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देशवासी राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में सक्रिय भागीदारी निभाएं : राष्ट्रपति

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नई दिल्ली, 25 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ने रविवार को राष्ट्र के नाम अपने संदेश में कहा कि वर्तमान में सरकार और जन-सामान्य के बीच की दूरी को निरंतर कम किया जा रहा है और आपसी विश्वास पर आधारित सुशासन पर बल दिया जा रहा है। पिछले दशक के दौरान राष्ट्रीय लक्ष्यों को जनभागीदारी के माध्यम से प्राप्त करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इसी तरह अन्य राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में सभी देशवासी अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएंगे।

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गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मु ने इस दिन को राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ देशभक्ति को सुदृढ़ करने का अवसर बताया और सभी नागरिकों से विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया गया है।

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देश और विदेश में रहने वाले भारतीयों को उन्होंने राष्ट्रीय पर्व की हार्दिक बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि गणतन्त्र दिवस का पावन पर्व हमारे अतीत, वर्तमान और भविष्य में देश की दशा और दिशा का अवलोकन करने का अवसर होता है। 26 जनवरी 1950 के दिन से लोकतन्त्र की जननी, भारतभूमि, उपनिवेश के विधि-विधान से मुक्त हुई और हमारा लोक-तंत्रात्मक गणराज्य अस्तित्व में आया। उन्होंने संविधान को विश्व इतिहास में सबसे बड़े गणराज्य का आधार-ग्रंथ बताया।

राष्ट्रपति ने देश की सबसे बड़ी युवा आबादी को विकास का ध्वजवाहक बताया। उन्होंने कहा कि ‘मेरा युवा भारत (माय भारत)’ पहल के माध्यम से युवाओं को कौशल विकास, नेतृत्व और नवाचार से जोड़ा जा रहा है। स्टार्टअप संस्कृति में युवाओं की भूमिका उल्लेखनीय रही है। उनका मानना है कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में युवा शक्ति निर्णायक होगी।

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उन्होंने कहा कि आज देश में लोगों के जीवन को आसान बनाने के लिए अनेक अनावश्यक नियमों को निरस्त किया गया है। कई अनुपालन को समाप्त किया गया है तथा जनता के हित में व्यवस्थाओं को सरल बनाया गया है। टेक्नॉलॉजी के माध्यम से लाभार्थियों को सुविधाओं के साथ सीधे जोड़ा जा रहा है।

भारत की आर्थिक प्रगति को रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना हुआ है और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। जीएसटी के माध्यम से ‘वन नेशन, वन मार्केट’ की अवधारणा को मजबूती मिली है। श्रम सुधारों और आधारभूत ढांचे में निवेश से आर्थिक संरचना को सुदृढ़ किया गया है। साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा, भाषाओं और संविधान को जन-जन तक पहुंचाने पर बल दिया गया है। आठवीं अनुसूची की सभी भाषाओं में संविधान की उपलब्धता से संवैधानिक चेतना को बढ़ावा मिला है। सुशासन, तकनीक आधारित सेवाओं, नियमों के सरलीकरण और जनभागीदारी से ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ को प्राथमिकता दी जा रही है।

उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता, सशस्त्र बलों की ताकत और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमताओं को रेखांकित किया गया। साथ ही कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘लाइफ’ मिशन के माध्यम से प्रकृति-संवेदनशील जीवनशैली को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज भारत वैश्विक शांति और मानवता के संदेश के साथ आगे बढ़ रहा है।

राष्ट्रपति ने लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल 150वीं जयंती और 23 जनवरी को देशवासियों ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती मनाये जाने का जिक्र किया। राष्ट्रपति ने कहा कि यह उत्सव देशवासियों में राष्ट्रीय एकता तथा गौरव की भावना को मजबूत बनाते हैं। वहीं राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष होने पर उन्होंने कहा कि भारत माता के दैवी स्वरूप की वंदना का यह गीत, जन-मन में राष्ट्र-प्रेम का संचार करता है।

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उन्होंने कहा, “राष्ट्रीयता के महाकवि सुब्रमण्य भारती ने तमिल भाषा में ‘वन्दे मातरम् येन्बोम्’ अर्थात ‘हम वन्दे मातरम् बोलें’ इस गीत की रचना करके वन्दे मातरम् की भावना को और भी व्यापक स्तर पर जनमानस के साथ जोड़ा। अन्य भारतीय भाषाओं में भी इस गीत के अनुवाद लोकप्रिय हुए। ऑरोबिंदो ने ‘वन्दे मातरम्’ का अंग्रेजी अनुवाद किया। ऋषितुल्य बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वन्दे मातरम्’ हमारी राष्ट्र-वंदना का स्वर है।”

राष्ट्रपति ने सेना, पुलिस, किसान, महिला, स्वास्थ्यकर्मी, सफाई मित्र, वैज्ञानिक और इंजीनियर, श्रमिक, युवा, कलाकार, शिल्पकार और साहित्यकार विशेषज्ञ उद्यमी, सेवा संस्थान, सरकारी कर्मचारियों की राष्ट्र निर्माण में भूमिका को रेखांकित किया ।

‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’ पर उन्होंने बाबासाहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर को याद किया । उन्होंने कहा कि वे मानते थे कि मताधिकार के प्रयोग से राजनैतिक शिक्षा सुनिश्चित होती है। हमारे मतदाता, बाबासाहब की सोच के अनुरूप, अपनी राजनैतिक जागरूकता का परिचय दे रहे हैं। मतदान में महिलाओं की बढ़ती हुई भागीदारी हमारे गणतन्त्र का एक शक्तिशाली आयाम है।

राष्ट्रपति ने महिलाओं की सक्रियता और समर्थन को देश के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उनके स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा एवं आर्थिक सशक्तीकरण हेतु किए जा रहे राष्ट्रीय प्रयासों से अनेक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। बहनें और बेटियां परंपरागत रूढ़ियों को तोड़कर आगे बढ़ रही हैं। इस संदर्भ में उन्होंने खेलों और सेना में योगदान की सराहना की।

उन्होंने कहा, “पंचायती राज संस्थाओं में महिला जन-प्रतिनिधियों की संख्या लगभग 46 प्रतिशत है। महिलाओं के राजनैतिक सशक्तीकरण को नई ऊंचाई देने वाले ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ से, महिलाओं के नेतृत्व द्वारा विकास की सोच को अभूतपूर्व शक्ति मिलेगी।”

राष्ट्रपति ने कहा कि समावेशी सोच के साथ वंचित वर्गों के कल्याण और विकास को प्राथमिकता देते हुए सरकार द्वारा अनेक योजनाओं को धरातल पर उतारा गया है। 15 नवंबर को धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर पांचवां ‘जनजातीय गौरव दिवस’ मनाया गया। ‘आदि कर्मयोगी’ अभियान से जनजातीय समुदायों में नेतृत्व क्षमता विकसित की जा रही है। संग्रहालयों के निर्माण सहित कई पहलों के माध्यम से उनकी विरासत को संरक्षित किया जा रहा है। इसके अलावा ‘राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन’, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्याल, ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ और ‘पीएम-जनमन योजना’ का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि किसानों को समाज और अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए उनके हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। किसानों के परिश्रम से देश खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बना है और कृषि निर्यात को बढ़ावा मिला है। किसानों को उचित मूल्य, रियायती ऋण, फसल बीमा, बेहतर बीज, सिंचाई सुविधाएं, उर्वरक, आधुनिक तकनीक और जैविक खेती से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। ‘पीएम किसान सम्मान निधि’ योजना के माध्यम से किसानों के योगदान को सम्मान और आर्थिक संबल प्रदान किया जा रहा है।

गरीबी उन्मूलन की दिशा में हो रहे प्रयासों का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि करोड़ों लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाने के साथ यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि वे दोबारा गरीबी में न लौटें। ‘पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना’ के तहत लगभग 81 करोड़ लोगों को खाद्यान्न सुरक्षा दी जा रही है। इसके साथ ही चार करोड़ से अधिक पक्के घरों का निर्माण कर गरीब परिवारों को गरिमापूर्ण जीवन का आधार मिला है। ये प्रयास महात्मा गांधी के सर्वोदय के सिद्धांतों को साकार करते हैं।

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