नई दिल्ली, 18 अप्रैल (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर राष्ट्र को संबोधित किया। संसद एवं राज्य विधानमंडल में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने वाला संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित न हो पाने के एक दिन बाद उनका यह संबोधन हुआ। वेनेजुएला भूकंप : भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ, ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ के तहत राहत सामग्री लेकर रवाना हुए वायुसेना के दो विमान प्रधानमंत्री के संबोधन में महिला आरक्षण के मुद्दे और संसद में हुई घटनाओं पर विस्तार से चर्चा की, जहां विपक्षी दलों ने शुक्रवार को संविधान संशोधन विधेयक के खिलाफ मतदान किया था। इस विधेयक में परिसीमन के बाद 2029 के संसदीय चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए लोकसभा सीटों को बढ़ाने का प्रावधान प्रस्तावित था। सद्दगुरु जग्गी वासुदेव पटना तीन दिवसीय दौरे पर पटना पहुंचे, मुख्यमंत्री ने किया स्वागत राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को समायोजित करने के लिए सीटों की संख्या बढ़ाई जानी थी। इस विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी, लेकिन राजग सरकार आवश्यक बहुमत नहीं जुटा सकी। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा शुक्रवार रात लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक के समर्थन में 298 और विरोध में 230 सदस्यों ने मतदान किया। कुल 528 सदस्यों ने मतदान में भाग लिया था।
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नई दिल्ली, 18 अप्रैल (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर राष्ट्र को संबोधित किया। संसद एवं राज्य विधानमंडल में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने वाला संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित न हो पाने के एक दिन बाद उनका यह संबोधन हुआ।
प्रधानमंत्री के संबोधन में महिला आरक्षण के मुद्दे और संसद में हुई घटनाओं पर विस्तार से चर्चा की, जहां विपक्षी दलों ने शुक्रवार को संविधान संशोधन विधेयक के खिलाफ मतदान किया था। इस विधेयक में परिसीमन के बाद 2029 के संसदीय चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए लोकसभा सीटों को बढ़ाने का प्रावधान प्रस्तावित था।
राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को समायोजित करने के लिए सीटों की संख्या बढ़ाई जानी थी। इस विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी, लेकिन राजग सरकार आवश्यक बहुमत नहीं जुटा सकी।
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