रस्ताव पर विचार किया जाता है। इसे दोनों सदनों के विशेष बहुमत (सदन की कुल सदस्यता का बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई) से पारित होना आवश्यक है। Facebook और Instagram हुआ डाउन, परेशान रहे यूजर्स
खबर सुनें
▶ Press play to listen
⚠️ आपका ब्राउज़र Text-to-Speech को सपोर्ट नहीं करता।
नई दिल्ली, 13 मार्च (हि.स.)। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए तृणमूल कांग्रेस की अगुवाई में विपक्ष ने शुक्रवार को लोकसभा और राज्यसभा में प्रस्ताव दिया गया है। यह प्रस्ताव 10 पन्नों का है जिसमें 7 कारण गिनाए गए हैं, जिनके आधार पर ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव किया गया है। लोकसभा में दिए गए नोटिस में सदन के 130 सदस्यों और राज्यसभा में दिए गए नोटिस में 63 सदस्यों के हस्ताक्षर हैं। नियमों के कारण लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
विज्ञापन
तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने शुक्रवार को मकर द्वार पर मीडिया से बातचीत में बताया कि उनकी पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए संसद में कानून के अनुसार नोटिस दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने मतदाता सूची से नाम हटाकर जनता को मताधिकार से वंचित किया है, जिसके लिए विपक्षी गठबंधन के साथ मिल कर यह कार्यवाही की जा रही है।
संविधान के अनुच्छेद 324 (5) में मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने का प्रावधान किया गया है। इस अनुच्छेद के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए वैसी ही प्रक्रिया अपनाई जाएगी जो सुप्रीम कोर्ट के किसी जज को हटाने की होती है।
मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) को हटाने के लिए लोकसभा के 100 सदस्यों या राज्यसभा के 50 सदस्यों को अध्यक्ष या चेयरमैन को नोटिस देना होता है। नोटिस स्वीकार होने पर इसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया जाता है। यदि समिति को आधार वैध लगते हैं तो प्रस्ताव पर विचार किया जाता है। इसे दोनों सदनों के विशेष बहुमत (सदन की कुल सदस्यता का बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई) से पारित होना आवश्यक है।
chhapratoday.com सारण जिले से संचालित सबसे पहली और लोकप्रिय न्यूज़ वेबसाइट है। वर्ष 2012 से यह अपने पाठकों/दर्शकों तक हर दिन सबसे पहले छपरा, सारण से लेकर देश, विदेश के ब्रेकिंग न्यूज़, लोकल घटनाएं, रेलवे टाइमिंग अपडेट, सरकारी योजनाएं, स्कूल-कॉलेज जानकारी, ट्रेंडिंग वीडियो, संस्कृति, त्यौहार और शहर के विकास से जुड़े हर अपडेट करती आ रही है। हर खबर, सबसे पहले, सबसे सटीक और विश्वसनीयता के साथ केवल chhapratoday.com पर पढ़ें।भौगोलिक संदर्भ