Aug 18, 2017 - Fri
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18 Aug 2017      

Home संपादकीय आपकी कलम से

आई रे! आई रे! आई रे!
आई फिर रंग-बिरंगी होली।
रंग खिले,गुलाल उड़े,
खुशियों से भर गई झोली।।
आई रंग-बिरंगी होली……..
बच्चे नाचें पहन मुखौटा,
देख लागें भूत-पिशाच।
गीले-शिकवे भूली दुनिया,
भूल गए सारे झूठ-साच।।
आई  रंग-बिरंगी होली…….
क्या युवा,क्या बूढ़े,
सबकी है अपनी टोली।
मची रे! मची हुड़दंग,
पिचकारी से चलती मानो गोली।।
आई रंग-बिरंगी होली……..
सब गा रहे जोगीरा,
हो शहर या वो गांव।
आई ये गज़ब की बहार,
भूल गए सब धूप-छांव।।
आई रंग-बिरंगी होली……..
दिल खिलें,दिल मिलें,
हो गए सब दिल जवां।
पकवानों की बारिश हुई,
मस्ती चढ़ी परवां।।
आई रंग-बिरंगी होली……..
आई रंग-बिरंगी होली……..
लेखक के निजी विचार है.
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 लेखक
 सन्नी कुमार सिन्हा
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