नई दिल्ली, 27 फ़रवरी (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने झूठी शिकायतों के आधार पर आपराधिक मुकदमों के बढ़ते चलन पर चिंता जताई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने आपराधिक प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने की मांग पर सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है।
याचिका भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि फर्जी मामलों के कारण ईमानदार लोग डर में जी रहे हैं। ऐसे फर्जी मुकदमों की वजह से कोर्ट पर भी बोझ बढ़ रहा है। अक्सर दीवानी मामलों में आपराधिक केस दर्ज करवा दिया जाता है। जमीन का झगड़ा है तो एससी-एसटी एक्ट जैसे गंभीर केस दर्ज करवा दिया जाता है। कुछ मामलों में महिलाओं को आगे कर छेड़छाड़ या रेप का झूठा केस दर्ज करवा दिया जाता है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जिस व्यक्ति को शिकायतकर्ता दिखाया जाता है, कई बात उसे पता ही नहीं होता है कि उसके नाम से शिकायत दर्ज की गई है। अमीर और प्रभावशाली लोग फर्जी हस्ताक्षर के जरिये गरीबों का शोषण करते हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अभी हाल ही में एक महिला ने खुद आकर कहा कि एक राजनीतिक नेता का उसके केस से कोई लेना-देना नहीं है। उसके नाम पर नेता के खिलाफ फर्जी शिकायत की गई है।









