Chhapra: भोजपुरी लोकसंस्कृति के कलाकार और नाटककार भिखारी ठाकुर की 138वीं जयंती जिले में समारोहपूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर शहर के प्रवेश द्वार तेलपा स्थित भिखारी ठाकुर चौक पर स्थापित उनकी प्रतिमा पर विधिवत माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। माल्यार्पण कार्यक्रम में बिहार विधानपार्षद प्रो. वीरेंद्र नारायण यादव, नगर निगम के आयुक्त सुनील कुमार पाण्डेय, डॉ. लालबाबू यादव, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के नेता अशोक कुशवाहा, कवि सत्येन्द्र दूरदर्शी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने भिखारी ठाकुर के सामाजिक और सांस्कृतिक योगदान को याद करते हुए उन्हें भोजपुरी लोकसंस्कृति का अमूल्य धरोहर बताया। आज का पंचांग | अधिक ज्येष्ठ कृष्णपक्ष त्रयोदशी इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिसमें शेखर सुमन, लक्ष्मी एवं अनीश अंकुर की टीम ने भिखारी ठाकुर के गीतों और रचनाओं पर आधारित कई लोकगीत प्रस्तुत किए। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मौजूद श्रोताओं ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम के उपरांत तीनों कलाकारों को अंगवस्त्र एवं भिखारी ठाकुर का स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। ‘धमाल 4’ का ट्रेलर रिलीज, फिर कॉमेडी का धमाल मचाएगी अजय देवगन की पलटन संगोष्ठी का हुआ आयोजन जयंती समारोह के दूसरे चरण में अपराह्न के समय भिखारी ठाकुर प्रेक्षागृह में “लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की प्रासंगिकता” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय प्रवेश डॉ. लालबाबू यादव ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भिखारी ठाकुर ने अपनी रचनाओं के माध्यम से ग्रामीण समाज की पीड़ा, स्त्री-विमर्श, प्रवासन, जातिगत भेदभाव और सामाजिक कुरीतियों को जिस साहस और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है। Facebook और Instagram हुआ डाउन, परेशान रहे यूजर्स वक्ताओं ने कहा कि भिखारी ठाकुर केवल लोक कलाकार नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना के वाहक थे। उन्होंने भोजपुरी भाषा और लोकनाट्य को नई पहचान दी और जनभाषा के माध्यम से समाज सुधार का मजबूत आधार तैयार किया। संगोष्ठी में उपस्थित वक्ताओं ने उनकी रचनाओं को आज की पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने भिखारी ठाकुर की विरासत को संरक्षित करने और लोकसंस्कृति के संवर्धन के लिए ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया। समारोह में साहित्यप्रेमी, कलाकार, बुद्धिजीवी और आम नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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Chhapra: भोजपुरी लोकसंस्कृति के कलाकार और नाटककार भिखारी ठाकुर की 138वीं जयंती जिले में समारोहपूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर शहर के प्रवेश द्वार तेलपा स्थित भिखारी ठाकुर चौक पर स्थापित उनकी प्रतिमा पर विधिवत माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
माल्यार्पण कार्यक्रम में बिहार विधानपार्षद प्रो. वीरेंद्र नारायण यादव, नगर निगम के आयुक्त सुनील कुमार पाण्डेय, डॉ. लालबाबू यादव, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के नेता अशोक कुशवाहा, कवि सत्येन्द्र दूरदर्शी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने भिखारी ठाकुर के सामाजिक और सांस्कृतिक योगदान को याद करते हुए उन्हें भोजपुरी लोकसंस्कृति का अमूल्य धरोहर बताया।
इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिसमें शेखर सुमन, लक्ष्मी एवं अनीश अंकुर की टीम ने भिखारी ठाकुर के गीतों और रचनाओं पर आधारित कई लोकगीत प्रस्तुत किए। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मौजूद श्रोताओं ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम के उपरांत तीनों कलाकारों को अंगवस्त्र एवं भिखारी ठाकुर का स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
जयंती समारोह के दूसरे चरण में अपराह्न के समय भिखारी ठाकुर प्रेक्षागृह में “लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की प्रासंगिकता” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय प्रवेश डॉ. लालबाबू यादव ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भिखारी ठाकुर ने अपनी रचनाओं के माध्यम से ग्रामीण समाज की पीड़ा, स्त्री-विमर्श, प्रवासन, जातिगत भेदभाव और सामाजिक कुरीतियों को जिस साहस और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
वक्ताओं ने कहा कि भिखारी ठाकुर केवल लोक कलाकार नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना के वाहक थे। उन्होंने भोजपुरी भाषा और लोकनाट्य को नई पहचान दी और जनभाषा के माध्यम से समाज सुधार का मजबूत आधार तैयार किया। संगोष्ठी में उपस्थित वक्ताओं ने उनकी रचनाओं को आज की पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने भिखारी ठाकुर की विरासत को संरक्षित करने और लोकसंस्कृति के संवर्धन के लिए ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया। समारोह में साहित्यप्रेमी, कलाकार, बुद्धिजीवी और आम नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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