फिल्म: ‘बॉर्डर 2’ कलाकार: सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ, अहान शेट्टी, सोनम बाजवा, मोना सिंह, मेधा rana निर्देशक: अनुराग सिंह निर्माता: भूषण कुमार, कृष्ण कुमार रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐ (4/5) 1997 की आइकॉनिक क्लासिक ‘बॉर्डर’ की विरासत को आगे बढ़ाते हुए ‘बॉर्डर 2’ एक ऐसी देशभक्ति से भरपूर युद्ध फिल्म बनकर सामने आती है, जो न सिर्फ उम्मीदों पर खरी उतरती है, बल्कि कई स्तरों पर उनसे आगे निकलती है। फिल्म भारतीय सिनेमा में बड़े पैमाने की युद्ध फिल्मों की ताकत और प्रभाव को एक बार फिर साबित करती है। एक्शन, भावना और राष्ट्रप्रेम से लबरेज़ ‘बॉर्डर 2’ को इस तरह गढ़ा गया है कि यह सिंगल-स्क्रीन दर्शकों से लेकर मल्टीप्लेक्स ऑडियंस, सबको साथ लेकर चलती है। यह फिल्म दिखाती है कि तीन दशक बाद भी बॉलीवुड ईमानदारी, दृढ़ विश्वास और भव्यता के साथ जनभावनाओं से जुड़ी युद्ध फिल्में बना सकती है। कहानी फिल्म की कहानी कई मोर्चों पर एक साथ आगे बढ़ती है, अलग-अलग इलाकों में तैनात भारतीय सैनिक, अलग परिस्थितियां, लेकिन लक्ष्य एक ही: देश की रक्षा। यह दिखाया गया है कि पाकिस्तान ने विभिन्न दिशाओं से हमले की कोशिश की, मगर भारतीय सेना की रणनीति, सूझ-बूझ और अदम्य साहस के आगे हर प्रयास विफल हो गया। कथा में भावनात्मक गहराई और गंभीरता दोनों मौजूद हैं। यह फिल्म सिर्फ गोलियों और धमाकों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सैनिकों के भीतर चल रहे भय, विश्वास और कर्तव्यबोध को भी प्रभावी ढंग से उभारती है। कुछ दृश्य थोड़े लंबे लग सकते हैं, लेकिन वे कहानी की संवेदना को मजबूती देते हुए दर्शक को अंत तक बांधे रखते हैं। जनगणना प्री टेस्ट: डीसीओ ट्रेनर्स ने क्षेत्र में कराया स्व-गणना, छ्ह जुलाई से प्रगणक व पर्यवेक्षक करेंगे पूर्व परिक्षण अभिनय सनी देओल फिल्म की जान हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका जोश और स्क्रीन प्रेज़ेंस काबिल-ए-तारीफ है। वरुण धवन संयमित और प्रभावशाली नजर आते हैं, जबकि दिलजीत दोसांझ हवाई युद्ध दृश्यों में खास प्रभाव छोड़ते हैं। अहान शेट्टी का “शक्ति मां, शक्ति” पल दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देता है। महिला कलाकारों की भूमिकाएँ भावनात्मक आधार को मजबूती देती हैं। एनर्जी ड्रिंक’ के दावों पर एफएसएसएआई सख्त, कई बेवरेज ब्रांड्स को नोटिस संगीत और तकनीकी पक्ष संगीत फिल्म को बेहद खूबसूरती से निखारता है। “घर कब आओगे” एक सदाबहार देशभक्ति गीत बनने की पूरी क्षमता रखता है, जबकि “मिट्टी बेटे” गहरी भावनात्मक छाप छोड़ता है। “जाते हुए लम्हों” भले ही सीमित रूप में प्रयुक्त हो, लेकिन अहम क्षणों को प्रभावी ढंग से उभारता है। जो युद्ध की भयावहता और तीव्रता को शानदार दृश्यों के जरिए प्रभावशाली तरीके से दर्शाता है। खासकर बार-बार उभरने वाला “हिंदुस्तान मेरी जान”, फिल्म की ऊर्जा को लगातार चरम पर बनाए रखता है। अमरनाथ यात्रियों का पहला जत्था रवाना, स्टेशन पर लगा विशाल भंडारा निर्देशन निर्देशक अनुराग सिंह ने भव्यता और भावनाओं का संतुलित संयोजन रचते हुए एक प्रभावशाली और दर्शकों को बांधने वाली युद्ध गाथा प्रस्तुत की है। ‘बॉर्डर 2’ एक्शन, ड्रामा, संवेदना, देशभक्ति, संगीत और व्यापक मनोरंजन, हर स्तर पर प्रभाव छोड़ती है। खास तौर पर बड़े पर्दे पर भव्य अनुभव की तलाश करने वाले दर्शकों के लिए गढ़ा गया है। फाइनल टेक बॉर्डर 2 बड़े स्केल पर बनी एक भावनात्मक और दमदार वॉर फिल्म है। कुछ हिस्सों में इसकी लंबाई महसूस होती है और महिला किरदार सीमित हैं, लेकिन मजबूत अभिनय, ठोस निर्देशन और प्रभावशाली कहानी इसे जरूर देखने लायक बनाती है। फिल्म समाप्त होने के बाद यह दिल में गर्व, सम्मान और भारतीय सैनिकों के प्रति गहरा आदर छोड़ जाती है।
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1997 की आइकॉनिक क्लासिक ‘बॉर्डर’ की विरासत को आगे बढ़ाते हुए ‘बॉर्डर 2’ एक ऐसी देशभक्ति से भरपूर युद्ध फिल्म बनकर सामने आती है, जो न सिर्फ उम्मीदों पर खरी उतरती है, बल्कि कई स्तरों पर उनसे आगे निकलती है। फिल्म भारतीय सिनेमा में बड़े पैमाने की युद्ध फिल्मों की ताकत और प्रभाव को एक बार फिर साबित करती है। एक्शन, भावना और राष्ट्रप्रेम से लबरेज़ ‘बॉर्डर 2’ को इस तरह गढ़ा गया है कि यह सिंगल-स्क्रीन दर्शकों से लेकर मल्टीप्लेक्स ऑडियंस, सबको साथ लेकर चलती है। यह फिल्म दिखाती है कि तीन दशक बाद भी बॉलीवुड ईमानदारी, दृढ़ विश्वास और भव्यता के साथ जनभावनाओं से जुड़ी युद्ध फिल्में बना सकती है।
फिल्म की कहानी कई मोर्चों पर एक साथ आगे बढ़ती है, अलग-अलग इलाकों में तैनात भारतीय सैनिक, अलग परिस्थितियां, लेकिन लक्ष्य एक ही: देश की रक्षा। यह दिखाया गया है कि पाकिस्तान ने विभिन्न दिशाओं से हमले की कोशिश की, मगर भारतीय सेना की रणनीति, सूझ-बूझ और अदम्य साहस के आगे हर प्रयास विफल हो गया। कथा में भावनात्मक गहराई और गंभीरता दोनों मौजूद हैं। यह फिल्म सिर्फ गोलियों और धमाकों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सैनिकों के भीतर चल रहे भय, विश्वास और कर्तव्यबोध को भी प्रभावी ढंग से उभारती है। कुछ दृश्य थोड़े लंबे लग सकते हैं, लेकिन वे कहानी की संवेदना को मजबूती देते हुए दर्शक को अंत तक बांधे रखते हैं।
सनी देओल फिल्म की जान हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका जोश और स्क्रीन प्रेज़ेंस काबिल-ए-तारीफ है। वरुण धवन संयमित और प्रभावशाली नजर आते हैं, जबकि दिलजीत दोसांझ हवाई युद्ध दृश्यों में खास प्रभाव छोड़ते हैं। अहान शेट्टी का “शक्ति मां, शक्ति” पल दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देता है। महिला कलाकारों की भूमिकाएँ भावनात्मक आधार को मजबूती देती हैं।
संगीत फिल्म को बेहद खूबसूरती से निखारता है। “घर कब आओगे” एक सदाबहार देशभक्ति गीत बनने की पूरी क्षमता रखता है, जबकि “मिट्टी बेटे” गहरी भावनात्मक छाप छोड़ता है। “जाते हुए लम्हों” भले ही सीमित रूप में प्रयुक्त हो, लेकिन अहम क्षणों को प्रभावी ढंग से उभारता है। जो युद्ध की भयावहता और तीव्रता को शानदार दृश्यों के जरिए प्रभावशाली तरीके से दर्शाता है। खासकर बार-बार उभरने वाला “हिंदुस्तान मेरी जान”, फिल्म की ऊर्जा को लगातार चरम पर बनाए रखता है।
निर्देशक अनुराग सिंह ने भव्यता और भावनाओं का संतुलित संयोजन रचते हुए एक प्रभावशाली और दर्शकों को बांधने वाली युद्ध गाथा प्रस्तुत की है। ‘बॉर्डर 2’ एक्शन, ड्रामा, संवेदना, देशभक्ति, संगीत और व्यापक मनोरंजन, हर स्तर पर प्रभाव छोड़ती है। खास तौर पर बड़े पर्दे पर भव्य अनुभव की तलाश करने वाले दर्शकों के लिए गढ़ा गया है।
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बॉर्डर 2 बड़े स्केल पर बनी एक भावनात्मक और दमदार वॉर फिल्म है। कुछ हिस्सों में इसकी लंबाई महसूस होती है और महिला किरदार सीमित हैं, लेकिन मजबूत अभिनय, ठोस निर्देशन और प्रभावशाली कहानी इसे जरूर देखने लायक बनाती है। फिल्म समाप्त होने के बाद यह दिल में गर्व, सम्मान और भारतीय सैनिकों के प्रति गहरा आदर छोड़ जाती है।
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