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फिल्म समीक्षा : ‘भूत बंगला’ में अक्षय-प्रियदर्शन की जोड़ी नहीं जगा पाई पुराना जादू

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फिल्म: भूत बंगला

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कलाकार: अक्षय कुमार , तब्बू , वामिका गब्बी , राजपाल यादव

Tanishq Chhapra
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परेश रावल , मनोज जोशी , असरानी और मिथिला पालकर

लेखक: आकाश कौशिक , अभिलाष नायर और प्रियदर्शन

निर्देशक: प्रियदर्शन

निर्माता: एकता कपूर, शोभा कपूर, अक्षय कुमार

रेटिंग : ⭐⭐ 2/5

‘भूत बंगला’ के साथ सबसे बड़ी मुश्किल यही है कि जब भी प्रियदर्शन और अक्षय कुमार साथ आते हैं, उम्मीदें अपने आप बढ़ जाती हैं। हेरा फेरी, गरम मसाला और भागम भाग जैसी फिल्मों ने इस जोड़ी के लिए एक अलग स्तर तय किया था। लेकिन भूत बंगला देखते हुए बार-बार महसूस होता है कि फिल्म उस ऊंचाई तक पहुंचने की कोशिश करने के बजाय सिर्फ उसकी याद दिलाकर रह जाती है।

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कहानी

फिल्म की कहानी अर्जुन के इर्द-गिर्द घूमती है, जो लंदन से अपने पुश्तैनी महल मंगलपुर लौटता है ताकि अपनी बहन मीरा की शादी करवा सके। लेकिन यह महल कोई साधारण जगह नहीं है। गांव में पहले से इसकी डरावनी कहानियां मशहूर हैं। शादी की तैयारियों के बीच महल में अजीब घटनाएं शुरू होती हैं, रहस्यमयी आवाजें, अनहोनी और छिपे हुए राज। फिल्म शुरुआत में दिलचस्प लगती है, लेकिन आगे बढ़ते-बढ़ते खुद ही तय नहीं कर पाती कि उसे हॉरर बनना है या कॉमेडी। सबसे बड़ी कमी यह है कि पर्दे पर बहुत कुछ होता हुआ दिखता है, लेकिन उसके पीछे की वजह मजबूत तरीके से सामने नहीं आती।

अभिनय

अक्षय कुमार पूरी फिल्म को अपने कंधों पर संभालने की कोशिश करते हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग कई जगह काम करती है, लेकिन यह उनका बेहद परिचित अंदाज है जिसमें नया कुछ नहीं मिलता। राजपाल यादव फिल्म में आते ही कुछ हल्के और स्वाभाविक पल लेकर आते हैं। कई दृश्यों में वही फिल्म को संभालते नजर आते हैं। वामिका गब्बी सहज लगती हैं, लेकिन उनके किरदार को पूरी तरह विकसित नहीं किया गया। तब्बू दूसरे हिस्से में कहानी को गंभीरता देने की कोशिश करती हैं, लेकिन स्क्रिप्ट उन्हें असर छोड़ने का पूरा मौका नहीं देती।

सपोर्टिंग कास्ट

परेश रावल और मनोज जोशी जैसे कलाकार मौजूद हैं, लेकिन इस बार उनके हिस्से में याद रखने लायक ज्यादा कुछ नहीं आता। असरानी के कुछ दृश्य मुस्कान जरूर देते हैं, और उन्हीं पलों में फिल्म थोड़ी बेहतर महसूस होती है।

निर्देशन और लेखन

प्रियदर्शन कुछ दृश्यों में अपनी पुरानी पकड़ दिखाते हैं, लेकिन पूरी फिल्म एक लय नहीं बना पाती। स्क्रीनप्ले सबसे कमजोर कड़ी बनकर सामने आता है। स्लैपस्टिक कॉमेडी बार-बार दोहराई जाती है और दूसरे हिस्से में फिल्म अचानक गंभीर होकर भी प्रभाव नहीं छोड़ पाती। डायलॉग ठीक हैं, लेकिन उनमें वो धार नहीं है जो इस जोड़ी की फिल्मों की पहचान रही है। कई कॉमिक सीन लिखे हुए ज्यादा लगते हैं, सहज कम।

फाइनल वर्डिक्ट

‘भूत बंगला’ पूरी तरह खराब फिल्म नहीं है, लेकिन उतनी मजेदार भी नहीं है जितनी इस जोड़ी से उम्मीद थी। अगर आप सिर्फ हल्के मूड में बिना ज्यादा उम्मीद के फिल्म देखने जा रहे हैं, तो यह एक बार देखी जा सकती है। लेकिन अगर आप अक्षय-प्रियदर्शन की पुरानी जादुई कॉमेडी ढूंढने जाएंगे, तो निराशा हाथ लग सकती है।

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