मेरठ, 14 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में मेरठ जिले के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में बुधवार को जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने दोषी साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी को फांसी की सजा सुनाई। लगभग 13 माह चली इस सुनवाई में 22 गवाहों के बयान के आधार पर न्यायालय ने फैसला सुनाया। अपने गुनाहाें की सजा पाये जाने पर दाेनाें की आंखों में आंसू आ गए।
जिला कारागार से बुधवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से दोनों की पेशी हुई। कोर्ट ने सजा सुनाने से पहले उनकी दिनचर्या और अपने पक्ष में कुछ कहने की इजाजत दी लेकिन दोनों ने कहा कि वह कुछ भी नहीं बोलना चाहते हैं। हालांकि मुस्कान ने अपनी बेटी से मिलने की गुजारिश न्यायालय से की। बचाव पक्ष की अधिवक्ता रेखा जैन ने बच्चियों के भविष्य और पालन-पोषण का हवाला देते हुए अदालत से कम सजा देने की अपील की। लंच के बाद कोर्ट ने सभी साक्ष्यों और दलीलों और बयान के आधार पर दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है।
जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्ण कुमार चौबे ने अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में पैरवी की थी। मेरठ के सीनियर जेल सुपरिटेंडेंट वीरेश राज शर्मा ने बताया कि मेरठ कोर्ट में सजा के बिंदु पर सुबह पहली सुनवाई हुई। इस दौरान दोनों आरोपितों को अलग-अलग पेश किया गया था। कोर्ट से मृत्युदंड की सजा मिलने के बाद दोनों दोषी काफी भावुक और आंखों से आंसू दिखे।
उल्लेखनीय है कि सौरभ 24 फरवरी 2025 को लंदन से नौकरी छोड़कर अपने घर मेरठ आया था। 3 मार्च 2025 को मेरठ के ब्रह्मपुरी इलाके में सौरभ राजपूत की हत्या की गई थी। हत्या के बाद शव के टुकड़े कर उसे एक नीले ड्रम में भरकर सीमेंट से जमा दिया था। सौरभ के भाई बबलू की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच के बाद हत्या के आरोप में मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मार्च 2025 को गिरफ्तार किया था। 30 सितंबर 2026 को कोर्ट ने तमाम साक्ष्य और बयानों के आधार पर दोनों आरोपितों को दोषी करार दिया था। आज कोर्ट ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई है।


















