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बिहार में लीची की फसल को खतरा, कृषि मंत्रालय ने किया टास्क फोर्स का गठन

CT DESK
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नई दिल्ली, 08 मई (हि.स.)। बिहार में लीची की फसल पर मंडरा रहे “लीची स्टिंग बग” के खतरे को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। फसल को हो रहे भारी नुकसान का मामला अब केंद्र सरकार तक पहुंच गया है। इसको लेकर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने टास्क फोर्स का गठन किया है जो लीची स्टिंग बग के प्रकोप का आकलन करेगी।

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मुजफ्फरपुर के राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक को कार्यबल का अध्यक्ष बनाया गया है। इस कार्यबल में नौ सदस्य बनाए गए हैं जिसमें बिहार सरकार के उद्यान-सह-बिहार राज्य बागवानी मिशन के निदेशक, बिहार सरकार द्वारा नामित उनके प्रतिनिधि, कृषि विभाग के निदेशक , बिहार सरकार द्वारा नामित उनके प्रतिनिधि, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कीट वैज्ञानिक, समस्तीपुर द्वारा नामित उनके प्रतिनिधि, प्रधान वैज्ञानिक (कीट विज्ञान), बिहार कृषि विश्वविद्यालय भागलपुर द्वारा नामित उनके प्रतिनिधि सदस्य, एकीकृत बागवानी विकास मिशन द्वारा नामित उनके प्रतिनिधि सदस्य, डॉ. जयपाल सिंह चौधरी (वैज्ञानिक) एवं अन्य नाम शामिल हैं।

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दरअसल, सात मई को शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में आईसीएआर – सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर सबट्रॉपिकल हॉटीकल्चर लखनऊ में आयोजित कृषक संवाद कार्यक्रम के दौरान बिहार के लीची उत्पादक जिलों से आए किसानों ने इस समस्या को प्रमुखता से उठाया। किसानों ने बताया कि लीची स्टिंग बग के प्रकोप से फलों की गुणवत्ता खराब हो रही है और उत्पादन में भी भारी गिरावट देखने को मिल रही है। इससे बागवानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।

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मामले की गंभीरता को देखते हुए लीची स्टिंग बग के प्रकोप का आकलन करने के लिए विशेषज्ञ कार्यबल गठित करने की मांग की गई है। किसानों का कहना है कि वैज्ञानिक अध्ययन और प्रभावी नियंत्रण उपायों के बिना इस समस्या से निपटना मुश्किल होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो बिहार के लीची उत्पादन और किसानों की आय पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।

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