हम किसी व्यक्ति को नहीं जानते, कांग्रेस से हमारा पुराना गठबंधन: तेजस्वी यादव

हम किसी व्यक्ति को नहीं जानते, कांग्रेस से हमारा पुराना गठबंधन: तेजस्वी यादव

हम किसी व्यक्ति को नहीं जानते, कांग्रेस से हमारा पुराना गठबंधन: तेजस्वी यादव

PATNA: पप्पू यादव को लेकर बिहार में छिड़ी सियासी बहस के बीच राजद ने उनका नोटिस लेने तक से इंकार कर दिया है. तेजस्वी यादव ने मीडिया के सामने कहा-हम किसी व्यक्ति को नहीं जानते. हमारा पुराना गठबंधन कांग्रेस पार्टी के साथ है और ये तो जनवरी में ही तय हो गया था कि कांग्रेस किन सीटों पर चुनाव लड़ेगी. चार दिनों तक दिल्ली में रहने के बाद तेजस्वी यादव पूरे परिवार के साथ पटना पहुंचे. पटना में मीडिया ने जब पप्पू यादव को लेकर सवाल पूछा तो तेजस्वी ने कहा-ये हमारा मामला नहीं है. हम किसी व्यक्ति को नहीं जानते. कांग्रेस से हमारा पुराना गठबंधन है और सीट शेयरिंग पर बातचीत काफी पहले से चल रही थी. ये तो जनवरी में ही तय हो गया था कि कांग्रेस को कौन सी सीटें मिलनी है

तेजस्वी यादव का कहना था कि कांग्रेस ने पूर्णिया सीट मांगी ही नहीं थी तो उसे सीट मिलने की बात कहां है. इस बयान का मतलब ये निकाला जा रहा है कि पप्पू को कांग्रेस ने ही गच्चा दे दिया है. वैसे पप्पू यादव रोज ये दावा कर रहे हैं कि वे राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने की मुहिम चला रहे हैं. लेकिन कांग्रेस को उन पर भरोसा नहीं है. तेजस्वी के बयान के यही मायने निकाले जा रहे हैं.

वैसे भी पप्पू यादव के कांग्रेस में शामिल होने से पार्टी के कई नेता खफा हैं. पप्पू यादव जब अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर रहे थे तो उस कार्यक्रम से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह दूर रहे. अखिलेश प्रसाद सिंह उसके बाद भी पप्पू यादव को लेकर कुछ भी बोलने से बचते रहे. वहीं, कांग्रेस के एक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अनिल शर्मा ने तो खुलकर पप्पू यादव पर हमला बोला. उन्होंने अपनी पार्टी पर कटाक्ष करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा था कि अब पप्पू के चप्पू से राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनेंगे.

सूत्र बताते हैं कि राजद से सीट शेयरिंग के आखिरी दौर की बातचीत में भी कांग्रेस ने पूर्णिया सीट को लेकर कोई जोर नहीं लगाया था. कांग्रेस ने सारी ताकत कटिहार सीट के लिए लगायी थी, जहां से तारिक अनवर को चुनाव लड़ना है. कांग्रेस के एक सीनियर लीडर ने बताया कि हमलोगों को हर हाल में कटिहार सीट चाहिये थी, लेकिन लालू प्रसाद यादव ने उस पर अडंगा लगा दिया था. ऐसे में पार्टी ने पूरी ताकत लगा कर कटिहार सीट हासिल कर ली.

कांग्रेसी नेता ने बताया कि सीट शेयरिंग पर बातचीत के दौरान पूर्णिया सीट पर चर्चा जरूर हुई लेकिन उस पर कोई जोर नहीं डाला गया. जब राजद ने जेडीयू की सीटिंग विधायक बीमा भारती से इस्तीफा दिलवा कर उन्हें पूर्णिया से टिकट दे दिया था तो फिर वहां राजद से बहस करने को कोई मतलब नहीं बचा था. लिहाजा कांग्रेस ने पप्पू यादव पर फोकस करने के बजाय बिहार में 9 लोकसभा सीट लेने की रणनीति अपनायी थी.

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