लोक शिकायत निवारण अधिनियम 6 जून से होगा लागू: डीएम

लोक शिकायत निवारण अधिनियम 6 जून से होगा लागू: डीएम

छपरा: बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम 6 जून से लागू हो जाएगा. इस अधिनियम के माध्यम से आम लोगो की शिकायतों के निवारण की सुदृढ़ कार्य प्रणाली विकसित कर एक निश्चित समय सीमा (अधिकतम 60 कार्य दिवस) के अंतर्गत परिवाद की सुनवाई एवं निवारण किया जायेगा.

अधिनियम के तहत शिकायतों के निवारण हेतु तीन स्तरों पर (अनुमंडल, जिला एवं विभागीय) शिकायत निवारण पदाधिकारी का कार्यालय स्थापित किया जा रहा है. अनुमंडल शिकायत निवारण पदाधिकारी अनुमंडल स्तरीय कार्यालय एवं इसके नीचे के कार्यालयों से संबंधित शिकायतों का निवारण करेंगे. जिला स्तरीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी द्वारा अनुमंडल स्तर से उपर एवं जिला स्तरीय कार्यालयों से संबंधित शिकायतों का निवारण किया जायेगा. डीएम दीपक आनंद ने बताया कि विभागीय स्तर से संबंधित शिकायतों के निवारण हेतु प्रत्येक विभाग में उप सचिव स्तर के पदाधिकारी विभागीय शिकायत निवारण पदाधिकारी के दायित्व का निर्वहन करेंगे. इस अधिनियम के अधीन अपने परिवाद के निवारण का इच्छुक व्यक्ति प्रपत्र- 1 अथवा सादे कागज में अपना परिवाद संबंधित लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के कार्यालय में जमा कर सकता है.

परिवाद डाक, इमेल, एसएमएस, आॅनलाईन पोर्टल, काल सेंटर के माध्यम से भी दर्ज कराया जा सकेगा. परिवाद की सुनवाई हेतु किसी भी प्रकार के शुल्क का भुगतान नहीं करना होगा. इस अधिनियम के तहत लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी द्वारा निर्धारित समय सीमा के अंतर्गत सुनवाई नहीं करने या निर्णय से असंतुष्ट होने की स्थिति में प्रथम अपील, द्वितीय अपील या पुनरीक्षण का प्रावधान किया गया है.

डीपीआरओ बी0के0 शुक्ला ने बताया कि लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी या अन्य कोई लोक प्राधिकार या प्रथम अपीलीय प्राधिकार द्वारा बिना किसी पर्याप्त और युक्तियुक्त कारण के निर्धारित समय-सीमा के अंतर्गत सुनवाई एवं निवारण का अवसर प्रदान करने में विफलता के आलोक में द्वितीय अपीलीय प्राधिकार द्वारा दंड अधिरोपित किया जायेगा. जो न्यूनतम पांच सौ रूपयें तक होगा. अधिरोपित दंड की राशि की वसूली संबंधित पदाधिकारी के वेतन से की जाएगी.

वर्जित परिवाद- इस अधिनियम के तहत किसी लोक सेवक, सेवारत या सेवानिवृत के सेवा मामलों से संबंधित मामला या कोई ऐसा मामला जिसमें किसी न्यायालय या अधिकरण की अधिकारिता हो या सूचना का अधिकार अधिनियम- 2005 के अधीन किसी मामले या बिहार लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम- 2011 के अधीन अधिसूचित सेवाओं से संबंधित शिकायत सम्मिलित नहीं है.

अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी का प्रथम अपीलीय प्राधिकार अपर समाहर्ता, द्वितीय अपीलीय प्राधिकार जिला पदाधिकारी तथा पुनरीक्षण प्राधिकार प्रमंडलीय आयुक्त रहेंगे. इसी प्रकार जिला स्तरीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकार (अपर समाहर्ता) का प्रथम अपीलीय प्राधिकार प्रमंडलीय आयुक्त द्वितीय अपीलीय प्राधिकार संबंधित विभागीय सचिव/प्रधान सचिव तथा पुनरीक्षण प्राधिकार विभागीय जांच आयुक्त रहेंगे. विभागीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी का प्रथम अपीलीय प्राधिकार संयुक्त सचिव/अपर सचिव/विशेष सचिव रहेंगे. द्वितीय अपीलीय प्राधिकार के रूप में विभागीय सचिव/प्रधान सचिव रहेंगे।. विभागीय जांच आयुक्त पुनरीक्षण प्राधिकार के रूप में रहेंगे.

डीएम दीपक आनंद के निर्देश के आलोक में इस अधिनियम के क्रियान्वयन से पूर्व सभी जिला, अनुमंडल एवं प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों को एक कार्यशाला का आयोजन कर प्रशिक्षित किया जा रहा है. सभी पदाधिकारियों को अधिनियम के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है. जिला पदाधिकारी ने सभी पदाधिकारियों को इस अधिनियम के क्रियान्वयन में पूरी पारदर्शिता, समयबद्धता एवं संवेदनशीलता बरतने का निदेश दिया.

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