Chhapra: गोण्डा कचहरी से गोल्डनगंज तक प्रस्तावित तीसरी एवं चौथी रेलवे लाइन परियोजना को लेकर शुक्रवार को जिला पदाधिकारी, सारण की अध्यक्षता में समाहर्ता कक्ष में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में भारतीय रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एनएचएआई, जल संसाधन विभाग, विद्युत विभाग, लघु सिंचाई विभाग, अनुमंडल पदाधिकारी सदर, भूमि सुधार उपसमाहर्ता सह जिला भू-अर्जन पदाधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान रेलवे अधिकारियों ने परियोजना के प्रस्तावित एलाइनमेंट एवं प्रारंभिक खाके की विस्तृत जानकारी साझा की। यह महत्वाकांक्षी अंतर्प्रांतीय रेल परियोजना उत्तर प्रदेश और बिहार के कुल सात जिलों को जोड़ने वाली है। परियोजना की कुल लंबाई 378.742 किलोमीटर निर्धारित की गई है, जिसमें उत्तर प्रदेश के पांच तथा बिहार के दो जिले सीवान और सारण शामिल हैं। सारण जिले में इस रेलखंड की लंबाई लगभग 49 किलोमीटर होगी।
परियोजना के तहत रेल लाइन के विस्तार के लिए कई महत्वपूर्ण संरचनाओं का निर्माण प्रस्तावित है। वर्तमान डिजाइन के अनुसार 16 रोड अंडर ब्रिज (RUB), 14 बड़े पुल, 93 छोटे पुल तथा एक रेल ओवर रेल संरचना का निर्माण किया जाएगा।
जिला पदाधिकारी ने परियोजना की गंभीरता और भविष्य की आवश्यकता को देखते हुए अनुमंडल पदाधिकारी सदर, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी एवं संबंधित तकनीकी विभागों को रेलवे अधिकारियों के साथ संयुक्त रूप से पूरे एलाइनमेंट का भौतिक सत्यापन करने का निर्देश दिया। साथ ही, प्रस्तावित आरओबी और आरयूबी स्थलों का स्थलीय निरीक्षण कर आवश्यक रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया।
समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि चैनवा से गोल्डनगंज तक मौजूदा रेलवे लाइन के विस्तार के लिए नए सिरे से भू-अर्जन की आवश्यकता होगी। वहीं, घनी आबादी एवं तकनीकी चुनौतियों से बचने के उद्देश्य से कोपा से गोल्डनगंज तक नई बाईपास लाइन बनाने के प्रस्ताव पर भी विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में जिला पदाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों एनएचएआई, पथ निर्माण विभाग, जल संसाधन, विद्युत एवं लघु सिंचाई विभाग को रेलवे अधिकारियों के साथ संयुक्त सर्वे कर प्रस्तावित एलाइनमेंट में आने वाली विभागीय संरचनाओं की सूची तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित रेल परियोजना के कारण राष्ट्रीय राजमार्गों, ग्रामीण सड़कों, बिजली आपूर्ति तथा सिंचाई व्यवस्था पर किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं होनी चाहिए।
सभी विभागों को त्वरित गति से अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है, ताकि परियोजना से संबंधित आगामी कार्रवाई समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जा सके।





















