नियोजित एवं वित्तरहित शिक्षकों को मतदाता बनने से रोकना उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन: रणजीत

नियोजित एवं वित्तरहित शिक्षकों को मतदाता बनने से रोकना उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन: रणजीत

Chhapra: बिहार शिक्षा मंच के संयोजक एवं सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के भावी प्रत्याशी प्रो० डॉ रणजीत कुमार ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी, बिहार एवं आयुक्त, सारण प्रमंडल-सह-निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र, छपरा-3 को पत्र लिखकर सिवान एवं पूर्वी चंपारण जिले के शिक्षकों को सारण शिक्षक निर्वाचक नामावली में नाम शामिल करने में आ रही बाधाओं को दूर करने का आग्रह किया है.

उन्होंने लिखा है कि सारण, गोपालगंज एवं प० चंपारण जिले के अर्हता प्राप्त शिक्षकों को सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के आसन्न चुनाव हेतु तैयार हो रहे निर्वाचक नामावली में नाम शामिल करवाने में किसी तरह की बाधा का सामना नही करना पड़ा है लेकिन सिवान एवं पूर्वी चंपारण में शिक्षकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. सिवान एवं पूर्वी चंपारण में दो हज़ार से अधिक फार्म विहित पपत्र-19 में भरकर शिक्षण संस्थान के अध्यक्ष के हस्ताक्षर एवं मुहर के साथ संबंधित प्रखंड में 6 नवंबर तक जमा किये गए. उपमुख्य निर्वाचन पदा०, बिहार के ज्ञापाक- 7709 दिनांक 08.11.19 के आलोक में सिवान जिला में कार्यरत शिक्षकों से वेतन खाता से संबंधित पासबुक की छायाप्रति मांगी गई थी.

शिक्षकों ने संबंधित दस्तावेज की छायाप्रति भी संबंधित पदाधिकारी को उपलब्ध कराया. उसके बावजूद सरकारी विद्यालय एवं महाविद्यालय तथा अनुदानित शिक्षण संस्थानों के अधिकांश शिक्षकों का नाम प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में शामिल नही हो पाया है. वैसे शिक्षकों को ज्यादा परेशानी हो रही है जो सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से बाहर के जिले से है और सिवान या पूर्वी चंपारण में नौकरी कर रहे है. प्रखंड स्तर के पदाधिकारी संबंधित शिक्षक से कह रहे है कि आप जहाँ के मूल निवासी है, वही मतदाता बन सकते है जबकि नियमानुसार प्रखंड के कर्मचारियों को शिक्षकों के सामान्य निवास की खुद जांच कर आश्वस्त हो जाना है. विदित हो कि सरकारी विद्यालय/महाविद्यालय में काम करने वाले शिक्षकों का पूरा ब्यौरा जिलाधिकारी उप विकास आयुक्त, नगर परिषद कार्यपालक पदा० एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय में उपलब्ध रहता है. किसी भी आदेश या नियम की सकारात्मक व्याख्या होनी चाहिए और सभी जिलों में समान प्रक्रिया का अनुपालन सुनिश्चित होना चाहिए. मतदाता बनना 3 साल की सेवा पूरी कर चुके शिक्षकों का संवैधानिक अधिकार है.

1. सिवान एवं पूर्वी चंपारण जिले में निर्वाचक नामावली तैयार करने से जुड़े अधिकारियों को अविलंब निर्देशित किया जाए कि निर्वाचक नामावली में नाम शामिल करने हेतु आवेदन करने वाले अर्हता प्राप्त शिक्षकों का नाम हर हाल में मतदाता सूची में शामिल किया जाए.

2. प्रखंड स्तर के अधिकारी अपने स्तर से शिक्षकों के सामान्य निवास की जांच करवा लें ताकि शिक्षकों को बार-बार प्रखंड मुख्यालय का चक्कर नही लगाना पड़े.

3. आधार कार्ड एवं मतदाता पहचान पत्र को भी सामान्य निवासी होने के प्रमाण-पत्र के रूप में स्वीकृति प्रदान किया जाए.

4.कुछ विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में शिक्षकों के रहने की भी व्यवस्था है. अतः विद्यालय के पता को भी सामान्य निवास स्थल माना जाय.

5. सरकारी माध्यमिक विद्यालय एवं महाविद्यालय के प्राचार्य सरकारी व्यवस्था के अंग होते है और उनके द्वारा प्रमाणित एवं अग्रसारित आवेदन पत्र को स्वीकार किया जाना चाहिए.

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