कानपुर, 28 नवम्बर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के कानपुर से तीन बार सांसद व केन्द्र की मनमोहन सरकार में कोयला मंत्री रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्रीप्रकाश जायसवाल का 81 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह काफी समय से बीमार चल रहे थे और शुक्रवार को उनका स्वास्थ्य ज्यादा खराब हो गया। परिजन आनन—फानन में उन्हे रावतपुर स्थित हृदय रोग संस्थान (कार्डियोलॉजी) लेकर पहुंचे जहां पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। कांग्रेस के दिग्गज नेता श्रीप्रकाश जायसवाल काफी लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और करीब चार वर्ष से सार्वजनिक कार्यक्रमों में जाने से दूरी बना ली थी। यहां तक अस्वस्थता के चलते 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने पार्टी हाईकमान से चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था। धीरे—धीरे समय बीतता गया और उनका स्वास्थ्य बराबर गिरता ही चला गया। इधर बीते दो माह से लगातार उनके शुभचिंतक उनके आवास पर पहुंचकर उनका हालचाल लेने पहुंचते रहे। शुक्रवार को दोपहर उन्हे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी तो परिजनों ने डाक्टर को बुलाकर इलाज करवाया और कुछ घंटे बाद उन्हे फिर परेशानी बढ़ी। इस पर घरेलू डाक्टर की सलाह पर परिजन देर शाम रावतपुर स्थित कार्डियोलॉजी लेकर पहुंचे जहां डाक्टरों ने उन्हे मृत घोषित कर दिया। कार्डियोलॉजी के वरिष्ठ डाक्टर अवधेश कुमार शर्मा ने बताया कि पूर्व मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल की रास्ते में ही मौत हो चुकी थी। वैभव सूर्यवंशी बने भारतीय टीम के लिए चुने जाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी वहीं उनकी मौत के बाद कानपुर की राजनीति में सन्नाटा पसर गया और उनके निवास के बाहर लोगों का जमावड़ा लगना शुरु हो गया। कानपुर नगर ग्रामीण कॉंग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष संदीप शुक्ला ने भावुकता भरे शब्दों में कहा कि उनका इस तरह से चले जाना केवल कांग्रेस के लिए ही नहीं बल्कि भारतीय राजनीति के लिए एक बड़ा झटका है जिसकी भरपाई हो पाना मुश्किल है। आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 शृंखला के लिए भारतीय टीम घोषित, श्रेयस अय्यर बने कप्तान मेयर से लेकर केन्द्रीय मंत्री तक का सफर 25 सितंबर 1944 को औद्योगिक नगरी कानपुर में जन्मे श्रीप्रकाश युवावस्था से ही राजनीति में प्रवेश कर चुके थे। सर्वप्रथम साल 1989 में पहली बार वह कानपुर के मेयर के लिए चुने गए। फिर यहां से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसके बाद 1999, 2004 और 2009 में लोकसभा सदस्य चुने गए। केंद्र में यूपीए-1 की सरकार में 2004 से 2009 तक गृह राज्य मंत्री रहे। वहीं केंद्र की यूपीए-2 सरकार में 2009 से 2011 तक स्वतंत्र प्रभार और 2011 से 2014 तक कैबिनेट मंत्री के रूप में बतौर कोयला मंत्रालय की बड़ी जिम्मेदारी का निर्वहन किया। अंडर-18 एशिया कप : जापान को 4-1 से हराकर भारतीय पुरुष हॉकी टीम बनी चैंपियन मोदी लहर से नहीं पाए उबर श्रीप्रकाश जायसवाल कानपुर की राजनीति में इस कदर पकड़ बना ली थी कि लोगों के दिलों में राज करने लगे थे। लोग उन्हे सुख के कम दुख के अधिक साथी के रुप में याद करते थे। यह पहचान उनकी नरेन्द्र मोदी लहर में एकाएक धड़ाम हो गई और भारी मतों से 2014 का लोकसभा चुनाव हार गये। इसके बाद 2019 में भी कांग्रेस ने उन पर विश्वास जताया लेकिन फिर चुनाव हारकर मोदी लहर से उबर नहीं पा सके।
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कानपुर, 28 नवम्बर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के कानपुर से तीन बार सांसद व केन्द्र की मनमोहन सरकार में कोयला मंत्री रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्रीप्रकाश जायसवाल का 81 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह काफी समय से बीमार चल रहे थे और शुक्रवार को उनका स्वास्थ्य ज्यादा खराब हो गया। परिजन आनन—फानन में उन्हे रावतपुर स्थित हृदय रोग संस्थान (कार्डियोलॉजी) लेकर पहुंचे जहां पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
कांग्रेस के दिग्गज नेता श्रीप्रकाश जायसवाल काफी लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और करीब चार वर्ष से सार्वजनिक कार्यक्रमों में जाने से दूरी बना ली थी। यहां तक अस्वस्थता के चलते 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने पार्टी हाईकमान से चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था। धीरे—धीरे समय बीतता गया और उनका स्वास्थ्य बराबर गिरता ही चला गया। इधर बीते दो माह से लगातार उनके शुभचिंतक उनके आवास पर पहुंचकर उनका हालचाल लेने पहुंचते रहे। शुक्रवार को दोपहर उन्हे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी तो परिजनों ने डाक्टर को बुलाकर इलाज करवाया और कुछ घंटे बाद उन्हे फिर परेशानी बढ़ी। इस पर घरेलू डाक्टर की सलाह पर परिजन देर शाम रावतपुर स्थित कार्डियोलॉजी लेकर पहुंचे जहां डाक्टरों ने उन्हे मृत घोषित कर दिया। कार्डियोलॉजी के वरिष्ठ डाक्टर अवधेश कुमार शर्मा ने बताया कि पूर्व मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल की रास्ते में ही मौत हो चुकी थी।
वहीं उनकी मौत के बाद कानपुर की राजनीति में सन्नाटा पसर गया और उनके निवास के बाहर लोगों का जमावड़ा लगना शुरु हो गया। कानपुर नगर ग्रामीण कॉंग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष संदीप शुक्ला ने भावुकता भरे शब्दों में कहा कि उनका इस तरह से चले जाना केवल कांग्रेस के लिए ही नहीं बल्कि भारतीय राजनीति के लिए एक बड़ा झटका है जिसकी भरपाई हो पाना मुश्किल है।
25 सितंबर 1944 को औद्योगिक नगरी कानपुर में जन्मे श्रीप्रकाश युवावस्था से ही राजनीति में प्रवेश कर चुके थे। सर्वप्रथम साल 1989 में पहली बार वह कानपुर के मेयर के लिए चुने गए। फिर यहां से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसके बाद 1999, 2004 और 2009 में लोकसभा सदस्य चुने गए। केंद्र में यूपीए-1 की सरकार में 2004 से 2009 तक गृह राज्य मंत्री रहे। वहीं केंद्र की यूपीए-2 सरकार में 2009 से 2011 तक स्वतंत्र प्रभार और 2011 से 2014 तक कैबिनेट मंत्री के रूप में बतौर कोयला मंत्रालय की बड़ी जिम्मेदारी का निर्वहन किया।
श्रीप्रकाश जायसवाल कानपुर की राजनीति में इस कदर पकड़ बना ली थी कि लोगों के दिलों में राज करने लगे थे। लोग उन्हे सुख के कम दुख के अधिक साथी के रुप में याद करते थे। यह पहचान उनकी नरेन्द्र मोदी लहर में एकाएक धड़ाम हो गई और भारी मतों से 2014 का लोकसभा चुनाव हार गये। इसके बाद 2019 में भी कांग्रेस ने उन पर विश्वास जताया लेकिन फिर चुनाव हारकर मोदी लहर से उबर नहीं पा सके।
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