नई दिल्ली, 04 मई (हि.स.)। अस्पतालों में बढ़ते बिजली लोड और ऑक्सीजन-समृद्ध वातावरण के कारण आग लगने का खतरा अधिक होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अग्नि सुरक्षा से संबंधित नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन नए दिशा-निर्देशों का उद्देश्य विशेष रूप से आपात स्थितियों के दौरान मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। नई दिशा-निर्देशों में मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए उन्नत और व्यवस्थित रणनीतियां शामिल की गई हैं। खासतौर पर गंभीर मरीजों, आईसीयू, एनआईसीयू और अन्य संवेदनशील वार्डों के लिए अलग से चरणबद्ध निकासी की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। इसके अलावा इन दिशानिर्देशों में फायर सेफ्टी गवर्नेंस को मजबूत करने, नियमित ऑडिट सुनिश्चित करने और अस्पताल स्टाफ को बेहतर प्रशिक्षण देने पर विशेष ध्यान दिया गया है। सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने विज्ञप्ति जारी कर बताया कि “नेशनल गाइडलाइंस ऑन फायर एंड लाइफ सेफ्टी इन हेल्थकेयर फैसिलिटीज (2026)” अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि इन दिशानिर्देशों में खास तौर पर गंभीर और चलने-फिरने में असमर्थ मरीजों के लिए फेज़्ड इवैक्युएशन (चरणबद्ध निकासी) की रणनीति शामिल की गई है। वैभव सूर्यवंशी बने भारतीय टीम के लिए चुने जाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी नई गाइडलाइंस में आईसीयू, एनआईसीयू (नवजात गहन चिकित्सा इकाई), पीआईसीयू (बाल गहन चिकित्सा इकाई) और ऑपरेशन थिएटर जैसे हाई-रिस्क क्षेत्रों के लिए विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल तय किए गए हैं, ताकि इन संवेदनशील स्थानों पर किसी भी आपात स्थिति में तेजी और सुरक्षित तरीके से प्रतिक्रिया दी जा सके। उन्होंने सभी राज्यों और स्वास्थ्य सुविधाओं से आग्रह किया कि वे नियमित रूप से अग्नि सुरक्षा ऑडिट विवरण आईएचआईपी पोर्टल पर अपलोड करें, यह देखते हुए कि ऐसी प्रथाएं अनुपालन को संस्थागत रूप देंगी और सुरक्षा मानकों को बनाए रखने के लिए एक निरंतर अनुस्मारक के रूप में कार्य करेंगी। आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 शृंखला के लिए भारतीय टीम घोषित, श्रेयस अय्यर बने कप्तान उल्लेखनीय है कि यह संशोधित फ्रेमवर्क 2020 की गाइडलाइंस का अपडेट है और इसे कई विशेषज्ञ संस्थानों के सहयोग से तैयार किया गया है। इनमें फायर सर्विसेज, सिविल डिफेंस और होम गार्ड्स के महानिदेशालय, भारतीय मानक ब्यूरो , स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर और एम्स जैसे प्रमुख संस्थान शामिल हैं। अंडर-18 एशिया कप : जापान को 4-1 से हराकर भारतीय पुरुष हॉकी टीम बनी चैंपियन इन नए दिशानिर्देशों से अस्पतालों में आग से जुड़े जोखिमों को कम करने, आपातकालीन तैयारी को बेहतर बनाने और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी। इसके साथ केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 4 से 10 मई तक देशभर में फायर सेफ्टी वीक मनाने की शुरुआत की है। इस अभियान का उद्देश्य अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में आग से सुरक्षा को मजबूत करना और जागरूकता बढ़ाना है।
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नई दिल्ली, 04 मई (हि.स.)। अस्पतालों में बढ़ते बिजली लोड और ऑक्सीजन-समृद्ध वातावरण के कारण आग लगने का खतरा अधिक होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अग्नि सुरक्षा से संबंधित नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन नए दिशा-निर्देशों का उद्देश्य विशेष रूप से आपात स्थितियों के दौरान मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। नई दिशा-निर्देशों में मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए उन्नत और व्यवस्थित रणनीतियां शामिल की गई हैं। खासतौर पर गंभीर मरीजों, आईसीयू, एनआईसीयू और अन्य संवेदनशील वार्डों के लिए अलग से चरणबद्ध निकासी की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। इसके अलावा इन दिशानिर्देशों में फायर सेफ्टी गवर्नेंस को मजबूत करने, नियमित ऑडिट सुनिश्चित करने और अस्पताल स्टाफ को बेहतर प्रशिक्षण देने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
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सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने विज्ञप्ति जारी कर बताया कि “नेशनल गाइडलाइंस ऑन फायर एंड लाइफ सेफ्टी इन हेल्थकेयर फैसिलिटीज (2026)” अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि इन दिशानिर्देशों में खास तौर पर गंभीर और चलने-फिरने में असमर्थ मरीजों के लिए फेज़्ड इवैक्युएशन (चरणबद्ध निकासी) की रणनीति शामिल की गई है।
नई गाइडलाइंस में आईसीयू, एनआईसीयू (नवजात गहन चिकित्सा इकाई), पीआईसीयू (बाल गहन चिकित्सा इकाई) और ऑपरेशन थिएटर जैसे हाई-रिस्क क्षेत्रों के लिए विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल तय किए गए हैं, ताकि इन संवेदनशील स्थानों पर किसी भी आपात स्थिति में तेजी और सुरक्षित तरीके से प्रतिक्रिया दी जा सके। उन्होंने सभी राज्यों और स्वास्थ्य सुविधाओं से आग्रह किया कि वे नियमित रूप से अग्नि सुरक्षा ऑडिट विवरण आईएचआईपी पोर्टल पर अपलोड करें, यह देखते हुए कि ऐसी प्रथाएं अनुपालन को संस्थागत रूप देंगी और सुरक्षा मानकों को बनाए रखने के लिए एक निरंतर अनुस्मारक के रूप में कार्य करेंगी।
उल्लेखनीय है कि यह संशोधित फ्रेमवर्क 2020 की गाइडलाइंस का अपडेट है और इसे कई विशेषज्ञ संस्थानों के सहयोग से तैयार किया गया है। इनमें फायर सर्विसेज, सिविल डिफेंस और होम गार्ड्स के महानिदेशालय, भारतीय मानक ब्यूरो , स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर और एम्स जैसे प्रमुख संस्थान शामिल हैं।
इन नए दिशानिर्देशों से अस्पतालों में आग से जुड़े जोखिमों को कम करने, आपातकालीन तैयारी को बेहतर बनाने और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी। इसके साथ केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 4 से 10 मई तक देशभर में फायर सेफ्टी वीक मनाने की शुरुआत की है। इस अभियान का उद्देश्य अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में आग से सुरक्षा को मजबूत करना और जागरूकता बढ़ाना है।
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