Chhapra: आस्था, श्रद्धा और परंपरा के महापर्व चैती छठ के तीसरे दिन मंगलवार को व्रतियों ने अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित किया। जिले के विभिन्न घाटों, तालाबों और नदियों के किनारे श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जहां डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए व्रती पूरे विधि-विधान के साथ जल में खड़े होकर पूजा-अर्चना करते नजर आए। छठ घाटों पर सुबह से ही साफ-सफाई और सजावट की विशेष व्यवस्था की गई थी। शाम होते-होते घाटों पर लोकगीतों और छठ गीतों की गूंज के बीच वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। व्रती महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सूप, दउरा और प्रसाद के साथ घाटों पर पहुंचीं और अस्त होते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना की। आज का पंचांग | शुद्ध ज्येष्ठ शुक्लपक्ष दशमी प्रशासन द्वारा भी सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। घाटों पर पुलिस बल की तैनाती, प्रकाश व्यवस्था तथा बैरिकेडिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। लखनऊ कोचिंग आग हादसे में पुलिस ने चार को किया गिरफ्तार, चार अफसर सस्पेंड चार दिवसीय इस अनुष्ठान का समापन बुधवार को उदीयमान भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित करने के साथ होगा। उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रती पारण कर व्रत का समापन करेंगे। कतर फैक्टरी दुर्घटना में 12 भारतीय नागरिकों की जान गई, दूतावास ने जताया शोक
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Chhapra: आस्था, श्रद्धा और परंपरा के महापर्व चैती छठ के तीसरे दिन मंगलवार को व्रतियों ने अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित किया। जिले के विभिन्न घाटों, तालाबों और नदियों के किनारे श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जहां डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए व्रती पूरे विधि-विधान के साथ जल में खड़े होकर पूजा-अर्चना करते नजर आए।
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छठ घाटों पर सुबह से ही साफ-सफाई और सजावट की विशेष व्यवस्था की गई थी। शाम होते-होते घाटों पर लोकगीतों और छठ गीतों की गूंज के बीच वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। व्रती महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सूप, दउरा और प्रसाद के साथ घाटों पर पहुंचीं और अस्त होते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना की।
प्रशासन द्वारा भी सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। घाटों पर पुलिस बल की तैनाती, प्रकाश व्यवस्था तथा बैरिकेडिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
चार दिवसीय इस अनुष्ठान का समापन बुधवार को उदीयमान भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित करने के साथ होगा। उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रती पारण कर व्रत का समापन करेंगे।
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