अहमदाबाद 06 जून (हि.स.)। गुजरात की आर्थिक राजधानी अहमदाबाद में पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय नकली नोट के रैकेट का पर्दाफाश करते हुए 28.94 लाख रुपये की फर्जी भारतीय मुद्रा बरामद की। इस मामले में छह आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। खास बात यह है कि यूपी और राजस्थान तक फैले इस पूरे नेटवर्क का खुलासा किसी आर्थिक अपराध की जांच से नहीं बल्कि एक हत्या के मामले की जांच के दौरान हुआ। अहमदाबाद शहर पुलिस के जोन-8 के डीसीपी मयूर पाटिल ने शनिवार को मीडिया को बताया कि वटवा पुलिस थाने में दर्ज एक हत्या के मामले की जांच के दौरान पुलिस को नकली नोटों के कारोबार से जुड़े अहम सुराग मिले थे। जांच आगे बढ़ी तो सामने आया कि इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड इमरान सब्बीर सिंधा था, जिसने वटवा स्थित सतेज होम्स में एक मकान किराए पर लेकर नकली नोट छापने का पूरा सेटअप तैयार किया था। पुलिस जांच के अनुसार इमरान सिंधा ने मार्च 2026 से कंप्यूटर, कलर प्रिंटर, लैपटॉप और अन्य आधुनिक उपकरणों की मदद से 500-500 रुपये के नकली नोट छापने का काम शुरू किया था। शुरुआती जांच में पता चला है कि गिरोह अब तक लगभग 60 लाख रुपये की फेस वैल्यू वाली नकली नोटें तैयार कर चुका था और उन्हें बाजार में असली नोटों की तरह खपाने का प्रयास कर रहा था। Sri Lanka Test Series | भारतीय टीम घोषित, सारांश जैन को पहली बार मौका, रवींद्र जडेजा की वापसी मामले में उस समय नया मोड़ आया जब मुख्य आरोपित इमरान सिंधा की किसी कारणवश मृत्यु हो गई। उसके बाद गिरोह के अन्य सदस्य पुलिस की पकड़ से बचने के लिए नकली नोटें, प्रिंटिंग मशीनें, लैपटॉप और अन्य उपकरण लेकर विभिन्न राज्यों में फरार हो गए। इसके बाद वटवा पुलिस और लोकल क्राइम ब्रांच (एलसीबी) जोन-8 की अलग-अलग टीमों का गठन किया गया और तकनीकी निगरानी के जरिए आरोपियों की तलाश शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस को उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के महेरा चौधरी गांव में महत्वपूर्ण सुराग मिले। यहां आरोपित चंद्रमोहन शर्मा के घर पर छापा मारकर बड़ी मात्रा में नकली नोटें, लैपटॉप और अन्य सामग्री बरामद की गई। राजस्थान के धौलपुर में आरोपी वीरेंद्र उर्फ वीरू बघेल के एक रिश्तेदार के घर से कलर प्रिंटर और नकली नोट छापने में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण जब्त किए गए। Commonwealth Games 2026 | अजय बाबू ने भारोत्तोलन में जीता रजत पदक पुलिस ने इस मामले में बिहार निवासी सूरज सहानी (20), रविकुमार शाह (23), उत्तर प्रदेश निवासी वीरू बघेल (25), चंद्रमोहन शर्मा (23), एक किशोर तथा बनासकांठा निवासी मेराज रबारी(49) को गिरफ्तार किया है। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मेराज रबारी की संलिप्तता सामने आने के बाद उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस रिकॉर्ड की जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह के कई सदस्य पहले भी नकली नोटों के मामलों में पकड़े जा चुके हैं। मृतक इमरान सिंधा का नाम पहले सूरत के फेक करेंसी मामले में सामने आया था, जबकि मेराज रबारी को भी पूर्व में अदालत द्वारा नकली मुद्रा मामले में दोषी ठहराया जा चुका है। Commonwealth Games 2026 | सर्वेश कुशारे ने ऊंची कूद में जीता रजत, एथलेटिक्स में भारत का पहला पदक डीसीपी मयूर पाटिल ने बताया कि पुलिस ने अब तक 28.94 लाख रुपये की नकली चलनी नोटें जब्त की हैं। फिलहाल पूरे नेटवर्क, इसकी सप्लाई चेन, वित्तीय लेन-देन और अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की गहन जांच जारी है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अब तक कितनी नकली मुद्रा बाजार में खपाई जा चुकी है और इस गिरोह के तार देश के किन-किन राज्यों से जुड़े हुए हैं।
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अहमदाबाद 06 जून (हि.स.)। गुजरात की आर्थिक राजधानी अहमदाबाद में पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय नकली नोट के रैकेट का पर्दाफाश करते हुए 28.94 लाख रुपये की फर्जी भारतीय मुद्रा बरामद की। इस मामले में छह आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। खास बात यह है कि यूपी और राजस्थान तक फैले इस पूरे नेटवर्क का खुलासा किसी आर्थिक अपराध की जांच से नहीं बल्कि एक हत्या के मामले की जांच के दौरान हुआ।
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अहमदाबाद शहर पुलिस के जोन-8 के डीसीपी मयूर पाटिल ने शनिवार को मीडिया को बताया कि वटवा पुलिस थाने में दर्ज एक हत्या के मामले की जांच के दौरान पुलिस को नकली नोटों के कारोबार से जुड़े अहम सुराग मिले थे। जांच आगे बढ़ी तो सामने आया कि इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड इमरान सब्बीर सिंधा था, जिसने वटवा स्थित सतेज होम्स में एक मकान किराए पर लेकर नकली नोट छापने का पूरा सेटअप तैयार किया था।
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पुलिस जांच के अनुसार इमरान सिंधा ने मार्च 2026 से कंप्यूटर, कलर प्रिंटर, लैपटॉप और अन्य आधुनिक उपकरणों की मदद से 500-500 रुपये के नकली नोट छापने का काम शुरू किया था। शुरुआती जांच में पता चला है कि गिरोह अब तक लगभग 60 लाख रुपये की फेस वैल्यू वाली नकली नोटें तैयार कर चुका था और उन्हें बाजार में असली नोटों की तरह खपाने का प्रयास कर रहा था।
मामले में उस समय नया मोड़ आया जब मुख्य आरोपित इमरान सिंधा की किसी कारणवश मृत्यु हो गई। उसके बाद गिरोह के अन्य सदस्य पुलिस की पकड़ से बचने के लिए नकली नोटें, प्रिंटिंग मशीनें, लैपटॉप और अन्य उपकरण लेकर विभिन्न राज्यों में फरार हो गए। इसके बाद वटवा पुलिस और लोकल क्राइम ब्रांच (एलसीबी) जोन-8 की अलग-अलग टीमों का गठन किया गया और तकनीकी निगरानी के जरिए आरोपियों की तलाश शुरू की गई।
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जांच के दौरान पुलिस को उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के महेरा चौधरी गांव में महत्वपूर्ण सुराग मिले। यहां आरोपित चंद्रमोहन शर्मा के घर पर छापा मारकर बड़ी मात्रा में नकली नोटें, लैपटॉप और अन्य सामग्री बरामद की गई। राजस्थान के धौलपुर में आरोपी वीरेंद्र उर्फ वीरू बघेल के एक रिश्तेदार के घर से कलर प्रिंटर और नकली नोट छापने में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण जब्त किए गए।
पुलिस ने इस मामले में बिहार निवासी सूरज सहानी (20), रविकुमार शाह (23), उत्तर प्रदेश निवासी वीरू बघेल (25), चंद्रमोहन शर्मा (23), एक किशोर तथा बनासकांठा निवासी मेराज रबारी(49) को गिरफ्तार किया है। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मेराज रबारी की संलिप्तता सामने आने के बाद उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस रिकॉर्ड की जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह के कई सदस्य पहले भी नकली नोटों के मामलों में पकड़े जा चुके हैं। मृतक इमरान सिंधा का नाम पहले सूरत के फेक करेंसी मामले में सामने आया था, जबकि मेराज रबारी को भी पूर्व में अदालत द्वारा नकली मुद्रा मामले में दोषी ठहराया जा चुका है।
डीसीपी मयूर पाटिल ने बताया कि पुलिस ने अब तक 28.94 लाख रुपये की नकली चलनी नोटें जब्त की हैं। फिलहाल पूरे नेटवर्क, इसकी सप्लाई चेन, वित्तीय लेन-देन और अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की गहन जांच जारी है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अब तक कितनी नकली मुद्रा बाजार में खपाई जा चुकी है और इस गिरोह के तार देश के किन-किन राज्यों से जुड़े हुए हैं।
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