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पाँच भाषाओं के शब्दकोश के रचनाकार प्रख्यात शिक्षाविद् पं० बद्री नारायण पाण्डेय का निधन

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Chhapra: अपनी साहित्य साधना के लिए प्रख्यात शिक्षाविद्, पाँच भाषाओं के शब्दकोश के रचनाकार पं० बद्री नारायण पाण्डेय का शुक्रवार को 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं।

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उनके निधन की सूचना पर शिक्षा और साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई। शहर के डॉ हरदन बसु लेन स्थित उनके आवास पर पहुँच लोगों ने उनके अंतिम दर्शन किए।

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उनके पुत्र कृष्णानन्द पाण्डेय उर्फ राजू ने बताया कि विगत कुछ दिनों से वे बीमार थे। छपरा में इलाजरत थें, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने के कारण उन्हें शुक्रवार की शाम पटना ले जाया गया जहां इलाज के क्रम में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार शनिवार को किया जाएगा।

उनके निधन पर समाजसेवी धर्मनाथ पिंटू ने संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि प्रख्यात शिक्षाविद बद्रीनारायण पांडेय ने राजेन्द्र कॉलेजिएट, मिश्री लाल आर्य कन्या उच्च विद्यालय में शिक्षक के रूप में कार्य किये थे। जिन्होंने पाँच भाषाओं में डिक्शनरी लिखी थी, बहुत सारे पुरस्कारों से पुरस्कृत थें, उनका निधन शिक्षा के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति है।

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वहीं उनके छात्र रहे और राजेन्द्र महाविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के पूर्व प्राध्यापक प्रो कुमार वीरेश्वर सिन्हा ने कहा कि हमारे पंडित जी और छपरा के सर्वप्रिय व्यक्तित्व, पांडित्य के एक स्वर्णिम कलश, कई भाषाओं के ज्ञानी और अँग्रेजी, जर्मन, फारसी, संस्कृत और हिंदी भाषाओं के विश्वकोश के संकलनकर्ता, पंडित बद्री नारायण पांडेय हमारे बीच नहीं रहे। पंडित जी मेरे बचपन के, और पहले अकादमिक गुरू थे, और अपनी अंग्रेजी का प्रारंभिक ज्ञान मैंने उन्हीं से प्राप्त किया था। वे केवल मेरे गुरू ही नहीं परिवार के सदस्य और शुभचिंतक थे। पंडित जी का यूं छोड़कर जाना बहुत ही दुःखद है। मेरे बडे भाई, मेरे पहले गुरू मुझे छोड़कर चले गये। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें।

शिक्षक और संस्कार भारती के संयोजक राजेश चंद्र मिश्र ने उन्हें याद करते हुए कहा कि पंचभाषा (संस्कृत, पर्सियन, जर्मन, अंग्रेजी एवं हिन्दी) शब्दकोश के रचनाकार सरस्वती पुत्र बदरी नारायण पाण्डेय का निधन अत्यंत दुखदायी है। वे अपनी साहित्य साधना के लिए युगों तक याद किए जाएंगे।

पं० बद्री नारायण पाण्डेय ने अपनी प्रारम्भिक पढ़ाई जिला स्कूल से की थी, उन्होंने 1955 में मैट्रिक की परीक्षा पास की थी। इसके बाद राजेन्द्र महाविद्यालय से 1959 में उन्होंने कला संकाय से स्नातक की परीक्षा पास की जिसमें Distinction पाने वाले वह एक मात्र छात्र थें। वर्ष 1988 में उन्होंने बिहार विश्वविद्यालय से संस्कृत विषय में स्नातकोत्तर किया।

उन्होंने अपने शिक्षण कार्य की शुरुआत 1960 में सोहन संस्कृत उच्च विद्यालय से की। इसके बाद उन्होंने राजेन्द्र कॉलेजिएट और मिश्री लाल आर्य कन्या उच्च विद्यालय में अपनी सेवाएं दी, जहां से 28 फरवरी 1998 को वे सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्त होने के बाद भी वे लगातार स्वाध्याय, साहित्य सृजन में लगे रहे। उनके निधन से जो रिक्ति आई है उसे भरना मुश्किल है।

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