जिला परिषद् चुनाव में दिखा ‘यारा’ समीकरण का दबदबा

जिला परिषद् चुनाव में दिखा ‘यारा’ समीकरण का दबदबा

सारण जिला परिषद् के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव में ‘यारा’ (यादव-राजपूत) समीकरण का दबदबा दिखा. एक ओर जहाँ अध्यक्ष पद पर राजपूत प्रत्याशी की जीत हुई वही दूसरी ओर उपाध्यक्ष पद पर यादव प्रत्याशी के जीत ने इस समीकरण को मजबूत किया है.

राजपूत जाति से आने वाली मढ़ौरा भाग-2 की पार्षद मीणा अरुण की जीत पहले से ही तय मानी जा रही थी. वे पिछले तीन बार से इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती आ रही है. मीणा अरुण अपने क्षेत्र में मिलनसार नेता के रूप में पहचानी जाती है. उनके ससुर गणेश सिंह कई बार अवारी पंचायत के मुखिया रह चुके है. इस बार परंपरा को उनके पति अरुण सिंह ने मुखिया का चुनाव जीत कर कायम रखा है.

वहीं उपाध्यक्ष पद पर जीत हासिल करने वाले सुनील राय सोनपुर के कद्दावर नेताओं में से एक है. वे लगातार चौथी बार सोनपुर से पार्षद चुने गए है. क्षेत्र में उनकी पहचान यादव नेता के रूप में है. विधानसभा चुनाव में उनका नाम सोनपुर से प्रत्याशी के रूप में आगे था पर किन्ही कारणों से उन्हें टिकट नहीं मिल सका. हालाकि क्षेत्र में वह सक्रिय रहे और जिला परिषद् चुनाव में चौथी बार जीत हासिल की..   

जिला परिषद् के इस जीत से एक ओर जहाँ महागठबंधन ने अपनी एकजुटता को प्रदर्शित कर दिया है वही दूसरी ओर विरोधी चारों खाने चित हो गए है. अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में मीणा अरुण के एक-तिहाई मत हासिल किया.. उन्हें 37 मत मिले जबकि उनकी प्रतिद्वंदी गीता सागर को मात्र 7 मत ही मिले जो एकजुटता को प्रदर्शित करने के लिए काफी है. वही उपाध्यक्ष पद की बात करें तो कमो-बेस ऐसा ही समीकरण देखने को मिला जहाँ सुनील राय को 36 और निवर्तमान उपाध्यक्ष विजय प्रताप सिंह चुन्नू को 10 मत मिले. 

इस जीत के साथ ही सारण में महागठबंधन एक बार फिर से सब पर भारी पड़ा है और उसके नेता राजनीति के महारथी साबित हुए है.

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