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भारत की आत्मा सेवा, सहिष्णुता और संस्कार में बसती है : दत्तात्रेय होसबाले

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दरभंगा, 17 जनवरी (हि.स.)। मिथिला की पावन धरती पर आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विशेषताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि मिथिला आना माता सीता की गोद में आने जैसा है। उन्होंने साधु-संतों, महात्माओं, संघ कार्यकर्ताओं तथा माताओं-बहनों का अभिनंदन करते हुए भारत भूमि को नमन किया।

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दत्तात्रेय होसबाले ने अपने संबोधन में कहा कि भारत वह भूमि है जहां “कंकर-कंकर में शंकर” और “बाल-बाल में राम” का भाव बसता है। यहां पेड़-पौधे, फूल-फल तक पूज्य हैं और भारतीय सभ्यता करुणा, संवेदना और सेवा पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि भारत ने सदैव शरण दी है, चाहे तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा हों या पारसी और यहूदी समुदाय, जिन्होंने सम्मानपूर्वक जीवन जीते हुए देश की प्रगति में योगदान दिया।

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इतिहास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हजार वर्षों के संघर्ष के बावजूद भारत ने कभी हार नहीं मानी। सोमनाथ से अयोध्या तक मंदिरों का पुनर्निर्माण इसी संघर्ष और संकल्प का प्रमाण है। उन्होंने चेताया कि जब-जब समाज जाति, भाषा और भेदभाव में बंटा, तब-तब पराजय मिली। अंग्रेजों की “फूट डालो, राज करो” नीति का उदाहरण देते हुए उन्होंने सामाजिक एकता को मजबूत करने पर बल दिया।

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नई पीढ़ी के समक्ष चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए होसबाले ने कहा कि नशाखोरी, पर्यावरण की उपेक्षा और आचरण में गिरावट समाज के लिए घातक हैं। उन्होंने कहा कि राम नाम लेने से स्वर्ग मिलता है, लेकिन राम जैसे कर्म करने से हर युग में स्वर्ग बनता है। बाहरी स्वच्छता के साथ-साथ मन की गंदगी दूर करने का आह्वान करते हुए उन्होंने आचरण सुधार पर जोर दिया।

देश के भविष्य पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत को भारत बनाए रखना विश्व के लिए आवश्यक है। कुटीर उद्योग, स्थानीय संस्कृति, परंपरा और नैतिक मूल्यों की रक्षा से ही राष्ट्र सशक्त बनेगा। उन्होंने कहा कि पहले स्वयं सुधार होगा, तभी अगली पीढ़ी सुधरेगी और न्याय के मार्ग पर चलने वाले बच्चे ही सच्ची पूंजी हैं।

इससे पूर्व कार्यक्रम की अध्यक्षता बौआ भगवान ने की। मंच पर जीवेश्वर जी महाराज, बौआ नंद जी महाराज, संचालनकर्ता राजेश झा, प्रांत प्रचारक रविशंकर, केएसडीएसयू दरभंगा के कुलपति डॉ. लक्ष्मी निवास पांडे तथा कबीर मठ के महंत मनमोहन दास उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना के भाव के साथ हुआ। उपस्थित जनसमूह “तेरा वैभव अमर रहे मां, हम दिन चार रहे न रहे” जैसे विचारों से भावविभोर दिखाई दिया।

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